Read calmly and use the previous/next links at the bottom to move through the surahs in order.
Quran Surah

Surah Al-Hajj

Quran Surah

Surah 22: Al-Hajj

الحج

Verse count: 78

Opening Bismillah

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं।

Verse 1

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱتَّقُواْ رَبَّڪُمۡ ۚ إِنَّ زَلۡزَلَةَ ٱلسَّاعَةِ شَىۡءٌ عَظِيمٌ

ऐ लोगों अपने परवरदिगार से डरते रहो (क्योंकि) क़यामत का ज़लज़ला (कोई मामूली नहीं) एक बड़ी (सख्त) चीज़ है

Verse 2

يَوۡمَ تَرَوۡنَهَا تَذۡهَلُ ڪُلُّ مُرۡضِعَةٍ عَمَّآ أَرۡضَعَتۡ وَتَضَعُ ڪُلُّ ذَاتِ حَمۡلٍ حَمۡلَهَا وَتَرَى ٱلنَّاسَ سُكَـٰرَىٰ وَمَا هُم بِسُكَـٰرَىٰ وَلَـٰكِنَّ عَذَابَ ٱللَّهِ شَدِيدٌ

जिस दिन तुम उसे देख लोगे तो हर दूध पिलाने वाली (डर के मारे) अपने दूध पीते (बच्चे) को भूल जायेगी और सारी हामला औरते अपने-अपने हमल (बेहिश्त से) गिरा देगी और (घबराहट में) लोग तुझे मतवाले मालूम होंगे हालाँकि वह मतवाले नहीं हैं बल्कि खुदा का अज़ाब बहुत सख्त है कि लोग बदहवास हो रहे हैं

Verse 3

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُجَـٰدِلُ فِى ٱللَّهِ بِغَيۡرِ عِلۡمٍ وَيَتَّبِعُ ڪُلَّ شَيۡطَـٰنٍ مَّرِيدٍ

और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बग़ैर जाने खुदा के बारे में (ख्वाह म ख्वाह) झगड़ते हैं और हर सरकश शैतान के पीछे हो लेते हैं

Verse 4

كُتِبَ عَلَيۡهِ أَنَّهُ ۥ مَن تَوَلَّاهُ فَأَنَّهُ ۥ يُضِلُّهُ ۥ وَيَہۡدِيهِ إِلَىٰ عَذَابِ ٱلسَّعِيرِ

जिन (की पेशानी) के ऊपर (ख़ते तक़दीर से) लिखा जा चुका है कि जिसने उससे दोस्ती की हो तो ये यक़ीनन उसे गुमराह करके छोड़ेगा और दोज़ख़ के अज़ाब तक पहुँचा देगा

Verse 5

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِن كُنتُمۡ فِى رَيۡبٍ مِّنَ ٱلۡبَعۡثِ فَإِنَّا خَلَقۡنَـٰكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطۡفَةٍ ثُمَّ مِنۡ عَلَقَةٍ ثُمَّ مِن مُّضۡغَةٍ مُّخَلَّقَةٍ وَغَيۡرِ مُخَلَّقَةٍ لِّنُبَيِّنَ لَكُمۡ ۚ وَنُقِرُّ فِى ٱلۡأَرۡحَامِ مَا نَشَآءُ إِلَىٰٓ أَجَلٍ مُّسَمًّى ثُمَّ نُخۡرِجُكُمۡ طِفۡلاً ثُمَّ لِتَبۡلُغُوٓاْ أَشُدَّڪُمۡ‌ ۖ وَمِنڪُم مَّن يُتَوَفَّىٰ وَمِنڪُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰٓ أَرۡذَلِ ٱلۡعُمُرِ لِڪَيۡلَا يَعۡلَمَ مِنۢ بَعۡدِ عِلۡمٍ شَيْئًا ۚ وَتَرَى ٱلۡأَرۡضَ هَامِدَةً فَإِذَآ أَنزَلۡنَا عَلَيۡهَا ٱلۡمَآءَ ٱهۡتَزَّتۡ وَرَبَتۡ وَأَنۢبَتَتۡ مِن ڪُلِّ زَوۡجِۭ بَهِيجٍ

लोगों अगर तुमको (मरने के बाद) दोबारा जी उठने में किसी तरह का शक है तो इसमें शक नहीं कि हमने तुम्हें शुरू-शुरू मिट्टी से उसके बाद नुत्फे से उसके बाद जमे हुए ख़ून से फिर उस लोथड़े से जो पूरा (सूडौल हो) या अधूरा हो पैदा किया ताकि तुम पर (अपनी कुदरत) ज़ाहिर करें (फिर तुम्हारा दोबारा ज़िन्दा) करना क्या मुश्किल है और हम औरतों के पेट में जिस (नुत्फे) को चाहते हैं एक मुद्दत मुअय्यन तक ठहरा रखते हैं फिर तुमको बच्चा बनाकर निकालते हैं फिर (तुम्हें पालते हैं) ताकि तुम अपनी जवानी को पहुँचो और तुममें से कुछ लोग तो ऐसे हैं जो (क़ब्ल बुढ़ापे के) मर जाते हैं और तुम में से कुछ लोग ऐसे हैं जो नाकारा ज़िन्दगी बुढ़ापे तक फेर लाए हैं जातें ताकि समझने के बाद सठिया के कुछ भी (ख़ाक) न समझ सके और तो ज़मीन को मुर्दा (बेकार उफ़तादा) देख रहा है फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने और उभरने लगती है और हर तरह की ख़ुशनुमा चीज़ें उगती है तो ये क़ुदरत के तमाशे इसलिए दिखाते हैं ताकि तुम जानो

Verse 6

ذَٲلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡحَقُّ وَأَنَّهُ ۥ يُحۡىِ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَأَنَّهُ ۥ عَلَىٰ كُلِّ شَىۡءٍ قَدِيرٌ

कि बेशक खुदा बरहक़ है और (ये भी कि) बेशक वही मुर्दों को जिलाता है और वह यक़ीनन हर चीज़ पर क़ादिर है

Verse 7

وَأَنَّ ٱلسَّاعَةَ ءَاتِيَةٌ لَّا رَيۡبَ فِيہَا وَأَنَّ ٱللَّهَ يَبۡعَثُ مَن فِى ٱلۡقُبُورِ

और क़यामत यक़ीनन आने वाली है इसमें कोई शक नहीं और बेशक जो लोग क़ब्रों में हैं उनको खुदा दोबारा ज़िन्दा करेगा

Verse 8

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُجَـٰدِلُ فِى ٱللَّهِ بِغَيۡرِ عِلۡمٍ وَلَا هُدًى وَلَا كِتَـٰبٍ مُّنِيرٍ

