Surah Al-Hijr
Quran Surah
Surah 15: Al-Hijr
الحجر
Verse count: 99
Opening Bismillah
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं।
Verse 1
الٓر ۚ تِلۡكَ ءَايَـٰتُ ٱلۡڪِتَـٰبِ وَقُرۡءَانٍ مُّبِينٍ
अलिफ़ लाम रा ये किताब (ख़ुदा) और वाजेए व रौशन क़ुरान की (चन्द) आयते हैं
Verse 2
رُّبَمَا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ ڪَفَرُواْ لَوۡ كَانُواْ مُسۡلِمِينَ
(एक दिन वह भी आने वाला है कि) जो लोग काफ़िर हो बैठे हैं अक्सर दिल से चाहेंगें
Verse 3
ذَرۡهُمۡ يَأۡڪُلُواْ وَيَتَمَتَّعُواْ وَيُلۡهِهِمُ ٱلۡأَمَلُ ۖ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ
काश (हम भी) मुसलमान होते (ऐ रसूल) उन्हें उनकी हालत पर रहने दो कि खा पी लें और (दुनिया के चन्द रोज़) चैन कर लें और उनकी तमन्नाएँ उन्हें खेल तमाशे में लगाए रहीं
Verse 4
وَمَآ أَهۡلَكۡنَا مِن قَرۡيَةٍ إِلَّا وَلَهَا كِتَابٌ مَّعۡلُومٌ
अनक़रीब ही (इसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा और हमने कभी कोई बस्ती तबाह नहीं की मगर ये कि उसकी तबाही के लिए (पहले ही से) समझी बूझी मियाद मुक़र्रर लिखी हुई थी
Verse 5
مَّا تَسۡبِقُ مِنۡ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسۡتَـٔۡخِرُونَ
कोई उम्मत अपने वक्त से न आगे बढ़ सकती है न पीछे हट सकती है
Verse 6
وَقَالُواْ يَـٰٓأَيُّہَا ٱلَّذِى نُزِّلَ عَلَيۡهِ ٱلذِّكۡرُ إِنَّكَ لَمَجۡنُونٌ
(ऐ रसूल कुफ्फ़ारे मक्का तुमसे) कहते हैं कि ऐ शख़्श (जिसको ये भरम है) कि उस पर ‘वही’ व किताब नाज़िल हुईहै तो (अच्छा ख़ासा) सिड़ी है
Verse 7
لَّوۡ مَا تَأۡتِينَا بِٱلۡمَلَـٰٓٮِٕكَةِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ
अगर तू अपने दावे में सच्चा है तो फरिश्तों को हमारे सामने क्यों नहीं ला खड़ा करता
Verse 8
مَا نُنَزِّلُ ٱلۡمَلَـٰٓٮِٕكَةَ إِلَّا بِٱلۡحَقِّ وَمَا كَانُوٓاْ إِذًا مُّنظَرِينَ
(हालॉकि) हम फरिश्तों को खुल्लम खुल्ला (जिस अज़ाब के साथ) फैसले ही के लिए भेजा करते हैं और (अगर फरिश्ते नाज़िल हो जाए तो) फिर उनको (जान बचाने की) मोहलत भी न मिले
Verse 9
إِنَّا نَحۡنُ نَزَّلۡنَا ٱلذِّكۡرَ وَإِنَّا لَهُ ۥ لَحَـٰفِظُونَ
बेशक हम ही ने क़ुरान नाज़िल किया और हम ही तो उसके निगेहबान भी हैं
Verse 10
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ فِى شِيَعِ ٱلۡأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले भी अगली उम्मतों में (और भी बहुत से) रसूल भेजे
Verse 11
وَمَا يَأۡتِيہِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَہۡزِءُونَ
और (उनकी भी यही हालत थी कि) उनके पास कोई रसूल न आया मगर उन लोगों ने उसकी हँसी ज़रुर उड़ाई
