Surah Al-Mu’minun
Quran Surah
Surah 23: Al-Mu’minun
المؤمنون
Verse count: 118
Opening Bismillah
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं।
Verse 1
قَدۡ أَفۡلَحَ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ
अलबत्ता वह ईमान लाने वाले रस्तगार हुए
Verse 2
ٱلَّذِينَ هُمۡ فِى صَلَاتِہِمۡ خَـٰشِعُونَ
जो अपनी नमाज़ों में (खुदा के सामने) गिड़गिड़ाते हैं
Verse 3
وَٱلَّذِينَ هُمۡ عَنِ ٱللَّغۡوِ مُعۡرِضُونَ
और जो बेहूदा बातों से मुँह फेरे रहते हैं
Verse 4
وَٱلَّذِينَ هُمۡ لِلزَّكَوٰةِ فَـٰعِلُونَ
और जो ज़कात (अदा) किया करते हैं
Verse 5
وَٱلَّذِينَ هُمۡ لِفُرُوجِهِمۡ حَـٰفِظُونَ
और जो (अपनी) शर्मगाहों को (हराम से) बचाते हैं
Verse 6
إِلَّا عَلَىٰٓ أَزۡوَٲجِهِمۡ أَوۡ مَا مَلَكَتۡ أَيۡمَـٰنُہُمۡ فَإِنَّہُمۡ غَيۡرُ مَلُومِينَ
मगर अपनी बीबियों से या अपनी ज़र ख़रीद लौनडियों से कि उन पर हरगिज़ इल्ज़ाम नहीं हो सकता
Verse 7
فَمَنِ ٱبۡتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٲلِكَ فَأُوْلَـٰٓٮِٕكَ هُمُ ٱلۡعَادُونَ
पस जो शख्स उसके सिवा किसी और तरीके से शहवत परस्ती की तमन्ना करे तो ऐसे ही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं
Verse 8
وَٱلَّذِينَ هُمۡ لِأَمَـٰنَـٰتِهِمۡ وَعَهۡدِهِمۡ رَٲعُونَ
और जो अपनी अमानतों और अपने एहद का लिहाज़ रखते हैं
Verse 9
وَٱلَّذِينَ هُمۡ عَلَىٰ صَلَوَٲتِہِمۡ يُحَافِظُونَ
और जो अपनी नमाज़ों की पाबन्दी करते हैं
Verse 10
أُوْلَـٰٓٮِٕكَ هُمُ ٱلۡوَٲرِثُونَ
(आदमी की औलाद में) यही लोग सच्चे वारिस है
Verse 11
ٱلَّذِينَ يَرِثُونَ ٱلۡفِرۡدَوۡسَ هُمۡ فِيہَا خَـٰلِدُونَ
जो बेहश्त बरी का हिस्सा लेंगे (और) यही लोग इसमें हमेशा (जिन्दा) रहेंगे
Verse 12
وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَـٰنَ مِن سُلَـٰلَةٍ مِّن طِينٍ
और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया
Verse 13
ثُمَّ جَعَلۡنَـٰهُ نُطۡفَةً فِى قَرَارٍ مَّكِينٍ
फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा
Verse 14
ثُمَّ خَلَقۡنَا ٱلنُّطۡفَةَ عَلَقَةً فَخَلَقۡنَا ٱلۡعَلَقَةَ مُضۡغَةً فَخَلَقۡنَا ٱلۡمُضۡغَةَ عِظَـٰمًا فَكَسَوۡنَا ٱلۡعِظَـٰمَ لَحۡمًا ثُمَّ أَنشَأۡنَـٰهُ خَلۡقًا ءَاخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ ٱللَّهُ أَحۡسَنُ ٱلۡخَـٰلِقِينَ
फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है
Verse 15
ثُمَّ إِنَّكُم بَعۡدَ ذَٲلِكَ لَمَيِّتُونَ
फिर इसके बाद यक़ीनन तुम सब लोगों को (एक न एक दिन) मरना है
Verse 16
ثُمَّ إِنَّكُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَـٰمَةِ تُبۡعَثُونَ
इसके बाद कयामत के दिन तुम सब के सब कब्रों से उठाए जाओगे
Verse 17
وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا فَوۡقَكُمۡ سَبۡعَ طَرَآٮِٕقَ وَمَا كُنَّا عَنِ ٱلۡخَلۡقِ غَـٰفِلِينَ
और हम ही ने तुम्हारे ऊपर तह ब तह आसमान बनाए और हम मख़लूक़ात से बेखबर नही है
Verse 18
وَأَنزَلۡنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءَۢ بِقَدَرٍ فَأَسۡكَنَّـٰهُ فِى ٱلۡأَرۡضِ ۖ وَإِنَّا عَلَىٰ ذَهَابِۭ بِهِۦ لَقَـٰدِرُونَ
और हमने आसमान से एक अन्दाजे क़े साथ पानी बरसाया फिर उसको ज़मीन में (हसब मसलेहत) ठहराए रखा और हम तो यक़ीनन उसके ग़ाएब कर देने पर भी क़ाबू रखते है
Verse 19
فَأَنشَأۡنَا لَكُم بِهِۦ جَنَّـٰتٍ مِّن نَّخِيلٍ وَأَعۡنَـٰبٍ لَّكُمۡ فِيہَا فَوَٲكِهُ كَثِيرَةٌ وَمِنۡہَا تَأۡكُلُونَ
फिर हमने उस पानी से तुम्हारे वास्ते खजूरों और अंगूरों के बाग़ात बनाए कि उनमें तुम्हारे वास्ते (तरह तरह के) बहुतेरे मेवे (पैदा होते) हैं उनमें से बाज़ को तुम खाते हो
Verse 20
وَشَجَرَةً تَخۡرُجُ مِن طُورِ سَيۡنَآءَ تَنۢبُتُ بِٱلدُّهۡنِ وَصِبۡغٍ لِّلۡأَڪِلِينَ