और लोगों में से कुछ ऐसे भी है जो बेजाने बूझे बे हिदायत पाए बगैर रौशन किताब के (जो उसे राह बताए) खुदा की आयतों से मुँह मोडे

Verse 9

ثَانِىَ عِطۡفِهِۦ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ‌ ۖ لَهُ ۥ فِى ٱلدُّنۡيَا خِزۡىٌ‌ ۖ وَنُذِيقُهُ ۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَـٰمَةِ عَذَابَ ٱلۡحَرِيقِ

(ख्वाहमख्वाह) खुदा के बारे में लड़ने मरने पर तैयार है ताकि (लोगों को) ख़ुदा की राह बहका दे ऐसे (नाबकार) के लिए दुनिया में (भी) रूसवाई है और क़यामत के दिन (भी) हम उसे जहन्नुम के अज़ाब (का मज़ा) चखाएँगे

Verse 10

ذَٲلِكَ بِمَا قَدَّمَتۡ يَدَاكَ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَيۡسَ بِظَلَّـٰمٍ لِّلۡعَبِيدِ

और उस वक्त उससे कहा जाएगा कि ये उन आमाल की सज़ा है जो तेरे हाथों ने पहले से किए हैं और बेशक खुदा बन्दों पर हरगिज़ जुल्म नहीं करता

Verse 11

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَعۡبُدُ ٱللَّهَ عَلَىٰ حَرۡفٍ‌ ۖ فَإِنۡ أَصَابَهُ ۥ خَيۡرٌ ٱطۡمَأَنَّ بِهِۦ‌ ۖ وَإِنۡ أَصَابَتۡهُ فِتۡنَةٌ ٱنقَلَبَ عَلَىٰ وَجۡهِهِۦ خَسِرَ ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأَخِرَةَ ۚ ذَٲلِكَ هُوَ ٱلۡخُسۡرَانُ ٱلۡمُبِينُ

और लोगों में से कुछ ऐसे भी हैं जो एक किनारे पर (खड़े होकर) खुदा की इबादत करता है तो अगर उसको कोई फायदा पहुँच गया तो उसकी वजह से मुतमईन हो गया और अगर कहीं उस कोई मुसीबत छू भी गयी तो (फौरन) मुँह फेर के (कुफ़्र की तरफ़) पलट पड़ा उसने दुनिया और आखेरत (दोनों) का घाटा उठाया यही तो सरीही घाटा है

Verse 12

يَدۡعُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُ ۥ وَمَا لَا يَنفَعُهُ ۥ ۚ ذَٲلِكَ هُوَ ٱلضَّلَـٰلُ ٱلۡبَعِيدُ

खुदा को छोड़कर उन चीज़ों को (हाजत के वक्त) बुलाता है जो न उसको नुक़सान ही पहुँचा सकते हैं और न कुछ नफा ही पहुँचा सकते हैं

Verse 13

يَدۡعُواْ لَمَن ضَرُّهُ ۥۤ أَقۡرَبُ مِن نَّفۡعِهِۦ ۚ لَبِئۡسَ ٱلۡمَوۡلَىٰ وَلَبِئۡسَ ٱلۡعَشِيرُ

यही तो पल्ले दरने की गुमराही है और उसको अपनी हाजत रवाई के लिए पुकारता है जिस का नुक़सान उसके नफे से ज्यादा क़रीब है बेशक ऐसा मालिक भी बुरा और ऐसा रफीक़ भी बुरा

Verse 14

إِنَّ ٱللَّهَ يُدۡخِلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ جَنَّـٰتٍ تَجۡرِى مِن تَحۡتِہَا ٱلۡأَنۡهَـٰرُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَفۡعَلُ مَا يُرِيدُ

बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको (खुदा बेहश्त के) उन (हरे-भरे) बाग़ात में ले जाकर दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी होगीं बेशक खुदा जो चाहता है करता है

Verse 15

مَن كَانَ يَظُنُّ أَن لَّن يَنصُرَهُ ٱللَّهُ فِى ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأَخِرَةِ فَلۡيَمۡدُدۡ بِسَبَبٍ إِلَى ٱلسَّمَآءِ ثُمَّ لۡيَقۡطَعۡ فَلۡيَنظُرۡ هَلۡ يُذۡهِبَنَّ كَيۡدُهُ ۥ مَا يَغِيظُ

जो शख्स (गुस्से में) ये बदगुमानी करता है कि दुनिया और आख़ेरत में खुदा उसकी हरग़िज मदद न करेगा तो उसे चाहिए कि आसमान तक रस्सी ताने (और अपने गले में फाँसी डाल दे) फिर उसे काट दे (ताकि घुट कर मर जाए) फिर देखिए कि जो चीज़ उसे गुस्से में ला रही थी उसे उसकी तद्बीर दूर दफ़ा कर देती है

Verse 16

وَڪَذَٲلِكَ أَنزَلۡنَـٰهُ ءَايَـٰتِۭ بَيِّنَـٰتٍ وَأَنَّ ٱللَّهَ يَہۡدِى مَن يُرِيدُ

(या नहीं) और हमने इस कुरान को यूँ ही वाजेए व रौशन निशानियाँ (बनाकर) नाज़िल किया और बेशक खुदा जिसकी चाहता है हिदायत करता है

Verse 17

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَٱلَّذِينَ هَادُواْ وَٱلصَّـٰبِـِٔينَ وَٱلنَّصَـٰرَىٰ وَٱلۡمَجُوسَ وَٱلَّذِينَ أَشۡرَڪُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ يَفۡصِلُ بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَـٰمَةِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَىۡءٍ شَہِيدٌ

इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया (मुसलमान) और यहूदी और लामज़हब लोग और ईसाई और मजूसी (आतिशपरस्त) और मुशरेकीन (कुफ्फ़ार) यक़ीनन खुदा उन लोगों के दरमियान क़यामत के दिन (ठीक ठीक) फ़ैसला कर देगा इसमें शक नहीं कि खुदा हर चीज़ को देख रहा है

Verse 18

أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ يَسۡجُدُ لَهُ ۥ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٲتِ وَمَن فِى ٱلۡأَرۡضِ وَٱلشَّمۡسُ وَٱلۡقَمَرُ وَٱلنُّجُومُ وَٱلۡجِبَالُ وَٱلشَّجَرُ وَٱلدَّوَآبُّ وَڪَثِيرٌ مِّنَ ٱلنَّاسِ‌ ۖ وَكَثِيرٌ حَقَّ عَلَيۡهِ ٱلۡعَذَابُ ۗ وَمَن يُہِنِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُ ۥ مِن مُّكۡرِمٍ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَفۡعَلُ مَا يَشَآءُ ۩