Verse 12
كَذَٲلِكَ نَسۡلُكُهُ ۥ فِى قُلُوبِ ٱلۡمُجۡرِمِينَ
हम (गोया खुद) इसी तरह इस (गुमराही) को (उन) गुनाहगारों के दिल में डाल देते हैं
Verse 13
لَا يُؤۡمِنُونَ بِهِۦ ۖ وَقَدۡ خَلَتۡ سُنَّةُ ٱلۡأَوَّلِينَ
ये कुफ्फ़ार इस (क़ुरान) पर ईमान न लाएँगें और (ये कुछ अनोखी बात नहीं) अगलों के तरीक़े भी (ऐसे ही) रहें है
Verse 14
وَلَوۡ فَتَحۡنَا عَلَيۡہِم بَابًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فَظَلُّواْ فِيهِ يَعۡرُجُونَ
और अगर हम अपनी कुदरत से आसमान का एक दरवाज़ा भी खोल दें और ये लोग दिन दहाड़े उस दरवाज़े से (आसमान पर) चढ़ भी जाएँ
Verse 15
لَقَالُوٓاْ إِنَّمَا سُكِّرَتۡ أَبۡصَـٰرُنَا بَلۡ نَحۡنُ قَوۡمٌ مَّسۡحُورُونَ
तब भी यहीं कहेगें कि हो न हो हमारी ऑंखें (नज़र बन्दी से) मतवाली कर दी गई हैं या नहीं तो हम लोगों पर जादू किया गया है
Verse 16
وَلَقَدۡ جَعَلۡنَا فِى ٱلسَّمَآءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّـٰهَا لِلنَّـٰظِرِينَ
और हम ही ने आसमान में बुर्ज बनाए और देखने वालों के वास्ते उनके (सितारों से) आरास्ता (सजाया) किया
Verse 17
وَحَفِظۡنَـٰهَا مِن كُلِّ شَيۡطَـٰنٍ رَّجِيمٍ
और हर शैतान मरदूद की आमद रफत (आने जाने) से उन्हें महफूज़ रखा
Verse 18
إِلَّا مَنِ ٱسۡتَرَقَ ٱلسَّمۡعَ فَأَتۡبَعَهُ ۥ شِہَابٌ مُّبِينٌ
मगर जो शैतान चोरी छिपे (वहाँ की किसी बात पर) कान लगाए तो यहाब का दहकता हुआ योला उसके (खदेड़ने को) पीछे पड़ जाता है
Verse 19
وَٱلۡأَرۡضَ مَدَدۡنَـٰهَا وَأَلۡقَيۡنَا فِيهَا رَوَٲسِىَ وَأَنۢبَتۡنَا فِيہَا مِن كُلِّ شَىۡءٍ مَّوۡزُونٍ
और ज़मीन को (भी अपने मख़लूक़ात के रहने सहने को) हम ही ने फैलाया और इसमें (कील की तरह) पहाड़ो के लंगर डाल दिए और हमने उसमें हर किस्म की मुनासिब चीज़े उगाई
Verse 20
وَجَعَلۡنَا لَكُمۡ فِيہَا مَعَـٰيِشَ وَمَن لَّسۡتُمۡ لَهُ ۥ بِرَٲزِقِينَ
और हम ही ने उन्हें तुम्हारे वास्ते ज़िन्दगी के साज़ों सामान बना दिए और उन जानवरों के लिए भी जिन्हें तुम रोज़ी नहीं देते
Verse 21
وَإِن مِّن شَىۡءٍ إِلَّا عِندَنَا خَزَآٮِٕنُهُ ۥ وَمَا نُنَزِّلُهُ ۥۤ إِلَّا بِقَدَرٍ مَّعۡلُومٍ
और हमारे यहाँ तो हर चीज़ के बेशुमार खज़ाने (भरे) पड़े हैं और हम (उसमें से) एक जची तली मिक़दार भेजते रहते है
Verse 22
وَأَرۡسَلۡنَا ٱلرِّيَـٰحَ لَوَٲقِحَ فَأَنزَلۡنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءً فَأَسۡقَيۡنَـٰكُمُوهُ وَمَآ أَنتُمۡ لَهُ ۥ بِخَـٰزِنِينَ
और हम ही ने वह हवाएँ भेजी जो बादलों को पानी से (भरे हुए) है फिर हम ही ने आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने तुम लोगों को वह पानी पिलाया और तुम लोगों ने तो कुछ उसको जमा करके नहीं रखा था