और (हम ही ने ज़ैतून का) दरख्त (पैदा किया) जो तूरे सैना (पहाड़) में (कसरत से) पैदा होता है जिससे तेल भी निकलता है और खाने वालों के लिए सालन भी है
Verse 21
وَإِنَّ لَكُمۡ فِى ٱلۡأَنۡعَـٰمِ لَعِبۡرَةً ۖ نُّسۡقِيكُم مِّمَّا فِى بُطُونِہَا وَلَكُمۡ فِيہَا مَنَـٰفِعُ كَثِيرَةٌ وَمِنۡہَا تَأۡكُلُونَ
और उसमें भी शक नहीं कि तुम्हारे वास्ते चौपायों में भी इबरत की जगह है और (ख़ाक बला) जो कुछ उनके पेट में है उससे हम तुमको दूध पिलाते हैं और जानवरों में तो तुम्हारे और भी बहुत से फायदे हैं और उन्हीं में से बाज़ तुम खाते हो
Verse 22
وَعَلَيۡہَا وَعَلَى ٱلۡفُلۡكِ تُحۡمَلُونَ
और उन्हें जानवरों और कश्तियों पर चढे चढ़े फिरते भी हो
Verse 23
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦ فَقَالَ يَـٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَـٰهٍ غَيۡرُهُ ۥۤ ۖ أَفَلَا تَتَّقُونَ
और हमने नूह को उनकी काैम के पास पैग़म्बर बनाकर भेजा तो नूह ने (उनसे) कहा ऐ मेरी क़ौम खुदा ही की इबादत करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तो क्या तुम (उससे) डरते नहीं हो
Verse 24
فَقَالَ ٱلۡمَلَؤُاْ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦ مَا هَـٰذَآ إِلَّا بَشَرٌ مِّثۡلُكُمۡ يُرِيدُ أَن يَتَفَضَّلَ عَلَيۡڪُمۡ وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ لَأَنزَلَ مَلَـٰٓٮِٕكَةً مَّا سَمِعۡنَا بِہَـٰذَا فِىٓ ءَابَآٮِٕنَا ٱلۡأَوَّلِينَ
तो उनकी क़ौम के सरदारों ने जो काफिर थे कहा कि ये भी तो बस (आख़िर) तुम्हारे ही सा आदमी है (मगर) इसकी तमन्ना ये है कि तुम पर बुर्जुगी हासिल करे और अगर खुदा (पैग़म्बर ही न भेजना) चाहता तो फरिश्तों को नाज़िल करता हम ने तो (भाई) ऐसी बात अपने अगले बाप दादाओं में (भी होती) नहीं सुनी
Verse 25
إِنۡ هُوَ إِلَّا رَجُلُۢ بِهِۦ جِنَّةٌ فَتَرَبَّصُواْ بِهِۦ حَتَّىٰ حِينٍ
हो न हों बस ये एक आदमी है जिसे जुनून हो गया है ग़रज़ तुम लोग एक (ख़ास) वक्त तक (इसके अन्जाम का) इन्तेज़ार देखो
Verse 26
قَالَ رَبِّ ٱنصُرۡنِى بِمَا ڪَذَّبُونِ
नूह ने (ये बातें सुनकर) दुआ की ऐ मेरे पलने वाले मेरी मदद कर
Verse 27
فَأَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡهِ أَنِ ٱصۡنَعِ ٱلۡفُلۡكَ بِأَعۡيُنِنَا وَوَحۡيِنَا فَإِذَا جَآءَ أَمۡرُنَا وَفَارَ ٱلتَّنُّورُ ۙ فَٱسۡلُكۡ فِيہَا مِن ڪُلٍّ زَوۡجَيۡنِ ٱثۡنَيۡنِ وَأَهۡلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيۡهِ ٱلۡقَوۡلُ مِنۡهُمۡ ۖ وَلَا تُخَـٰطِبۡنِى فِى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓاْ ۖ إِنَّہُم مُّغۡرَقُونَ
इस वजह से कि उन लोगों ने मुझे झुठला दिया तो हमने नूह के पास ‘वही’ भेजी कि तुम हमारे सामने हमारे हुक्म के मुताबिक़ कश्ती बनाना शुरु करो फिर जब कल हमारा अज़ाब आ जाए और तन्नूर (से पानी) उबलने लगे तो तुम उसमें हर किस्म (के जानवरों में) से (नर मादा) दो दो का जोड़ा और अपने लड़के बालों को बिठा लो मगर उन में से जिसकी निस्बत (ग़रक़ होने का) पहले से हमारा हुक्म हो चुका है (उन्हें छोड़ दो) और जिन लोगों ने (हमारे हुकम से) सरकशी की है उनके बारे में मुझसे कुछ कहना (सुनना) नहीं क्योंकि ये लोग यकीनन डूबने वाले है
Verse 28
فَإِذَا ٱسۡتَوَيۡتَ أَنتَ وَمَن مَّعَكَ عَلَى ٱلۡفُلۡكِ فَقُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى نَجَّٮٰنَا مِنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ
ग़रज़ जब तुम अपने हमराहियों के साथ कश्ती पर दुरुस्त बैठो तो कहो तमाम हम्दो सना की सज़ावार खुदा ही है जिसने हमको ज़ालिम लोगों से नजात दी
Verse 29
وَقُل رَّبِّ أَنزِلۡنِى مُنزَلاً مُّبَارَكًا وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلۡمُنزِلِينَ
और दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (दरख्त के पानी की) बा बरकत जगह में उतारना और तू तो सब उतारने वालो ंसे बेहतर है
Verse 30
إِنَّ فِى ذَٲلِكَ لَأَيَـٰتٍ وَإِن كُنَّا لَمُبۡتَلِينَ
इसमें शक नहीं कि हसमें (हमारी क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं और हमको तो बस उनका इम्तिहान लेना मंज़ूर था
Verse 31
ثُمَّ أَنشَأۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِمۡ قَرۡنًا ءَاخَرِينَ
फिर हमने उनके बाद एक और क़ौम को (समूद) को पैदा किया
Verse 32
فَأَرۡسَلۡنَا فِيہِمۡ رَسُولاً مِّنۡہُمۡ أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَـٰهٍ غَيۡرُهُ ۥۤ ۖ أَفَلَا تَتَّقُونَ
और हमने उनही में से (एक आदमी सालेह को) रसूल बनाकर उन लोगों में भेजा (और उन्होंने अपनी क़ौम से कहा) कि खुदा की इबादत करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तो क्या तुम (उससे डरते नही हो)
Verse 33
وَقَالَ ٱلۡمَلَأُ مِن قَوۡمِهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِلِقَآءِ ٱلۡأَخِرَةِ وَأَتۡرَفۡنَـٰهُمۡ فِى ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا مَا هَـٰذَآ إِلَّا بَشَرٌ مِّثۡلُكُمۡ يَأۡكُلُ مِمَّا تَأۡكُلُونَ مِنۡهُ وَيَشۡرَبُ مِمَّا تَشۡرَبُونَ
और उनकी क़ौम के चन्द सरदारों ने जो काफिर थे और (रोज़) आख़िरत की हाज़िरी को भी झुठलाते थे और दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी में हमने उन्हें शहवत भी दे रखी थी आपस में कहने लगे (अरे) ये तो बस तुम्हारा ही सा आदमी है जो चीज़े तुम खाते वही ये भी खाता है और जो चीज़े तुम पीते हो उन्हीं में से ये भी पीता है
Verse 34
وَلَٮِٕنۡ أَطَعۡتُم بَشَرًا مِّثۡلَكُمۡ إِنَّكُمۡ إِذًا لَّخَـٰسِرُونَ
और अगर कहीं तुम लोगों ने अपने ही से आदमी की इताअत कर ली तो तुम ज़रुर घाटे में रहोगे
Verse 35
أَيَعِدُكُمۡ أَنَّكُمۡ إِذَا مِتُّمۡ وَكُنتُمۡ تُرَابًا وَعِظَـٰمًا أَنَّكُم مُّخۡرَجُونَ
क्या ये शख्स तुमसे वायदा करता है कि जब तुम मर जाओगे और (मर कर) सिर्फ मिट्टी और हड्डियाँ (बनकर) रह जाओगे तो तुम दुबारा ज़िन्दा करके कब्रों से निकाले जाओगे (है है अरे) जिसका तुमसे वायदा किया जाता है
Verse 36
۞ هَيۡہَاتَ هَيۡہَاتَ لِمَا تُوعَدُونَ
बिल्कुल (अक्ल से) दूर और क़यास से बईद है (दो बार ज़िन्दा होना कैसा) बस यही तुम्हारी दुनिया की ज़िन्दगी है
Verse 37
إِنۡ هِىَ إِلَّا حَيَاتُنَا ٱلدُّنۡيَا نَمُوتُ وَنَحۡيَا وَمَا نَحۡنُ بِمَبۡعُوثِينَ
कि हम मरते भी हैं और जीते भी हैं और हम तो फिर (दुबारा) उठाए नहीं जाएँगे हो न हो ये (सालेह) वह शख्स है जिसने खुदा पर झूठ मूठ बोहतान बाँधा है
Verse 38
إِنۡ هُوَ إِلَّا رَجُلٌ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ ڪَذِبًا وَمَا نَحۡنُ لَهُ ۥ بِمُؤۡمِنِينَ
और हम तो कभी उस पर ईमान लाने वाले नहीं (ये हालत देखकर) सालेह ने दुआ की ऐ मेरे पालने वाले चूँकि इन लोगों ने मुझे झुठला दिया
Verse 39
قَالَ رَبِّ ٱنصُرۡنِى بِمَا كَذَّبُونِ
तू मेरी मदद कर ख़ुदा ने फरमाया (एक ज़रा ठहर जाओ)
Verse 40
قَالَ عَمَّا قَلِيلٍ لَّيُصۡبِحُنَّ نَـٰدِمِينَ
अनक़रीब ही ये लोग नादिम व परेशान हो जाएँगे
Verse 41
فَأَخَذَتۡہُمُ ٱلصَّيۡحَةُ بِٱلۡحَقِّ فَجَعَلۡنَـٰهُمۡ غُثَآءً ۚ فَبُعۡدًا لِّلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ
ग़रज़ उन्हें यक़ीनन एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला तो हमने उन्हें कूडे क़रकट (का ढेर) बना छोड़ा पस ज़ालिमों पर (खुदा की) लानत है
Verse 42
ثُمَّ أَنشَأۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِمۡ قُرُونًا ءَاخَرِينَ
फिर हमने उनके बाद दूसरी क़ौमों को पैदा किया
Verse 43
مَا تَسۡبِقُ مِنۡ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسۡتَـٔۡخِرُونَ
कोई उम्मत अपने वक्त मुर्करर से न आगे बढ़ सकती है न (उससे) पीछे हट सकती है
Verse 44
ثُمَّ أَرۡسَلۡنَا رُسُلَنَا تَتۡرَا ۖ كُلَّ مَا جَآءَ أُمَّةً رَّسُولُهَا كَذَّبُوهُ ۚ فَأَتۡبَعۡنَا بَعۡضَہُم بَعۡضًا وَجَعَلۡنَـٰهُمۡ أَحَادِيثَ ۚ فَبُعۡدًا لِّقَوۡمٍ لَّا يُؤۡمِنُونَ
फिर हमने लगातार बहुत से पैग़म्बर भेजे (मगर) जब जब किसी उम्मत का पैग़म्बर उन के पास आता तो ये लोग उसको झुठलाते थे तो हम थी (आगे पीछे) एक को दूसरे के बाद (हलाक) करते गए और हमने उन्हें (नेस्त व नाबूद करके) अफसाना बना दिया तो ईमान न लाने वालो पर ख़ुदा की लानत है
Verse 45
ثُمَّ أَرۡسَلۡنَا مُوسَىٰ وَأَخَاهُ هَـٰرُونَ بِـَٔايَـٰتِنَا وَسُلۡطَـٰنٍ مُّبِينٍ
फिर हमने मूसा और उनके भाई हारुन को अपनी निशानियों और वाज़ेए व रौशन दलील के साथ फिरऔन और उसके दरबार के उमराओ के पास रसूल बना कर भेजा
Verse 46
إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ فَٱسۡتَكۡبَرُواْ وَكَانُواْ قَوۡمًا عَالِينَ
तो उन लोगो ने शेख़ी की और वह थे ही बड़े सरकश लोग
Verse 47
فَقَالُوٓاْ أَنُؤۡمِنُ لِبَشَرَيۡنِ مِثۡلِنَا وَقَوۡمُهُمَا لَنَا عَـٰبِدُونَ
आपस मे कहने लगे क्या हम अपने ही ऐसे दो आदमियों पर ईमान ले आएँ हालाँकि इन दोनों की (क़ौम की) क़ौम हमारी ख़िदमत गारी करती है
Verse 48
فَكَذَّبُوهُمَا فَكَانُواْ مِنَ ٱلۡمُهۡلَكِينَ
गरज़ उन लोगों ने इन दोनों को झुठलाया तो आख़िर ये सब के सब हलाक कर डाले गए
Verse 49
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَـٰبَ لَعَلَّهُمۡ يَہۡتَدُونَ
और हमने मूसा को किताब (तौरैत) इसलिए अता की थी कि ये लोग हिदायत पाएँ
Verse 50
وَجَعَلۡنَا ٱبۡنَ مَرۡيَمَ وَأُمَّهُ ۥۤ ءَايَةً وَءَاوَيۡنَـٰهُمَآ إِلَىٰ رَبۡوَةٍ ذَاتِ قَرَارٍ وَمَعِينٍ
और हमने मरियम के बेटे (ईसा) और उनकी माँ को (अपनी कुदरत की निशानी बनाया था) और उन दोनों को हमने एक ऊँची हमवार ठहरने के क़ाबिल चश्में वाली ज़मीन पर (रहने की) जगह दी
Verse 51
يَـٰٓأَيُّہَا ٱلرُّسُلُ كُلُواْ مِنَ ٱلطَّيِّبَـٰتِ وَٱعۡمَلُواْ صَـٰلِحًا ۖ إِنِّى بِمَا تَعۡمَلُونَ عَلِيمٌ
और मेरा आम हुक्म था कि ऐ (मेरे पैग़म्बर) पाक व पाकीज़ा चीज़ें खाओ और अच्छे अच्छे काम करो (क्योंकि) तुम जो कुछ करते हो मैं उससे बख़ूबी वाक़िफ हूँ
Verse 52
وَإِنَّ هَـٰذِهِۦۤ أُمَّتُكُمۡ أُمَّةً وَٲحِدَةً وَأَنَا۟ رَبُّڪُمۡ فَٱتَّقُونِ
(लोगों ये दीन इस्लाम) तुम सबका मज़हब एक ही मज़हब है और मै तुम लोगों का परवरदिगार हूँ
Verse 53
فَتَقَطَّعُوٓاْ أَمۡرَهُم بَيۡنَہُمۡ زُبُرًا ۖ كُلُّ حِزۡبِۭ بِمَا لَدَيۡہِمۡ فَرِحُونَ
तो बस मुझी से डरते रहो फिर लोगों ने अपने काम (में एख़तिलाफ करके उस) को टुकड़े टुकड़े कर डाला हर गिरो जो कुछ उसके पास है उसी में निहाल निहाल है
Verse 54
فَذَرۡهُمۡ فِى غَمۡرَتِهِمۡ حَتَّىٰ حِينٍ
तो (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उन की ग़फलत में एक ख़ास वक्त तक (पड़ा) छोड़ दो
Verse 55
أَيَحۡسَبُونَ أَنَّمَا نُمِدُّهُم بِهِۦ مِن مَّالٍ وَبَنِينَ
क्या ये लोग ये ख्याल करते है कि हम जो उन्हें माल और औलाद में तरक्क़ी दे रहे है तो हम उनके साथ भलाईयाँ करने में जल्दी कर रहे है
Verse 56
نُسَارِعُ لَهُمۡ فِى ٱلۡخَيۡرَٲتِ ۚ بَل لَّا يَشۡعُرُونَ
(ऐसा नहीं) बल्कि ये लोग समझते नहीं
Verse 57
إِنَّ ٱلَّذِينَ هُم مِّنۡ خَشۡيَةِ رَبِّہِم مُّشۡفِقُونَ
उसमें शक नहीं कि जो लोग अपने परवरदिगार की वहशत से लरज़ रहे है
Verse 58
وَٱلَّذِينَ هُم بِـَٔايَـٰتِ رَبِّہِمۡ يُؤۡمِنُونَ
और जो लोग अपने परवरदिगार की (क़ुदरत की) निशानियों पर ईमान रखते हैं
Verse 59
وَٱلَّذِينَ هُم بِرَبِّہِمۡ لَا يُشۡرِكُونَ
और अपने परवरदिगार का किसी को शरीक नही बनाते
Verse 60
وَٱلَّذِينَ يُؤۡتُونَ مَآ ءَاتَواْ وَّقُلُوبُہُمۡ وَجِلَةٌ أَنَّہُمۡ إِلَىٰ رَبِّہِمۡ رَٲجِعُونَ