क्या तुमने इसको भी नहीं देखा कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं और आफताब और माहताब और सितारे और पहाड़ और दरख्त और चारपाए (ग़रज़ कुल मख़लूक़ात) और आदमियों में से बहुत से लोग सब खुदा ही को सजदा करते हैं और बहुतेरे ऐसे भी हैं जिन पर नाफ़रमानी की वजह से अज़ाब का (का आना) लाज़िम हो चुका है और जिसको खुदा ज़लील करे फिर उसका कोई इज्ज़त देने वाला नहीं कुछ शक नहीं कि खुदा जो चाहता है करता है (18) सजदा

Verse 19

۞ هَـٰذَانِ خَصۡمَانِ ٱخۡتَصَمُواْ فِى رَبِّہِمۡ‌ ۖ فَٱلَّذِينَ ڪَفَرُواْ قُطِّعَتۡ لَهُمۡ ثِيَابٌ مِّن نَّارٍ يُصَبُّ مِن فَوۡقِ رُءُوسِہِمُ ٱلۡحَمِيمُ

ये दोनों (मोमिन व काफिर) दो फरीक़ हैं आपस में अपने परवरदिगार के बारे में लड़ते हैं ग़रज़ जो लोग काफ़िर हो बैठे उनके लिए तो आग के कपड़े केता किए गए हैं (वह उन्हें पहनाए जाएँगें और) उनके सरों पर खौलता हुआ पानी उँडेला जाएगा

Verse 20

يُصۡهَرُ بِهِۦ مَا فِى بُطُونِہِمۡ وَٱلۡجُلُودُ

जिस (की गर्मी) से जो कुछ उनके पेट में है (ऑंतें वग़ैरह) और खालें सब गल जाएँगी

Verse 21

وَلَهُم مَّقَـٰمِعُ مِنۡ حَدِيدٍ

और उनके (मारने के) लिए लोहे के गुर्ज़ होंगे

Verse 22

ڪُلَّمَآ أَرَادُوٓاْ أَن يَخۡرُجُواْ مِنۡہَا مِنۡ غَمٍّ أُعِيدُواْ فِيہَا وَذُوقُواْ عَذَابَ ٱلۡحَرِيقِ

कि जब सदमें के मारे चाहेंगे कि दोज़ख़ से निकल भागें तो (ग़ुर्ज मार के) फिर उसके अन्दर ढकेल दिए जाएँगे और (उनसे कहा जाएगा कि) जलाने वाले अज़ाब के मज़े चखो

Verse 23

إِنَّ ٱللَّهَ يُدۡخِلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ جَنَّـٰتٍ تَجۡرِى مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَـٰرُ يُحَلَّوۡنَ فِيهَا مِنۡ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٍ وَلُؤۡلُؤًا‌ ۖ وَلِبَاسُهُمۡ فِيهَا حَرِيرٌ

जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम भी किए उनको खुदा बेहश्त के ऐसे हरे-भरे बाग़ों में दाख़िल फरमाएगा जिनके नीचे नहरे जारी होगी उन्हें वहाँ सोने के कंगन और मोती (के हार) से सँवारा जाएगा और उनका लिबास वहाँ रेशमी होगा

Verse 24

وَهُدُوٓاْ إِلَى ٱلطَّيِّبِ مِنَ ٱلۡقَوۡلِ وَهُدُوٓاْ إِلَىٰ صِرَٲطِ ٱلۡحَمِيدِ

और (ये इस वजह से कि दुनिया में) उन्हें अच्छी बात (कलमाए तौहीद) की हिदायत की गई और उन्हें सज़ावारे हम्द (खुदा) का रास्ता दिखाया गया

Verse 25

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِ ٱلَّذِى جَعَلۡنَـٰهُ لِلنَّاسِ سَوَآءً ٱلۡعَـٰكِفُ فِيهِ وَٱلۡبَادِ ۚ وَمَن يُرِدۡ فِيهِ بِإِلۡحَادِۭ بِظُلۡمٍ نُّذِقۡهُ مِنۡ عَذَابٍ أَلِيمٍ

बेशक जो लोग काफिर हो बैठे और खुदा की राह से और मस्जिदें मोहतरम (ख़ानए काबा) से जिसे हमने सब लोगों के लिए (माबद) बनाया है (और) इसमें शहरी और बेरूनी सबका हक़ बराबर है (लोगों को) रोकते हैं (उनको) और जो शख्स इसमें शरारत से गुमराही करे उसको हम दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखा देंगे

Verse 26

وَإِذۡ بَوَّأۡنَا لِإِبۡرَٲهِيمَ مَكَانَ ٱلۡبَيۡتِ أَن لَّا تُشۡرِكۡ بِى شَيْئًا وَطَهِّرۡ بَيۡتِىَ لِلطَّآٮِٕفِينَ وَٱلۡقَآٮِٕمِينَ وَٱلرُّڪَّعِ ٱلسُّجُودِ

और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने इबराहीम के ज़रिये से इबरहीम के वास्ते ख़ानए काबा की जगह ज़ाहिर कर दी (और उनसे कहा कि) मेरा किसी चीज़ को शरीक न बनाना और मेरे घर को तवाफ और क़याम और रूकू सुजूद करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखना

Verse 27

وَأَذِّن فِى ٱلنَّاسِ بِٱلۡحَجِّ يَأۡتُوكَ رِجَالاً وَعَلَىٰ ڪُلِّ ضَامِرٍ يَأۡتِينَ مِن كُلِّ فَجٍّ عَمِيقٍ

और लोगों को हज की ख़बर कर दो कि लोग तुम्हारे पास (ज़ूक दर ज़ूक) ज्यादा और हर तरह की दुबली (सवारियों पर जो राह दूर दराज़ तय करके आयी होगी चढ़-चढ़ के) आ पहुँचेगें

Verse 28

لِّيَشۡهَدُواْ مَنَـٰفِعَ لَهُمۡ وَيَذۡڪُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ فِىٓ أَيَّامٍ مَّعۡلُومَـٰتٍ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّنۢ بَهِيمَةِ ٱلۡأَنۡعَـٰمِ‌ ۖ فَكُلُواْ مِنۡہَا وَأَطۡعِمُواْ ٱلۡبَآٮِٕسَ ٱلۡفَقِيرَ

ताकि अपने (दुनिया व आखेरत के) फायदो पर फायज़ हों और खुदा ने जो जानवर चारपाए उन्हें अता फ़रमाए उनपर (ज़िबाह के वक्त) चन्द मुअय्युन दिनों में खुदा का नाम लें तो तुम लोग कुरबानी के गोश्त खुद भी खाओ और भूखे मोहताज को भी खिलाओ