Verse 23
وَإِنَّا لَنَحۡنُ نُحۡىِۦ وَنُمِيتُ وَنَحۡنُ ٱلۡوَٲرِثُونَ
और इसमें शक़ नहीं कि हम ही (लोगों को) जिलाते और हम ही मार डालते हैं और (फिर) हम ही (सब के) वाली वारिस हैं
Verse 24
وَلَقَدۡ عَلِمۡنَا ٱلۡمُسۡتَقۡدِمِينَ مِنكُمۡ وَلَقَدۡ عَلِمۡنَا ٱلۡمُسۡتَـٔۡخِرِينَ
और बेशक हम ही ने तुममें से उन लोगों को भी अच्छी तरह समझ लिया जो पहले हो गुज़रे और हमने उनको भी जान लिया जो बाद को आने वाले हैं
Verse 25
وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحۡشُرُهُمۡ ۚ إِنَّهُ ۥ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
और इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार वही है जो उन सब को (क़यामत में कब्रों से) उठाएगा बेशक वह हिक़मत वाला वाक़िफकार है
Verse 26
وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَـٰنَ مِن صَلۡصَـٰلٍ مِّنۡ حَمَإٍ مَّسۡنُونٍ
और बेशक हम ही ने आदमी को ख़मीर (गुंधी) दी हुईसड़ी मिट्टी से जो (सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा किया
Verse 27
وَٱلۡجَآنَّ خَلَقۡنَـٰهُ مِن قَبۡلُ مِن نَّارِ ٱلسَّمُومِ
और हम ही ने जिन्नात को आदमी से (भी) पहले वे धुएँ की तेज़ आग से पैदा किया
Verse 28
وَإِذۡ قَالَ رَبُّكَ لِلۡمَلَـٰٓٮِٕكَةِ إِنِّى خَـٰلِقُۢ بَشَرًا مِّن صَلۡصَـٰلٍ مِّنۡ حَمَإٍ مَّسۡنُونٍ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं एक आदमी को खमीर दी हुई मिट्टी से (जो सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा करने वाला हूँ
Verse 29
فَإِذَا سَوَّيۡتُهُ ۥ وَنَفَخۡتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُواْ لَهُ ۥ سَـٰجِدِينَ
तो जिस वक्त मै उसको हर तरह से दुरुस्त कर चुके और उसमें अपनी (तरफ से) रुह फूँक दूँ तो सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना
Verse 30
فَسَجَدَ ٱلۡمَلَـٰٓٮِٕكَةُ ڪُلُّهُمۡ أَجۡمَعُونَ
ग़रज़ फरिश्ते तो सब के सब सर ब सजूद हो गए
Verse 31
إِلَّآ إِبۡلِيسَ أَبَىٰٓ أَن يَكُونَ مَعَ ٱلسَّـٰجِدِينَ
मगर इबलीस (मलऊन) की उसने सजदा करने वालों के साथ शामिल होने से इन्कार किया
Verse 32
قَالَ يَـٰٓإِبۡلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ ٱلسَّـٰجِدِينَ
(इस पर ख़ुदा ने) फरमाया आओ शैतान आख़िर तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों के साथ शामिल न हुआ
Verse 33
قَالَ لَمۡ أَكُن لِّأَسۡجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقۡتَهُ ۥ مِن صَلۡصَـٰلٍ مِّنۡ حَمَإٍ مَّسۡنُونٍ