और जो लोग (ख़ुदा की राह में) जो कुछ बन पड़ता है देते हैं और फिर उनके दिल को इस बात का खटका लगा हुआ है कि उन्हें अपने परवरदिगार के सामने लौट कर जाना है
Verse 61
أُوْلَـٰٓٮِٕكَ يُسَـٰرِعُونَ فِى ٱلۡخَيۡرَٲتِ وَهُمۡ لَهَا سَـٰبِقُونَ
(देखिये क्या होता है) यही लोग अलबत्ता नेकियों में जल्दी करते हैं और भलाई की तरफ (दूसरों से) लपक के आगे बढ़ जाते हैं
Verse 62
وَلَا نُكَلِّفُ نَفۡسًا إِلَّا وُسۡعَهَا ۖ وَلَدَيۡنَا كِتَـٰبٌ يَنطِقُ بِٱلۡحَقِّ ۚ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ
और हम तो किसी शख्स को उसकी क़ूवत से बढ़के तकलीफ देते ही नहीं और हमारे पास तो (लोगों के आमाल की) किताब है जो बिल्कुल ठीक (हाल बताती है) और उन लोगों की (ज़र्रा बराबर) हक़ तलफी नहीं की जाएगी
Verse 63
بَلۡ قُلُوبُہُمۡ فِى غَمۡرَةٍ مِّنۡ هَـٰذَا وَلَهُمۡ أَعۡمَـٰلٌ مِّن دُونِ ذَٲلِكَ هُمۡ لَهَا عَـٰمِلُونَ
उनके दिल उसकी तरफ से ग़फलत में पडे हैं इसके अलावा उन के बहुत से आमाल हैं जिन्हें ये (बराबर किया करते है) और बाज़ नहीं आते
Verse 64
حَتَّىٰٓ إِذَآ أَخَذۡنَا مُتۡرَفِيہِم بِٱلۡعَذَابِ إِذَا هُمۡ يَجۡـَٔرُونَ
यहाँ तक कि जब हम उनके मालदारों को अज़ाब में गिरफ््तार करेंगे तो ये लोग वावैला करने लगेंगें
Verse 65
لَا تَجۡـَٔرُواْ ٱلۡيَوۡمَ ۖ إِنَّكُم مِّنَّا لَا تُنصَرُونَ
(उस वक्त क़हा जाएगा) आज वावैला मत करों तुमको अब हमारी तरफ से मदद नहीं मिल सकती
Verse 66
قَدۡ كَانَتۡ ءَايَـٰتِى تُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡ فَكُنتُمۡ عَلَىٰٓ أَعۡقَـٰبِكُمۡ تَنكِصُونَ
(जब) हमारी आयतें तुम्हारे सामने पढ़ी जाती थीं तो तुम अकड़ते किस्सा कहते बकते हुए उन से उलटे पाँव फिर जाते
Verse 67
مُسۡتَكۡبِرِينَ بِهِۦ سَـٰمِرًا تَهۡجُرُونَ
तो क्या उन लोगों ने (हमारी) बात (कुरान) पर ग़ौर नहीं किया
Verse 68
أَفَلَمۡ يَدَّبَّرُواْ ٱلۡقَوۡلَ أَمۡ جَآءَهُم مَّا لَمۡ يَأۡتِ ءَابَآءَهُمُ ٱلۡأَوَّلِينَ
उनके पास कोई ऐसी नयी चीज़ आयी जो उनके अगले बाप दादाओं के पास नहीं आयी थी
Verse 69
أَمۡ لَمۡ يَعۡرِفُواْ رَسُولَهُمۡ فَهُمۡ لَهُ ۥ مُنكِرُونَ
या उन लोगों ने अपने रसूल ही को नहीं पहचाना तो इस वजह से इन्कार कर बैठे
Verse 70
أَمۡ يَقُولُونَ بِهِۦ جِنَّةُۢ ۚ بَلۡ جَآءَهُم بِٱلۡحَقِّ وَأَڪۡثَرُهُمۡ لِلۡحَقِّ كَـٰرِهُونَ
या कहते हैं कि इसको जुनून हो गया है (हरगिज़ उसे जुनून नहीं) बल्कि वह तो उनके पास हक़ बात लेकर आया है और उनमें के अक्सर हक़ बात से नफरत रखते हैं
Verse 71
وَلَوِ ٱتَّبَعَ ٱلۡحَقُّ أَهۡوَآءَهُمۡ لَفَسَدَتِ ٱلسَّمَـٰوَٲتُ وَٱلۡأَرۡضُ وَمَن فِيهِنَّ ۚ بَلۡ أَتَيۡنَـٰهُم بِذِڪۡرِهِمۡ فَهُمۡ عَن ذِكۡرِهِم مُّعۡرِضُونَ
और अगर कहीं हक़ उनकी नफसियानी ख्वाहिश की पैरवी करता है तो सारे आसमान व ज़मीन और जो लोग उनमें हैं (सबके सब) बरबाद हो जाते बल्कि हम तो उन्हीं के तज़किरे (जिबरील के वास्ते से) उनके पास लेकर आए तो यह लोग अपने ही तज़किरे से मुँह मोड़तें हैं
Verse 72
أَمۡ تَسۡـَٔلُهُمۡ خَرۡجًا فَخَرَاجُ رَبِّكَ خَيۡرٌ ۖ وَهُوَ خَيۡرُ ٱلرَّٲزِقِينَ
(ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (अपनी रिसालत की) कुछ उजरत माँगतें हों तो तुम्हारे परवरदिगार की उजरत उससे कही बेहतर है और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देने वाला है
Verse 73
وَإِنَّكَ لَتَدۡعُوهُمۡ إِلَىٰ صِرَٲطٍ مُّسۡتَقِيمٍ
और तुम तो यक़ीनन उनको सीधी राह की तरफ बुलाते हो
Verse 74
وَإِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأَخِرَةِ عَنِ ٱلصِّرَٲطِ لَنَـٰكِبُونَ
और इसमें शक नहीं कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वह सीधी राह से हटे हुए हैं
Verse 75