Verse 29

ثُمَّ لۡيَقۡضُواْ تَفَثَهُمۡ وَلۡيُوفُواْ نُذُورَهُمۡ وَلۡيَطَّوَّفُواْ بِٱلۡبَيۡتِ ٱلۡعَتِيقِ

फिर लोगों को चाहिए कि अपनी-अपनी (बदन की) कसाफ़त दूर करें और अपनी नज़रें पूरी करें और क़दीम (इबादत) ख़ानए काबा का तवाफ करें यही हुक्म है

Verse 30

ذَٲلِكَ وَمَن يُعَظِّمۡ حُرُمَـٰتِ ٱللَّهِ فَهُوَ خَيۡرٌ لَّهُ ۥ عِندَ رَبِّهِۦ ۗ وَأُحِلَّتۡ لَڪُمُ ٱلۡأَنۡعَـٰمُ إِلَّا مَا يُتۡلَىٰ عَلَيۡڪُمۡ‌ ۖ فَٱجۡتَنِبُواْ ٱلرِّجۡسَ مِنَ ٱلۡأَوۡثَـٰنِ وَٱجۡتَنِبُواْ قَوۡلَ ٱلزُّورِ

और इसके अलावा जो शख्स खुदा की हुरमत वाली चीज़ों की ताज़ीम करेगा तो ये उसके पवरदिगार के यहाँ उसके हक़ में बेहतर है और उन जानवरों के अलावा जो तुमसे बयान किए जाँएगे कुल चारपाए तुम्हारे वास्ते हलाल किए गए तो तुम नापाक बुतों से बचे रहो और लग़ो बातें गाने वग़ैरह से बचे रहो

Verse 31

حُنَفَآءَ لِلَّهِ غَيۡرَ مُشۡرِكِينَ بِهِۦ ۚ وَمَن يُشۡرِكۡ بِٱللَّهِ فَكَأَنَّمَا خَرَّ مِنَ ٱلسَّمَآءِ فَتَخۡطَفُهُ ٱلطَّيۡرُ أَوۡ تَهۡوِى بِهِ ٱلرِّيحُ فِى مَكَانٍ سَحِيقٍ

निरे खरे अल्लाह के होकर (रहो) उसका किसी को शरीक न बनाओ और जिस शख्स ने (किसी को) खुदा का शरीक बनाया तो गोया कि वह आसमान से गिर पड़ा फिर उसको (या तो दरमियान ही से) कोई (मुरदा ख्ववार) चिड़िया उचक ले गई या उसे हवा के झोंके ने बहुत दूर जा फेंका

Verse 32

ذَٲلِكَ وَمَن يُعَظِّمۡ شَعَـٰٓٮِٕرَ ٱللَّهِ فَإِنَّهَا مِن تَقۡوَى ٱلۡقُلُوبِ

ये (याद रखो) और जिस शख्स ने खुदा की निशानियों की ताज़ीम की तो कुछ शक नहीं कि ये भी दिलों की परहेज़गारी से हासिल होती है

Verse 33

لَكُمۡ فِيہَا مَنَـٰفِعُ إِلَىٰٓ أَجَلٍ مُّسَمًّى ثُمَّ مَحِلُّهَآ إِلَى ٱلۡبَيۡتِ ٱلۡعَتِيقِ

और इन चार पायों में एक मुअय्युन मुद्दत तक तुम्हार लिये बहुत से फायदें हैं फिर उनके ज़िबाह होने की जगह क़दीम (इबादत) ख़ानए काबा है

Verse 34

وَلِڪُلِّ أُمَّةٍ جَعَلۡنَا مَنسَكًا لِّيَذۡكُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّنۢ بَهِيمَةِ ٱلۡأَنۡعَـٰمِ ۗ فَإِلَـٰهُكُمۡ إِلَـٰهٌ وَٲحِدٌ فَلَهُ ۥۤ أَسۡلِمُواْ ۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُخۡبِتِينَ

और हमने तो हर उम्मत के वास्ते क़ुरबानी का तरीक़ा मुक़र्रर कर दिया है ताकि जो मवेशी चारपाए खुदा ने उन्हें अता किए हैं उन पर (ज़िबाह के वक्त) ख़ुदा का नाम ले ग़रज़ तुम लोगों का माबूद (वही) यकता खुदा है तो उसी के फरमाबरदार बन जाओ

Verse 35

ٱلَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَجِلَتۡ قُلُوبُهُمۡ وَٱلصَّـٰبِرِينَ عَلَىٰ مَآ أَصَابَہُمۡ وَٱلۡمُقِيمِى ٱلصَّلَوٰةِ وَمِمَّا رَزَقۡنَـٰهُمۡ يُنفِقُونَ

और (ऐ रसूल हमारे) गिड़गिड़ाने वाले बन्दों को (बेहश्त की) खुशख़बरी दे दो ये वह हैं कि जब (उनके सामने) खुदा का नाम लिया जाता है तो उनके दिल सहम जाते हैं और जब उनपर कोई मुसीबत आ पड़े तो सब्र करते हैं और नमाज़ पाबन्दी से अदा करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें दे रखा है उसमें से (राहे खुदा में) ख़र्च करते हैं

Verse 36

وَٱلۡبُدۡنَ جَعَلۡنَـٰهَا لَكُم مِّن شَعَـٰٓٮِٕرِ ٱللَّهِ لَكُمۡ فِيہَا خَيۡرٌ‌ ۖ فَٱذۡكُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ عَلَيۡہَا صَوَآفَّ‌ ۖ فَإِذَا وَجَبَتۡ جُنُوبُہَا فَكُلُواْ مِنۡہَا وَأَطۡعِمُواْ ٱلۡقَانِعَ وَٱلۡمُعۡتَرَّ ۚ كَذَٲلِكَ سَخَّرۡنَـٰهَا لَكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ

और कुरबानी (मोटे गदबदे) ऊँट भी हमने तुम्हारे वास्ते खुदा की निशानियों में से क़रार दिया है इसमें तुम्हारी बहुत सी भलाईयाँ हैं फिर उनका तांते का तांता बाँध कर ज़िबाह करो और उस वक्त उन पर खुदा का नाम लो फिर जब उनके दस्त व बाजू काटकर गिर पड़े तो उन्हीं से तुम खुद भी खाओ और केनाअत पेशा फक़ीरों और माँगने वाले मोहताजों (दोनों) को भी खिलाओ हमने यूँ इन जानवरों को तुम्हारा ताबेए कर दिया ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो

Verse 37

لَن يَنَالَ ٱللَّهَ لُحُومُهَا وَلَا دِمَآؤُهَا وَلَـٰكِن يَنَالُهُ ٱلتَّقۡوَىٰ مِنكُمۡ ۚ كَذَٲلِكَ سَخَّرَهَا لَكُمۡ لِتُكَبِّرُواْ ٱللَّهَ عَلَىٰ مَا هَدَٮٰكُمۡ ۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

खुदा तक न तो हरगिज़ उनके गोश्त ही पहुँचेगे और न खून मगर (हाँ) उस तक तुम्हारी परहेज़गारी अलबत्ता पहुँचेगी ख़ुदा ने जानवरों को (इसलिए) यूँ तुम्हारे क़ाबू में कर दिया है ताकि जिस तरह खुदा ने तुम्हें बनाया है उसी तरह उसकी बड़ाई करो

Verse 38

۞ إِنَّ ٱللَّهَ يُدَٲفِعُ عَنِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ خَوَّانٍ كَفُورٍ

और (ऐ रसूल) नेकी करने वालों को (हमेशा की) ख़ुशख़बरी दे दो इसमें शक नहीं कि खुदा ईमानवालों से कुफ्फ़ार को दूर दफा करता रहता है खुदा किसी बददयानत नाशुक्रे को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता

Verse 39

أُذِنَ لِلَّذِينَ يُقَـٰتَلُونَ بِأَنَّهُمۡ ظُلِمُواْ ۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ نَصۡرِهِمۡ لَقَدِيرٌ

जिन (मुसलमानों) से (कुफ्फ़ार) लड़ते थे चूँकि वह (बहुत) सताए गए उस वजह से उन्हें भी (जिहाद) की इजाज़त दे दी गई और खुदा तो उन लोगों की मदद पर यक़ीनन क़ादिर (वत वाना) है

Verse 40

ٱلَّذِينَ أُخۡرِجُواْ مِن دِيَـٰرِهِم بِغَيۡرِ حَقٍّ إِلَّآ أَن يَقُولُواْ رَبُّنَا ٱللَّهُ ۗ وَلَوۡلَا دَفۡعُ ٱللَّهِ ٱلنَّاسَ بَعۡضَہُم بِبَعۡضٍ لَّهُدِّمَتۡ صَوَٲمِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَوَٲتٌ وَمَسَـٰجِدُ يُذۡڪَرُ فِيہَا ٱسۡمُ ٱللَّهِ ڪَثِيرًا ۗ وَلَيَنصُرَنَّ ٱللَّهُ مَن يَنصُرُهُ ۥۤ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَقَوِىٌّ عَزِيزٌ

ये वह (मज़लूम हैं जो बेचारे) सिर्फ इतनी बात कहने पर कि हमारा परवरदिगार खुदा है (नाहक़) अपने-अपने घरों से निकाल दिए गये और अगर खुदा लोगों को एक दूसरे से दूर दफा न करता रहता तो गिरजे और यहूदियों के इबादत ख़ाने और मजूस के इबादतख़ाने और मस्जिद जिनमें कसरत से खुदा का नाम लिया जाता है कब के कब ढहा दिए गए होते और जो शख्स खुदा की मदद करेगा खुदा भी अलबत्ता उसकी मदद ज़रूर करेगा बेशक खुदा ज़रूर ज़बरदस्त ग़ालिब है

Verse 41

ٱلَّذِينَ إِن مَّكَّنَّـٰهُمۡ فِى ٱلۡأَرۡضِ أَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَوُاْ ٱلزَّڪَوٰةَ وَأَمَرُواْ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَنَهَوۡاْ عَنِ ٱلۡمُنكَرِ ۗ وَلِلَّهِ عَـٰقِبَةُ ٱلۡأُمُورِ

ये वह लोग हैं कि अगर हम इन्हें रूए ज़मीन पर क़ाबू दे दे तो भी यह लोग पाबन्दी से नमाजे अदा करेंगे और ज़कात देंगे और अच्छे-अच्छे काम का हुक्म करेंगे और बुरी बातों से (लोगों को) रोकेंगे और (यूँ तो) सब कामों का अन्जाम खुदा ही के एख्तेयार में है

Verse 42

وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدۡ ڪَذَّبَتۡ قَبۡلَهُمۡ قَوۡمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَثَمُودُ

और (ऐ रसूल) अगर ये (कुफ्फ़ार) तुमको झुठलाते हैं तो कोइ ताज्जुब की बात नहीं उनसे पहले नूह की क़ौम और (क़ौमे आद और समूद)

Verse 43

وَقَوۡمُ إِبۡرَٲهِيمَ وَقَوۡمُ لُوطٍ

और इबराहीम की क़ौम और लूत की क़ौम

Verse 44

وَأَصۡحَـٰبُ مَدۡيَنَ‌ ۖ وَكُذِّبَ مُوسَىٰ فَأَمۡلَيۡتُ لِلۡڪَـٰفِرِينَ ثُمَّ أَخَذۡتُهُمۡ‌ ۖ فَكَيۡفَ ڪَانَ نَكِيرِ

और मदियन के रहने वाले (अपने-अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुके हैं और मूसा (भी) झुठलाए जा चुके हैं तो मैंने काफिरों को चन्द ढील दे दी फिर (आख़िर) उन्हें ले डाला तो तुमने देखा मेरा अज़ाब कैसा था

Verse 45

فَكَأَيِّن مِّن قَرۡيَةٍ أَهۡلَكۡنَـٰهَا وَهِىَ ظَالِمَةٌ فَهِىَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَبِئۡرٍ مُّعَطَّلَةٍ وَقَصۡرٍ مَّشِيدٍ

ग़रज़ कितनी बस्तियाँ हैं कि हम ने उन्हें बरबाद कर दिया और वह सरकश थीं पस वह अपनी छतों पर ढही पड़ी हैं और कितने बेकार (उजडे क़ुएँ और कितने) मज़बूत बड़े-बड़े ऊँचे महल (वीरान हो गए)

Verse 46

أَفَلَمۡ يَسِيرُواْ فِى ٱلۡأَرۡضِ فَتَكُونَ لَهُمۡ قُلُوبٌ يَعۡقِلُونَ بِہَآ أَوۡ ءَاذَانٌ يَسۡمَعُونَ بِہَا‌ ۖ فَإِنَّہَا لَا تَعۡمَى ٱلۡأَبۡصَـٰرُ وَلَـٰكِن تَعۡمَى ٱلۡقُلُوبُ ٱلَّتِى فِى ٱلصُّدُورِ

क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं ताकि उनके लिए ऐसे दिल होते हैं जैसे हक़ बातों को समझते या उनके ऐसे कान होते जिनके ज़रिए से (सच्ची बातों को) सुनते क्योंकि ऑंखें अंधी नहीं हुआ करती बल्कि दिल जो सीने में है वही अन्धे हो जाया करते हैं