वह (ढिठाई से) कहने लगा मैं ऐसा गया गुज़रा तो हूँ नहीं कि ऐसे आदमी को सजदा कर बैठूँ जिसे तूने सड़ी हुई खन खन बोलने वाली मिट्टी से पैदा किया है
Verse 34
قَالَ فَٱخۡرُجۡ مِنۡہَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌ
ख़ुदा ने फरमाया (नहीं तू) तो बेहश्त से निकल जा (दूर हो) कि बेशक तू मरदूद है
Verse 35
وَإِنَّ عَلَيۡكَ ٱللَّعۡنَةَ إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلدِّينِ
और यक़ीनन तुझ पर रोज़े में जज़ा तक फिटकार बरसा करेगी
Verse 36
قَالَ رَبِّ فَأَنظِرۡنِىٓ إِلَىٰ يَوۡمِ يُبۡعَثُونَ
शैतान ने कहा ऐ मेरे परवरदिगार ख़ैर तू मुझे उस दिन तक की मोहलत दे जबकि (लोग दोबारा ज़िन्दा करके) उठाए जाएँगें
Verse 37
قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ ٱلۡمُنظَرِينَ
ख़ुदा ने फरमाया वक्त मुक़र्रर
Verse 38
إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡوَقۡتِ ٱلۡمَعۡلُومِ
के दिन तक तुझे मोहलत दी गई
Verse 39
قَالَ رَبِّ بِمَآ أَغۡوَيۡتَنِى لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمۡ فِى ٱلۡأَرۡضِ وَلَأُغۡوِيَنَّہُمۡ أَجۡمَعِينَ
उन शैतान ने कहा ऐ मेरे परवरदिगार चूंकि तूने मुझे रास्ते से अलग किया मैं भी उनके लिए दुनिया में (साज़ व सामान को) उम्दा कर दिखाऊँगा और सबको ज़रुर बहकाऊगा
Verse 40
إِلَّا عِبَادَكَ مِنۡہُمُ ٱلۡمُخۡلَصِينَ
मगर उनमें से तेरे निरे खुरे ख़ास बन्दे (कि वह मेरे बहकाने में न आएँगें)
Verse 41
قَالَ هَـٰذَا صِرَٲطٌ عَلَىَّ مُسۡتَقِيمٌ
ख़ुदा ने फरमाया कि यही राह सीधी है कि मुझ तक (पहुँचती) है
Verse 42
إِنَّ عِبَادِى لَيۡسَ لَكَ عَلَيۡہِمۡ سُلۡطَـٰنٌ إِلَّا مَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلۡغَاوِينَ
जो मेरे मुख़लिस (ख़ास बन्दे) बन्दे हैं उन पर तुझसे किसी तरह की हुकूमत न होगी मगर हाँ गुमराहों में से जो तेरी पैरवी करे (उस पर तेरा वार चल जाएगा)
Verse 43
وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوۡعِدُهُمۡ أَجۡمَعِينَ
और हाँ ये भी याद रहे कि उन सब के वास्ते (आख़िरी) वायदा बस जहन्न ुम है जिसके सात दरवाजे होगे
Verse 44
لَهَا سَبۡعَةُ أَبۡوَٲبٍ لِّكُلِّ بَابٍ مِّنۡہُمۡ جُزۡءٌ مَّقۡسُومٌ
हर (दरवाज़े में जाने) के लिए उन गुमराहों की अलग अलग टोलियाँ होगीं
Verse 45
إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ
और परहेज़गार तो बेहश्त के बाग़ों और चश्मों मे यक़ीनन होंगे
Verse 46
ٱدۡخُلُوهَا بِسَلَـٰمٍ ءَامِنِينَ
(दाख़िले के वक्त फ़रिश्ते कहेगें कि) उनमें सलामती इत्मिनान से चले चलो
Verse 47