۞ وَلَوۡ رَحِمۡنَـٰهُمۡ وَكَشَفۡنَا مَا بِهِم مِّن ضُرٍّ لَّلَجُّواْ فِى طُغۡيَـٰنِهِمۡ يَعۡمَهُونَ
और अगर हम उन पर तरस खायें और जो तकलीफें उनको (कुफ्र की वजह से) पहुँच रही हैं उन को दफा कर दें तो यक़ीनन ये लोग (और भी) अपनी सरकशी पर अड़ जाए और भटकते फिरें
Verse 76
وَلَقَدۡ أَخَذۡنَـٰهُم بِٱلۡعَذَابِ فَمَا ٱسۡتَكَانُواْ لِرَبِّہِمۡ وَمَا يَتَضَرَّعُونَ
और हमने उनको अज़ाब में गिरफ्तार किया तो भी वे लोग न तो अपने परवरदिगार के सामने झुके और गिड़गिड़ाएँ
Verse 77
حَتَّىٰٓ إِذَا فَتَحۡنَا عَلَيۡہِم بَابًا ذَا عَذَابٍ شَدِيدٍ إِذَا هُمۡ فِيهِ مُبۡلِسُونَ
यहाँ तक कि जब हमने उनके सामने एक सख्त अज़ाब का दरवाज़ा खोल दिया तो उस वक्त फ़ौरन ये लोग बेआस होकर बैठ रहे
Verse 78
وَهُوَ ٱلَّذِىٓ أَنشَأَ لَكُمُ ٱلسَّمۡعَ وَٱلۡأَبۡصَـٰرَ وَٱلۡأَفۡـِٔدَةَ ۚ قَلِيلاً مَّا تَشۡكُرُونَ
हालाँकि वही वह (मेहरबान खुदा) है जिसने तुम्हारे लिए कान और ऑंखें और दिल पैदा किये (मगर) तुम लोग हो ही बहुत कम शुक्र करने वाले
Verse 79
وَهُوَ ٱلَّذِى ذَرَأَكُمۡ فِى ٱلۡأَرۡضِ وَإِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ
और वह वही (ख़ुदा) है जिसने तुम को रुए ज़मीन में (हर तरफ) फैला दिया और फिर (एक दिन) सब के सब उसी के सामने इकट्ठे किये जाओगे
Verse 80
وَهُوَ ٱلَّذِى يُحۡىِۦ وَيُمِيتُ وَلَهُ ٱخۡتِلَـٰفُ ٱلَّيۡلِ وَٱلنَّهَارِ ۚ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ
और वही वह (ख़ुदा) है जो जिलाता और मारता है कि और रात दिन का फेर बदल भी उसी के एख्तियार में है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
Verse 81
بَلۡ قَالُواْ مِثۡلَ مَا قَالَ ٱلۡأَوَّلُونَ
(इन बातों को समझें ख़ाक नहीं) बल्कि जो अगले लोग कहते आए वैसी ही बात ये भी कहने लगे
Verse 82
قَالُوٓاْ أَءِذَا مِتۡنَا وَڪُنَّا تُرَابًا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبۡعُوثُونَ
कि जब हम मर जाएँगें और (मरकर) मिट्टी (का ढ़ेर) और हड्डियाँ हो जाएँगें तो क्या हम फिर दोबारा (क्रबों से ज़िन्दा करके) निकाले जाएँगे
Verse 83
لَقَدۡ وُعِدۡنَا نَحۡنُ وَءَابَآؤُنَا هَـٰذَا مِن قَبۡلُ إِنۡ هَـٰذَآ إِلَّآ أَسَـٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ
इसका वायदा तो हमसे और हमसे पहले हमारे बाप दादाओं से भी (बार हा) किया जा चुका है ये तो बस सिर्फ अगले लोगों के ढकोसले हैं
Verse 84
قُل لِّمَنِ ٱلۡأَرۡضُ وَمَن فِيهَآ إِن ڪُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि भला अगर तुम लोग कुछ जानते हो (तो बताओ) ये ज़मीन और जो लोग इसमें हैं किस के हैं वह फौरन जवाब देगें ख़ुदा के
Verse 85
سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلۡ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
तुम कह दो कि तो क्या तुम अब भी ग़ौर न करोगे
Verse 86
قُلۡ مَن رَّبُّ ٱلسَّمَـٰوَٲتِ ٱلسَّبۡعِ وَرَبُّ ٱلۡعَرۡشِ ٱلۡعَظِيمِ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि सातों आसमानों का मालिक और (इतने) बड़े अर्श का मालिक कौन है तो फौरन जवाब देगें कि (सब कुछ) खुदा ही का है
Verse 87
سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلۡ أَفَلَا تَتَّقُونَ
अब तुम कहो तो क्या तुम अब भी (उससे) नहीं डरोगे
Verse 88
قُلۡ مَنۢ بِيَدِهِۦ مَلَكُوتُ ڪُلِّ شَىۡءٍ وَهُوَ يُجِيرُ وَلَا يُجَارُ عَلَيۡهِ إِن كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि भला अगर तुम कुछ जानते हो (तो बताओ) कि वह कौन शख्स है- जिसके एख्तेयार में हर चीज़ की बादशाहत है वह (जिसे चाहता है) पनाह देता है और उस (के अज़ाब) से पनाह नहीं दी जा सकती
Verse 89
سَيَقُولُونَ لِلَّهِ ۚ قُلۡ فَأَنَّىٰ تُسۡحَرُونَ
तो ये लोग फौरन बोल उठेंगे कि (सब एख्तेयार) ख़ुदा ही को है- अब तुम कह दो कि तुम पर जादू कहाँ किया जाता है
Verse 90