Verse 47

وَيَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلۡعَذَابِ وَلَن يُخۡلِفَ ٱللَّهُ وَعۡدَهُ ۥ ۚ وَإِنَّ يَوۡمًا عِندَ رَبِّكَ كَأَلۡفِ سَنَةٍ مِّمَّا تَعُدُّونَ

और (ऐ रसूल) तुम से ये लोग अज़ाब के जल्द आने की तमन्ना रखते हैं और खुदा तो हरगिज़ अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं करेगा और बेशक (क़यामत का) एक दिन तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारी गिनती के हिसाब से एक हज़ार बरस के बराबर है

Verse 48

وَڪَأَيِّن مِّن قَرۡيَةٍ أَمۡلَيۡتُ لَهَا وَهِىَ ظَالِمَةٌ ثُمَّ أَخَذۡتُہَا وَإِلَىَّ ٱلۡمَصِيرُ

और कितनी बस्तियाँ हैं कि मैंने उन्हें (चन्द) मोहलत दी हालाँकि वह सरकश थी फिर (आख़िर) मैंने उन्हें ले डाला और (सबको) मेरी तरफ लौटना है

Verse 49

قُلۡ يَـٰٓأَيُّہَا ٱلنَّاسُ إِنَّمَآ أَنَا۟ لَكُمۡ نَذِيرٌ مُّبِينٌ

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि लोगों में तो सिर्फ तुमको खुल्लम-खुल्ला (अज़ाब से) डराने वाला हूँ

Verse 50

فَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُم مَّغۡفِرَةٌ وَرِزۡقٌ كَرِيمٌ

पस जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए (आख़िरत में) उनके लिए बख्शिश है और बेहिश्त की बहुत उम्दा रोज़ी

Verse 51

وَٱلَّذِينَ سَعَوۡاْ فِىٓ ءَايَـٰتِنَا مُعَـٰجِزِينَ أُوْلَـٰٓٮِٕكَ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡجَحِيمِ

और जिन लोगों ने हमारी आयतों (के झुठलाने में हमारे) आजिज़ करने के वास्ते कोशिश की यही लोग तो जहन्नुमी हैं

Verse 52

وَمَآ أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ مِن رَّسُولٍ وَلَا نَبِىٍّ إِلَّآ إِذَا تَمَنَّىٰٓ أَلۡقَى ٱلشَّيۡطَـٰنُ فِىٓ أُمۡنِيَّتِهِۦ فَيَنسَخُ ٱللَّهُ مَا يُلۡقِى ٱلشَّيۡطَـٰنُ ثُمَّ يُحۡڪِمُ ٱللَّهُ ءَايَـٰتِهِۦ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ

और (ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले जब कभी कोई रसूल और नबी भेजा तो ये ज़रूर हुआ कि जिस वक्त उसने (तबलीग़े एहकाम की) आरज़ू की तो शैतान ने उसकी आरज़ू में (लोंगों को बहका कर) ख़लल डाल दिया फिर जो वस वसा शैतान डालता है खुदा उसे बेट देता है फिर अपने एहकाम को मज़बूत करता है और खुदा तो बड़ा वाक़िफकार दाना है

Verse 53

لِّيَجۡعَلَ مَا يُلۡقِى ٱلشَّيۡطَـٰنُ فِتۡنَةً لِّلَّذِينَ فِى قُلُوبِہِم مَّرَضٌ وَٱلۡقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمۡ ۗ وَإِنَّ ٱلظَّـٰلِمِينَ لَفِى شِقَاقِۭ بَعِيدٍ

और शैतान जो (वसवसा) डालता (भी) है तो इसलिए ताकि खुदा उसे उन लोगों के आज़माइश (का ज़रिया) क़रार दे जिनके दिलों में (कुफ्र का) मर्ज़ है और जिनके दिल सख्त हैं और बेशक (ये) ज़ालिम मुशरेकीन पल्ले दरजे की मुख़ालेफ़त में पड़े हैं

Verse 54

وَلِيَعۡلَمَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ أَنَّهُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَيُؤۡمِنُواْ بِهِۦ فَتُخۡبِتَ لَهُ ۥ قُلُوبُهُمۡ ۗ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهَادِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِلَىٰ صِرَٲطٍ مُّسۡتَقِيمٍ

और (इसलिए भी) ताकि जिन लोगों को (कुतूबे समावी का) इल्म अता हुआ है वह जान लें कि ये (वही) बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से ठीक ठीक (नाज़िल) हुईहै फिर (ये ख्याल करके) इस पर वह लोग ईमान लाए फिर उनके दिल खुदा के सामने आजिज़ी करें और इसमें तो शक ही नहीं कि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया उनकी खुदा सीधी राह तक पहुँचा देता है

Verse 55

وَلَا يَزَالُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فِى مِرۡيَةٍ مِّنۡهُ حَتَّىٰ تَأۡتِيَهُمُ ٱلسَّاعَةُ بَغۡتَةً أَوۡ يَأۡتِيَهُمۡ عَذَابُ يَوۡمٍ عَقِيمٍ

और जो लोग काफिर हो बैठे वह तो कुरान की तरफ से हमेशा शक ही में पड़े रहेंगे यहाँ तक कि क़यामत यकायक उनके सर पर आ मौजूद हो या (यूँ कहो कि) उनपर एक सख्त मनहूस दिन का अज़ाब नाज़िल हुआ

Verse 56

ٱلۡمُلۡكُ يَوۡمَٮِٕذٍ لِّلَّهِ يَحۡڪُمُ بَيۡنَهُمۡ ۚ فَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فِى جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ

उस दिन की हुकूमत तो ख़ास खुदा ही की होगी वह लोगों (के बाहमी एख्तेलाफ) का फ़ैसला कर देगा तो जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे काम किए हैं वह नेअमतों के (भरे) हुए बाग़ात (बेहश्त) में रहेंगे

Verse 57

وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَڪَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا فَأُوْلَـٰٓٮِٕكَ لَهُمۡ عَذَابٌ مُّهِينٌ

और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो यही वह (कम्बख्त) लोग हैं

Verse 58

وَٱلَّذِينَ هَاجَرُواْ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ثُمَّ قُتِلُوٓاْ أَوۡ مَاتُواْ لَيَرۡزُقَنَّهُمُ ٱللَّهُ رِزۡقًا حَسَنًا ۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ خَيۡرُ ٱلرَّٲزِقِينَ

जिनके लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है जिन लोगों ने खुदा की राह में अपने देस छोडे फ़िर शहीद किए गए या (आप अपनी मौत से) मर गए खुदा उन्हें (आख़िरत में) ज़रूर उम्दा रोज़ी अता फ़रमाएगा