وَنَزَعۡنَا مَا فِى صُدُورِهِم مِّنۡ غِلٍّ إِخۡوَٲنًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَـٰبِلِينَ
और (दुनिया की तकलीफों से) जो कुछ उनके दिल में रंज था उसको भी हम निकाल देगें और ये बाहम एक दूसरे के आमने सामने तख्तों पर इस तरह बैठे होगें जैसे भाई भाई
Verse 48
لَا يَمَسُّهُمۡ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُم مِّنۡہَا بِمُخۡرَجِينَ
उनको बेहश्त में तकलीफ छुएगी भी तो नहीं और न कभी उसमें से निकाले जाएँगें
Verse 49
۞ نَبِّئۡ عِبَادِىٓ أَنِّىٓ أَنَا ٱلۡغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ
(ऐ रसूल) मेरे बन्दों को आगाह करो कि बेशक मै बड़ा बख्शने वाला मेहरबान हूँ
Verse 50
وَأَنَّ عَذَابِى هُوَ ٱلۡعَذَابُ ٱلۡأَلِيمُ
मगर साथ ही इसके (ये भी याद रहे कि) बेशक मेरा अज़ाब भी बड़ा दर्दनाक अज़ाब है
Verse 51
وَنَبِّئۡهُمۡ عَن ضَيۡفِ إِبۡرَٲهِيمَ
और उनको इबराहीम के मेहमान का हाल सुना दो
Verse 52
إِذۡ دَخَلُواْ عَلَيۡهِ فَقَالُواْ سَلَـٰمًا قَالَ إِنَّا مِنكُمۡ وَجِلُونَ
कि जब ये इबराहीम के पास आए तो (पहले) उन्होंने सलाम किया इबराहीम ने (जवाब सलाम के बाद) कहा हमको तो तुम से डर मालूम होता है
Verse 53
قَالُواْ لَا تَوۡجَلۡ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَـٰمٍ عَلِيمٍ
उन्होंने कहा आप मुत्तालिक़ ख़ौफ न कीजिए (क्योंकि) हम तो आप को एक (दाना व बीना) फरज़न्द (के पैदाइश) की खुशख़बरी देते हैं
Verse 54
قَالَ أَبَشَّرۡتُمُونِى عَلَىٰٓ أَن مَّسَّنِىَ ٱلۡڪِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ
इब्राहिम ने कहा क्या मुझे ख़ुशख़बरी (बेटा होने की) देते हो जब मुझे बुढ़ापा छा गया
Verse 55
قَالُواْ بَشَّرۡنَـٰكَ بِٱلۡحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلۡقَـٰنِطِينَ
तो फिर अब काहे की खुशख़बरी देते हो वह फरिश्ते बोले हमने आप को बिल्कुल ठीक खुशख़बरी दी है तो आप (बारगाह ख़ुदा बन्दी से) ना उम्मीद न हो
Verse 56
قَالَ وَمَن يَقۡنَطُ مِن رَّحۡمَةِ رَبِّهِۦۤ إِلَّا ٱلضَّآلُّونَ
इबराहीम ने कहा गुमराहों के सिवा और ऐसा कौन है जो अपने परवरदिगार की रहमत से ना उम्मीद हो
Verse 57
قَالَ فَمَا خَطۡبُكُمۡ أَيُّہَا ٱلۡمُرۡسَلُونَ
(फिर) इबराहीम ने कहा ऐ (ख़ुदा के) भेजे हुए (फरिश्तों) तुम्हें आख़िर क्या मुहिम दर पेश है
Verse 58
قَالُوٓاْ إِنَّآ أُرۡسِلۡنَآ إِلَىٰ قَوۡمٍ مُّجۡرِمِينَ
उन्होंने कहा कि हम तो एक गुनाहगार क़ौम की तरफ (अज़ाब नाज़िल करने के लिए) भेजे गए हैं
Verse 59
إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمۡ أَجۡمَعِينَ
मगर लूत के लड़के वाले कि हम उन सबको ज़रुर बचा लेगें मगर उनकी बीबी जिसे हमने ताक लिया है
Verse 60