بَلۡ أَتَيۡنَـٰهُم بِٱلۡحَقِّ وَإِنَّهُمۡ لَكَـٰذِبُونَ
बात ये है कि हमने उनके पास हक़ बात पहुँचा दी और ये लोग यक़ीनन झूठे हैं
Verse 91
مَا ٱتَّخَذَ ٱللَّهُ مِن وَلَدٍ وَمَا ڪَانَ مَعَهُ ۥ مِنۡ إِلَـٰهٍ ۚ إِذًا لَّذَهَبَ كُلُّ إِلَـٰهِۭ بِمَا خَلَقَ وَلَعَلَا بَعۡضُهُمۡ عَلَىٰ بَعۡضٍ ۚ سُبۡحَـٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ
न तो अल्लाह ने किसी को (अपना) बेटा बनाया है और न उसके साथ कोई और ख़ुदा है (अगर ऐसा होता) उस वक्त हर खुदा अपने अपने मख़लूक़ को लिए लिए फिरता और यक़ीनन एक दूसरे पर चढ़ाई करता
Verse 92
عَـٰلِمِ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ فَتَعَـٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِڪُونَ
(और ख़ूब जंग होती) जो जो बाते ये लोग (ख़ुदा की निस्बत) बयान करते हैं उस से ख़ुदा पाक व पाकीज़ा है वह पोशीदा और हाज़िर (सबसे) खुदा वाक़िफ है ग़रज़ वह उनके शिर्क से (बिल्कुल पाक और) बालातर है
Verse 93
قُل رَّبِّ إِمَّا تُرِيَنِّى مَا يُوعَدُونَ
(ऐ रसूल) तुम दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले जिस (अज़ाब) का तूने उनसे वायदा किया है अगर शायद तू मुझे दिखाए
Verse 94
رَبِّ فَلَا تَجۡعَلۡنِى فِى ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ
तो परवरदिगार मुझे उन ज़ालिम लोगों के हमराह न करना
Verse 95
وَإِنَّا عَلَىٰٓ أَن نُّرِيَكَ مَا نَعِدُهُمۡ لَقَـٰدِرُونَ
और (ऐ रसूल) हम यक़ीनन इस पर क़ादिर हैं कि जिस (अज़ाब) का हम उनसे वायदा करते हैं तुम्हें दिखा दें
Verse 96
ٱدۡفَعۡ بِٱلَّتِى هِىَ أَحۡسَنُ ٱلسَّيِّئَةَ ۚ نَحۡنُ أَعۡلَمُ بِمَا يَصِفُونَ
और बुरी बात के जवाब में ऐसी बात कहो जो निहायत अच्छी हो जो कुछ ये लोग (तुम्हारी निस्बत) बयान करते हैं उससे हम ख़ूब वाक़िफ हैं
Verse 97
وَقُل رَّبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنۡ هَمَزَٲتِ ٱلشَّيَـٰطِينِ
और (ये भी) दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले मै शैतान के वसवसों से तेरी पनाह माँगता हूँ
Verse 98
وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَن يَحۡضُرُونِ
और ऐ मेरे परवरदिगार इससे भी तेरी पनाह माँगता हूँ कि शयातीन मेरे पास आएँ
Verse 99
حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَ أَحَدَهُمُ ٱلۡمَوۡتُ قَالَ رَبِّ ٱرۡجِعُونِ
(और कुफ्फ़ार तो मानेगें नहीं) यहाँ तक कि जब उनमें से किसी को मौत आयी तो कहने लगे परवरदिगार तू मुझे (एक बार) उस मुक़ाम (दुनिया) में छोड़ आया हूँ फिर वापस कर दे ताकि मै (अपकी दफ़ा) अच्छे अच्छे काम करूं
Verse 100
لَعَلِّىٓ أَعۡمَلُ صَـٰلِحًا فِيمَا تَرَكۡتُ ۚ كَلَّآ ۚ إِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَآٮِٕلُهَا ۖ وَمِن وَرَآٮِٕهِم بَرۡزَخٌ إِلَىٰ يَوۡمِ يُبۡعَثُونَ
(जवाब दिया जाएगा) हरगिज़ नहीं ये एक लग़ो बात है- जिसे वह बक रहा और उनके (मरने के) बाद (आलमे) बरज़ख़ है
Verse 101
فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ فَلَآ أَنسَابَ بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَٮِٕذٍ وَلَا يَتَسَآءَلُونَ
(जहाँ) क़ब्रों से उठाए जाएँगें (रहना होगा) फिर जिस वक्त सूर फूँका जाएगा तो उस दिन न लोगों में क़राबत दारियाँ रहेगी और न एक दूसरे की बात पूछेंगे
Verse 102
فَمَن ثَقُلَتۡ مَوَٲزِينُهُ ۥ فَأُوْلَـٰٓٮِٕكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ
फिर जिन (के नेकियों) के पल्लें भारी होगें तो यही लोग कामयाब होंगे
Verse 103
وَمَنۡ خَفَّتۡ مَوَٲزِينُهُ ۥ فَأُوْلَـٰٓٮِٕكَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ فِى جَهَنَّمَ خَـٰلِدُونَ
और जिन (के नेकियों) के पल्लें हल्के होंगे तो यही लोग है जिन्होंने अपना नुक़सान किया कि हमेशा जहन्नुम में रहेंगे