Verse 59

لَيُدۡخِلَنَّهُم مُّدۡخَلاً يَرۡضَوۡنَهُ ۥ ۗ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَعَلِيمٌ حَلِيمٌ

और बेशक तमाम रोज़ी देने वालों में खुदा ही सबसे बेहतर है वह उन्हें ज़रूर ऐसी जगह (बेहिश्त) पहुँचा देगा जिससे वह निहाल हो जाएँगे

Verse 60

۞ ذَٲلِكَ وَمَنۡ عَاقَبَ بِمِثۡلِ مَا عُوقِبَ بِهِۦ ثُمَّ بُغِىَ عَلَيۡهِ لَيَنصُرَنَّهُ ٱللَّهُ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌ

और खुदा तो बेशक बड़ा वाक़िफकार बुर्दवार है यही (ठीक) है और जो शख्स (अपने दुश्मन को) उतना ही सताए जितना ये उसके हाथों से सताया गया था उसके बाद फिर (दोबारा दुशमन की तरफ़ से) उस पर ज्यादती की जाए तो खुदा उस मज़लूम की ज़रूर मदद करेगा

Verse 61

ذَٲلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ يُولِجُ ٱلَّيۡلَ فِى ٱلنَّهَارِ وَيُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِى ٱلَّيۡلِ وَأَنَّ ٱللَّهَ سَمِيعُۢ بَصِيرٌ

बेशक खुदा बड़ा माफ करने वाला बख़शने वाला है ये (मदद) इस वजह से दी जाएगी कि खुदा (बड़ा क़ादिर है वही) तो रात को दिन में दाख़िल करता है और दिन को रात में दाख़िल करता है और इसमें भी शक नहीं कि खुदा सब कुछ जानता है

Verse 62

ذَٲلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡحَقُّ وَأَنَّ مَا يَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ هُوَ ٱلۡبَـٰطِلُ وَأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡعَلِىُّ ٱلۡڪَبِيرُ

(और) इस वजह से (भी) कि यक़ीनन खुदा ही बरहक़ है और उसके सिवा जिनको लोग (वक्ते मुसीबत) पुकारा करते हैं (सबके सब) बातिल हैं और (ये भी) यक़ीनी (है कि) खुदा ही (सबसे) बुलन्द मर्तबा बुर्जुग़ है

Verse 63

أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءً فَتُصۡبِحُ ٱلۡأَرۡضُ مُخۡضَرَّةً ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٌ

अरे क्या तूने इतना भी नहीं देखा कि खुदा ही आसमान से पानी बरसाता है तो ज़मीन सर सब्ज़ (व शादाब) हो जाती है बेशक खुदा (बन्दों के हाल पर) बड़ा मेहरबान वाक़िफ़कार है

Verse 64

لَّهُ ۥ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٲتِ وَمَا فِى ٱلۡأَرۡضِ ۗ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ ٱلۡغَنِىُّ ٱلۡحَمِيدُ

जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और इसमें तो शक ही नहीं कि खुदा (सबसे) बेपरवाह (और) सज़ावार हम्द है

Verse 65

أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِى ٱلۡأَرۡضِ وَٱلۡفُلۡكَ تَجۡرِى فِى ٱلۡبَحۡرِ بِأَمۡرِهِۦ وَيُمۡسِكُ ٱلسَّمَآءَ أَن تَقَعَ عَلَى ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا بِإِذۡنِهِۦۤ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ بِٱلنَّاسِ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ

क्या तूने उस पर भी नज़र न डाली कि जो कुछ रूए ज़मीन में है सबको खुदा ही ने तुम्हारे क़ाबू में कर दिया है और कश्ती को (भी) जो उसके हुक्म से दरिया में चलती है और वही तो आसमान को रोके हुए है कि ज़मीन पर न गिर पड़े मगर (जब) उसका हुक्म होगा (तो गिर पडेग़ा) इसमें शक नहीं कि खुदा लोगों पर बड़ा मेहरबान व रहमवाला है

Verse 66

وَهُوَ ٱلَّذِىٓ أَحۡيَاڪُمۡ ثُمَّ يُمِيتُكُمۡ ثُمَّ يُحۡيِيكُمۡ ۗ إِنَّ ٱلۡإِنسَـٰنَ لَڪَفُورٌ

और वही तो क़ादिर मुत्तलिक़ है जिसने तुमको (पहली बार माँ के पेट में) जिला उठाया फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको दोबारा ज़िन्दगी देगा

Verse 67

لِّكُلِّ أُمَّةٍ جَعَلۡنَا مَنسَكًا هُمۡ نَاسِڪُوهُ‌ ۖ فَلَا يُنَـٰزِعُنَّكَ فِى ٱلۡأَمۡرِ ۚ وَٱدۡعُ إِلَىٰ رَبِّكَ‌ ۖ إِنَّكَ لَعَلَىٰ هُدًى مُّسۡتَقِيمٍ

इसमें शक नहीं कि इन्सान बड़ा ही नाशुक्रा है (ऐ रसूल) हमने हर उम्मत के वास्ते एक तरीक़ा मुक़र्रर कर दिया कि वह इस पर चलते हैं फिर तो उन्हें इस दीन (इस्लाम) में तुम से झगड़ा न करना चाहिए और तुम (लोगों को) अपने परवरदिगार की तरफ बुलाए जाओ

Verse 68

وَإِن جَـٰدَلُوكَ فَقُلِ ٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا تَعۡمَلُونَ

बेशक तुम सीधे रास्ते पर हो और अगर (इस पर भी) लोग तुमसे झगड़ा करें तो तुक कह दो कि जो कुछ तुम कर रहे हो खुदा उससे खूब वाक़िफ़ है

Verse 69

ٱللَّهُ يَحۡكُمُ بَيۡنَڪُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَـٰمَةِ فِيمَا كُنتُمۡ فِيهِ تَخۡتَلِفُونَ

जिन बातों में तुम बाहम झगड़ा करते थे क़यामत के दिन ख़ुदा तुम लोगों के दरमियान (ठीक) फ़ैसला कर देगा

Verse 70

أَلَمۡ تَعۡلَمۡ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا فِى ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ ۗ إِنَّ ذَٲلِكَ فِى كِتَـٰبٍ ۚ إِنَّ ذَٲلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٌ

(ऐ रसूल) क्या तुम नहीं जानते कि जो कुछ आसमान और ज़मीन में है खुदा यक़ीनन जानता है उसमें तो शक नहीं कि ये सब (बातें) किताब (लौहे महफूज़) में (लिखी हुईमौजूद) हैं