إِلَّا ٱمۡرَأَتَهُ ۥ قَدَّرۡنَآ ۙ إِنَّہَا لَمِنَ ٱلۡغَـٰبِرِينَ
कि वह ज़रुर (अपने लड़के बालों के) पीछे (अज़ाब में) रह जाएगी
Verse 61
فَلَمَّا جَآءَ ءَالَ لُوطٍ ٱلۡمُرۡسَلُونَ
ग़रज़ जब (ख़ुदा के) भेजे हुए (फरिश्ते) लूत के बाल बच्चों के पास आए तो लूत ने कहा कि तुम तो (कुछ) अजनबी लोग (मालूम होते हो)
Verse 62
قَالَ إِنَّكُمۡ قَوۡمٌ مُّنڪَرُونَ
फरिश्तों ने कहा (नहीं) बल्कि हम तो आपके पास वह (अज़ाब) लेकर आए हैं
Verse 63
قَالُواْ بَلۡ جِئۡنَـٰكَ بِمَا كَانُواْ فِيهِ يَمۡتَرُونَ
जिसके बारे में आपकी क़ौम के लोग शक़ रखते थे
Verse 64
وَأَتَيۡنَـٰكَ بِٱلۡحَقِّ وَإِنَّا لَصَـٰدِقُونَ
(कि आए न आए) और हम आप के पास (अज़ाब का) कलई (सही) हुक्म लेकर आए हैं और हम बिल्कुल सच कहते हैं
Verse 65
فَأَسۡرِ بِأَهۡلِكَ بِقِطۡعٍ مِّنَ ٱلَّيۡلِ وَٱتَّبِعۡ أَدۡبَـٰرَهُمۡ وَلَا يَلۡتَفِتۡ مِنكُمۡ أَحَدٌ وَٱمۡضُواْ حَيۡثُ تُؤۡمَرُونَ
बस तो आप कुछ रात रहे अपने लड़के बालों को लेकर निकल जाइए और आप सब के सब पीछे रहिएगा और उन लोगों में से कोई मुड़कर पीछे न देखे और जिधर (जाने) का हुक्म दिया गया है (शाम) उधर (सीधे) चले जाओ और हमने लूत के पास इस अम्र का क़तई फैसला कहला भेजा
Verse 66
وَقَضَيۡنَآ إِلَيۡهِ ذَٲلِكَ ٱلۡأَمۡرَ أَنَّ دَابِرَ هَـٰٓؤُلَآءِ مَقۡطُوعٌ مُّصۡبِحِينَ
कि बस सुबह होते होते उन लोगों की जड़ काट डाली जाएगी
Verse 67
وَجَآءَ أَهۡلُ ٱلۡمَدِينَةِ يَسۡتَبۡشِرُونَ
और (ये बात हो रही थीं कि) शहर के लोग (मेहमानों की ख़बर सुन कर बुरी नीयत से) खुशियाँ मनाते हुए आ पहुँचे
Verse 68
قَالَ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ ضَيۡفِى فَلَا تَفۡضَحُونِ
लूत ने (उनसे कहा) कि ये लोग मेरे मेहमान है तो तुम (इन्हें सताकर) मुझे रुसवा बदनाम न करो
Verse 69
وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَلَا تُخۡزُونِ
और ख़ुदा से डरो और मुझे ज़लील न करो
Verse 70
قَالُوٓاْ أَوَلَمۡ نَنۡهَكَ عَنِ ٱلۡعَـٰلَمِينَ
वह लोग कहने लगे क्यों जी हमने तुम को सारे जहाँन के लोगों (के आने) की मनाही नहीं कर दी थी
Verse 71
قَالَ هَـٰٓؤُلَآءِ بَنَاتِىٓ إِن كُنتُمۡ فَـٰعِلِينَ
लूत ने कहा अगर तुमको (ऐसा ही) करना है तो ये मेरी क़ौम की बेटियाँ मौजूद हैं
Verse 72
لَعَمۡرُكَ إِنَّہُمۡ لَفِى سَكۡرَتِہِمۡ يَعۡمَهُونَ
(इनसे निकाह कर लो) ऐ रसूल तुम्हारी जान की कसम ये लोग (क़ौम लूत) अपनी मस्ती में मदहोश हो रहे थे
Verse 73
فَأَخَذَتۡہُمُ ٱلصَّيۡحَةُ مُشۡرِقِينَ
(लूत की सुनते काहे को) ग़रज़ सूरज निकलते निकलते उनको (बड़े ज़ोरो की) चिघाड़ न ले डाला
Verse 74