Verse 104
تَلۡفَحُ وُجُوهَهُمُ ٱلنَّارُ وَهُمۡ فِيہَا كَـٰلِحُونَ
और (उनकी ये हालत होगी कि) जहन्नुम की आग उनके मुँह को झुलसा देगी और लोग मुँह बनाए हुए होगें
Verse 105
أَلَمۡ تَكُنۡ ءَايَـٰتِى تُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡ فَكُنتُم بِہَا تُكَذِّبُونَ
(उस वक्त हम पूछेंगें) क्या तुम्हारे सामने मेरी आयतें न पढ़ी गयीं थीं (ज़रुर पढ़ी गयी थीं) तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे
Verse 106
قَالُواْ رَبَّنَا غَلَبَتۡ عَلَيۡنَا شِقۡوَتُنَا وَڪُنَّا قَوۡمًا ضَآلِّينَ
वह जवाब देगें ऐ हमारे परवरदिगार हमको हमारी कम्बख्ती ने आज़माया और हम गुमराह लोग थे
Verse 107
رَبَّنَآ أَخۡرِجۡنَا مِنۡہَا فَإِنۡ عُدۡنَا فَإِنَّا ظَـٰلِمُونَ
परवरदिगार हमको (अबकी दफा) किसी तरह इस जहन्नुम से निकाल दे फिर अगर दोबारा हम ऐसा करें तो अलबत्ता हम कुसूरवार हैं
Verse 108
قَالَ ٱخۡسَـُٔواْ فِيہَا وَلَا تُكَلِّمُونِ
ख़ुदा फरमाएगा दूर हो इसी में (तुम को रहना होगा) और (बस) मुझ से बात न करो
Verse 109
إِنَّهُ ۥ كَانَ فَرِيقٌ مِّنۡ عِبَادِى يَقُولُونَ رَبَّنَآ ءَامَنَّا فَٱغۡفِرۡ لَنَا وَٱرۡحَمۡنَا وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلرَّٲحِمِينَ
मेरे बन्दों में से एक गिरोह ऐसा भी था जो (बराबर) ये दुआ करता था कि ऐ हमारे पालने वाले हम ईमान लाए तो तू हमको बख्श दे और हम पर रहम कर तू तो तमाम रहम करने वालों से बेहतर है
Verse 110
فَٱتَّخَذۡتُمُوهُمۡ سِخۡرِيًّا حَتَّىٰٓ أَنسَوۡكُمۡ ذِكۡرِى وَكُنتُم مِّنۡہُمۡ تَضۡحَكُونَ
तो तुम लोगों ने उन्हें मसखरा बना लिया-यहाँ तक कि (गोया) उन लोगों ने तुम से मेरी याद भुला दी और तुम उन पर (बराबर) हँसते रहे
Verse 111
إِنِّى جَزَيۡتُهُمُ ٱلۡيَوۡمَ بِمَا صَبَرُوٓاْ أَنَّهُمۡ هُمُ ٱلۡفَآٮِٕزُونَ
मैने आज उनको उनके सब्र का अच्छा बदला दिया कि यही लोग अपनी (ख़ातिरख्वाह) मुराद को पहुँचने वाले हैं
Verse 112
قَـٰلَ كَمۡ لَبِثۡتُمۡ فِى ٱلۡأَرۡضِ عَدَدَ سِنِينَ
(फिर उनसे) ख़ुदा पूछेगा कि (आख़िर) तुम ज़मीन पर कितने बरस रहे
Verse 113
قَالُواْ لَبِثۡنَا يَوۡمًا أَوۡ بَعۡضَ يَوۡمٍ فَسۡـَٔلِ ٱلۡعَآدِّينَ
वह कहेंगें (बरस कैसा) हम तो बस पूरा एक दिन रहे या एक दिन से भी कम
Verse 114
قَـٰلَ إِن لَّبِثۡتُمۡ إِلَّا قَلِيلاً ۖ لَّوۡ أَنَّكُمۡ كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ
तो तुम शुमार करने वालों से पूछ लो ख़ुदा फरमाएगा बेशक तुम (ज़मीन में) बहुत ही कम ठहरे काश तुम (इतनी बात भी दुनिया में) समझे होते
Verse 115
أَفَحَسِبۡتُمۡ أَنَّمَا خَلَقۡنَـٰكُمۡ عَبَثًا وَأَنَّكُمۡ إِلَيۡنَا لَا تُرۡجَعُونَ
तो क्या तुम ये ख्याल करते हो कि हमने तुमको (यूँ ही) बेकार पैदा किया और ये कि तुम हमारे हुज़ूर में लौटा कर न लाए जाओगे
Verse 116
فَتَعَـٰلَى ٱللَّهُ ٱلۡمَلِكُ ٱلۡحَقُّ ۖ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ ٱلۡعَرۡشِ ٱلۡڪَرِيمِ
तो ख़ुदा जो सच्चा बादशाह (हर चीज़ से) बरतर व आला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वहीं) अर्श बुर्जुग़ का मालिक है
Verse 117
وَمَن يَدۡعُ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ لَا بُرۡهَـٰنَ لَهُ ۥ بِهِۦ فَإِنَّمَا حِسَابُهُ ۥ عِندَ رَبِّهِۦۤ ۚ إِنَّهُ ۥ لَا يُفۡلِحُ ٱلۡكَـٰفِرُونَ
और जो शख्स ख़ुदा के साथ दूसरे माबूद की भी परसतिश करेगा उसके पास इस शिर्क की कोई दलील तो है नहीं तो बस उसका हिसाब (किताब) उसके परवरदिगार ही के पास होगा (मगर याद रहे कि कुफ्फ़ार हरगिज़ फलॉह पाने वाले नहीं)
Verse 118
وَقُل رَّبِّ ٱغۡفِرۡ وَٱرۡحَمۡ وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلرَّٲحِمِينَ
और (ऐ रसूल) तुम कह दो परवरदिगार तू (मेरी उम्मत को) बख्श दे और तरस खा और तू तो सब रहम करने वालों से बेहतर है