Verse 71

وَيَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَمۡ يُنَزِّلۡ بِهِۦ سُلۡطَـٰنًا وَمَا لَيۡسَ لَهُم بِهِۦ عِلۡمٌ ۗ وَمَا لِلظَّـٰلِمِينَ مِن نَّصِيرٍ

बेशक ये (सब कुछ) खुदा पर आसान है और ये लोग खुदा को छोड़कर उन लोगों की इबादत करते हैं जिनके लिए न तो ख़ुदा ही ने कोई सनद नाज़िल की है और न उस (के हक़ होने) का खुद उन्हें इल्म है और क़यामत में तो ज़ालिमों का कोई मददगार भी नहीं होगा

Verse 72

وَإِذَا تُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡ ءَايَـٰتُنَا بَيِّنَـٰتٍ تَعۡرِفُ فِى وُجُوهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ ٱلۡمُنڪَرَ‌ ۖ يَكَادُونَ يَسۡطُونَ بِٱلَّذِينَ يَتۡلُونَ عَلَيۡهِمۡ ءَايَـٰتِنَا ۗ قُلۡ أَفَأُنَبِّئُكُم بِشَرٍّ مِّن ذَٲلِكُمُ ۗ ٱلنَّارُ وَعَدَهَا ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ‌ ۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ

और (ऐ रसूल) जब हमारी वाज़ेए व रौशन आयतें उनके सामने पढ़ कर सुनाई जाती हैं तो तुम (उन) काफिरों के चेहरों पर नाखुशी के (आसार) देखते हो (यहाँ तक कि) क़रीब होता है कि जो लोग उनको हमारी आयातें पढ़कर सुनाते हैं उन पर ये लोग हमला कर बैठे (ऐ रसूल) तुम कह दो (कि) तो क्या मैं तुम्हें इससे भी कहीं बदतर चीज़ बता दूँ (अच्छा) तो सुन लो वह जहन्नुम है जिसमें झोंकने का वायदा खुदा ने काफ़िरों से किया है

Verse 73

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ضُرِبَ مَثَلٌ فَٱسۡتَمِعُواْ لَهُ ۥۤ ۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ لَن يَخۡلُقُواْ ذُبَابًا وَلَوِ ٱجۡتَمَعُواْ لَهُ ۥ‌ ۖ وَإِن يَسۡلُبۡہُمُ ٱلذُّبَابُ شَيْئًا لَّا يَسۡتَنقِذُوهُ مِنۡهُ ۚ ضَعُفَ ٱلطَّالِبُ وَٱلۡمَطۡلُوبُ

और वह क्या बुरा ठिकाना है लोगों एक मसल बयान की जाती है तो उसे कान लगा के सुनो कि खुदा को छोड़कर जिन लोगों को तुम पुकारते हो वह लोग अगरचे सब के सब इस काम के लिए इकट्ठे भी हो जाएँ तो भी एक मक्खी तक पैदा नहीं कर सकते और कहीं मक्खी कुछ उनसे छीन ले जाए तो उससे उसको छुड़ा नहीं सकते (अजब लुत्फ है) कि माँगने वाला (आबिद) और जिससे माँग लिया (माबूद) दोनों कमज़ोर हैं

Verse 74

مَا قَدَرُواْ ٱللَّهَ حَقَّ قَدۡرِهِۦۤ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَقَوِىٌّ عَزِيزٌ

खुदा की जैसे क़द्र करनी चाहिए उन लोगों ने न की इसमें शक नहीं कि खुदा तो बड़ा ज़बरदस्त ग़ालिब है

Verse 75

ٱللَّهُ يَصۡطَفِى مِنَ ٱلۡمَلَـٰٓٮِٕڪَةِ رُسُلاً وَمِنَ ٱلنَّاسِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعُۢ بَصِيرٌ

खुदा फरिश्तों में से बाज़ को अपने एहकाम पहुँचाने के लिए मुन्तख़िब कर लेता है

Verse 76

يَعۡلَمُ مَا بَيۡنَ أَيۡدِيهِمۡ وَمَا خَلۡفَهُمۡ ۗ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرۡجَعُ ٱلۡأُمُورُ

और (इसी तरह) आदमियों में से भी बेशक खुदा (सबकी) सुनता देखता है जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे (हो चुका है) (खुदा सब कुछ) जानता है

Verse 77

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱرۡڪَعُواْ وَٱسۡجُدُواْ وَٱعۡبُدُواْ رَبَّكُمۡ وَٱفۡعَلُواْ ٱلۡخَيۡرَ لَعَلَّڪُمۡ تُفۡلِحُونَ ۩

और तमाम उमूर की रूजू खुदा ही की तरफ होती है ऐ ईमानवालों रूकू करो और सजदे करो और अपने परवरदिगार की इबादत करो और नेकी करो

Verse 78

وَجَـٰهِدُواْ فِى ٱللَّهِ حَقَّ جِهَادِهِۦ ۚ هُوَ ٱجۡتَبَٮٰكُمۡ وَمَا جَعَلَ عَلَيۡكُمۡ فِى ٱلدِّينِ مِنۡ حَرَجٍ ۚ مِّلَّةَ أَبِيكُمۡ إِبۡرَٲهِيمَ ۚ هُوَ سَمَّٮٰكُمُ ٱلۡمُسۡلِمِينَ مِن قَبۡلُ وَفِى هَـٰذَا لِيَكُونَ ٱلرَّسُولُ شَهِيدًا عَلَيۡكُمۡ وَتَكُونُواْ شُہَدَآءَ عَلَى ٱلنَّاسِ ۚ فَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ وَٱعۡتَصِمُواْ بِٱللَّهِ هُوَ مَوۡلَٮٰكُمۡ‌ ۖ فَنِعۡمَ ٱلۡمَوۡلَىٰ وَنِعۡمَ ٱلنَّصِيرُ

ताकि तुम कामयाब हो और जो हक़ जिहाद करने का है खुदा की राह में जिहाद करो उसी नें तुमको बरगुज़ीदा किया और उमूरे दीन में तुम पर किसी तरह की सख्ती नहीं की तुम्हारे बाप इबराहीम ने मजहब को (तुम्हारा मज़हब बना दिया उसी (खुदा) ने तुम्हारा पहले ही से मुसलमान (फरमाबरदार बन्दे) नाम रखा और कुरान में भी (तो जिहाद करो) ताकि रसूल तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बने और तुम पाबन्दी से नामज़ पढ़ा करो और ज़कात देते रहो और खुदा ही (के एहकाम) को मज़बूत पकड़ो वही तुम्हारा सरपरस्त है तो क्या अच्छा सरपरस्त है और क्या अच्छा मददगार है