فَجَعَلۡنَا عَـٰلِيَہَا سَافِلَهَا وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡہِمۡ حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍ
फिर हमने उसी बस्ती को उलट कर उसके ऊपर के तबके क़ो नीचे का तबक़ा बना दिया और उसके ऊपर उन पर खरन्जे के पत्थर बरसा दिए इसमें शक़ नहीं कि इसमें (असली बात के) ताड़ जाने वालों के लिए (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
Verse 75
إِنَّ فِى ذَٲلِكَ لَأَيَـٰتٍ لِّلۡمُتَوَسِّمِينَ
और वह उलटी हुई बस्ती हमेशा (की आमदरफ्त)
Verse 76
وَإِنَّہَا لَبِسَبِيلٍ مُّقِيمٍ
के रास्ते पर है
Verse 77
إِنَّ فِى ذَٲلِكَ لَأَيَةً لِّلۡمُؤۡمِنِينَ
इसमें तो शक हीं नहीं कि इसमें ईमानदारों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
Verse 78
وَإِن كَانَ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡأَيۡكَةِ لَظَـٰلِمِينَ
और एैका के रहने वाले (क़ौमे शुएब की तरह बड़े सरकश थे)
Verse 79
فَٱنتَقَمۡنَا مِنۡہُمۡ وَإِنَّہُمَا لَبِإِمَامٍ مُّبِينٍ
तो उन से भी हमने (नाफरमानी का) बदला लिया और ये दो बस्तियाँ (क़ौमे लूत व शुएब की) एक खुली हुई यह राह पर (अभी तक मौजूद) हैं
Verse 80
وَلَقَدۡ كَذَّبَ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡحِجۡرِ ٱلۡمُرۡسَلِينَ
और इसी तरह हिज्र के रहने वालों (क़ौम सालेह ने भी) पैग़म्बरों को झुठलाया
Verse 81
وَءَاتَيۡنَـٰهُمۡ ءَايَـٰتِنَا فَكَانُواْ عَنۡہَا مُعۡرِضِينَ
और (बावजूद कि) हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दी उस पर भी वह लोग उनसे रद गिरदानी करते रहे
Verse 82
وَكَانُواْ يَنۡحِتُونَ مِنَ ٱلۡجِبَالِ بُيُوتًا ءَامِنِينَ
और बहुत दिल जोई से पहाड़ों को तराश कर घर बनाते रहे
Verse 83
فَأَخَذَتۡہُمُ ٱلصَّيۡحَةُ مُصۡبِحِينَ
आख़िर उनके सुबह होते होते एक बड़ी (जोरों की) चिंघाड़ ने ले डाला
Verse 84
فَمَآ أَغۡنَىٰ عَنۡہُم مَّا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ
फिर जो कुछ वह अपनी हिफाज़त की तदबीर किया करते थे (अज़ाब ख़ुदा से बचाने में) कि कुछ भी काम न आयीं
Verse 85
وَمَا خَلَقۡنَا ٱلسَّمَـٰوَٲتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَہُمَآ إِلَّا بِٱلۡحَقِّ ۗ وَإِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَأَتِيَةٌ ۖ فَٱصۡفَحِ ٱلصَّفۡحَ ٱلۡجَمِيلَ
और हमने आसमानों और ज़मीन को और जो कुछ उन दोनों के दरमियान में है हिकमत व मसलहत से पैदा किया है और क़यामत यक़ीनन ज़रुर आने वाली है तो तुम (ऐ रसूल) उन काफिरों से शाइस्ता उनवान (अच्छे बरताव) के साथ दर गुज़र करो
Verse 86
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلۡخَلَّـٰقُ ٱلۡعَلِيمُ
इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बड़ा पैदा करने वाला है
Verse 87
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَـٰكَ سَبۡعًا مِّنَ ٱلۡمَثَانِى وَٱلۡقُرۡءَانَ ٱلۡعَظِيمَ
(बड़ा दाना व बीना है) और हमने तुमको सबए मसानी (सूरे हम्द) और क़ुरान अज़ीम अता किया है
Verse 88
لَا تَمُدَّنَّ عَيۡنَيۡكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعۡنَا بِهِۦۤ أَزۡوَٲجًا مِّنۡهُمۡ وَلَا تَحۡزَنۡ عَلَيۡہِمۡ وَٱخۡفِضۡ جَنَاحَكَ لِلۡمُؤۡمِنِينَ
और हमने जो उन कुफ्फारों में से कुछ लोगों को (दुनिया की) माल व दौलत से निहाल कर दिया है तुम उसकी तरफ हरगिज़ नज़र भी न उठाना और न उनकी (बेदीनी) पर कुछ अफसोस करना और ईमानदारों से (अगरचे ग़रीब हो) झुककर मिला करो और कहा दो कि मै तो (अज़ाबे ख़ुदा से) सरीही तौर से डराने वाला हूँ
Verse 89
وَقُلۡ إِنِّىٓ أَنَا ٱلنَّذِيرُ ٱلۡمُبِينُ
(ऐ रसूल) उन कुफ्फारों पर इस तरह अज़ाब नाज़िल करेगें जिस तरह हमने उन लोगों पर नाज़िल किया
Verse 90
كَمَآ أَنزَلۡنَا عَلَى ٱلۡمُقۡتَسِمِينَ
जिन्होंने क़ुरान को बॉट कर टुकडे टुकड़े कर डाला
Verse 91
ٱلَّذِينَ جَعَلُواْ ٱلۡقُرۡءَانَ عِضِينَ
(बाज़ को माना बाज को नहीं) तो ऐ रसूल तुम्हारे ही परवरदिगार की (अपनी) क़सम
Verse 92
فَوَرَبِّكَ لَنَسۡـَٔلَنَّهُمۡ أَجۡمَعِينَ
कि हम उनसे जो कुछ ये (दुनिया में) किया करते थे (बहुत सख्ती से) ज़रुर बाज़ पुर्स (पुछताछ) करेंगे
Verse 93
عَمَّا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
पस जिसका तुम्हें हुक्म दिया गया है उसे वाजेए करके सुना दो
Verse 94
فَٱصۡدَعۡ بِمَا تُؤۡمَرُ وَأَعۡرِضۡ عَنِ ٱلۡمُشۡرِكِينَ
और मुशरेकीन की तरफ से मुँह फेर लो
Verse 95
إِنَّا كَفَيۡنَـٰكَ ٱلۡمُسۡتَہۡزِءِينَ
जो लोग तुम्हारी हँसी उड़ाते है
Verse 96
ٱلَّذِينَ يَجۡعَلُونَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ ۚ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ
और ख़ुदा के साथ दूसरे परवरदिगार को (शरीक) ठहराते हैं हम तुम्हारी तरफ से उनके लिए काफी हैं तो अनक़रीब ही उन्हें मालूम हो जाएगा
Verse 97
وَلَقَدۡ نَعۡلَمُ أَنَّكَ يَضِيقُ صَدۡرُكَ بِمَا يَقُولُونَ
कि तुम जो इन (कुफ्फारों मुनाफिक़ीन) की बातों से दिल तंग होते हो उसको हम ज़रुर जानते हैं
Verse 98
فَسَبِّحۡ بِحَمۡدِ رَبِّكَ وَكُن مِّنَ ٱلسَّـٰجِدِينَ
तो तुम अपने परवरदिगार की हम्दो सना से उसकी तस्बीह करो और (उसकी बारगाह में) सजदा करने वालों में हो जाओ
Verse 99
وَٱعۡبُدۡ رَبَّكَ حَتَّىٰ يَأۡتِيَكَ ٱلۡيَقِينُ
और जब तक तुम्हारे पास मौत आए अपने परवरदिगार की इबादत में लगे रहो