Read calmly and use the previous/next links at the bottom to move through the surahs in order.
Quran Surah

Surah Al-A’raf

Quran Surah

Surah 7: Al-A’raf

الأعراف

Verse count: 206

Opening Bismillah

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं।

Verse 1

الٓمٓصٓ

अलिफ़ लाम मीम स्वाद

Verse 2

كِتَـٰبٌ أُنزِلَ إِلَيۡكَ فَلَا يَكُن فِى صَدۡرِكَ حَرَجٌ مِّنۡهُ لِتُنذِرَ بِهِۦ وَذِكۡرَىٰ لِلۡمُؤۡمِنِينَ

(ऐ रसूल) ये किताब ख़ुदा (क़ुरान) तुम पर इस ग़रज़ से नाज़िल की गई है ताकि तुम उसके ज़रिये से लोगों को अज़ाबे ख़ुदा से डराओ और ईमानदारों के लिए नसीहत का बायस हो

Verse 3

ٱتَّبِعُواْ مَآ أُنزِلَ إِلَيۡكُم مِّن رَّبِّكُمۡ وَلَا تَتَّبِعُواْ مِن دُونِهِۦۤ أَوۡلِيَآءَ ۗ قَلِيلاً مَّا تَذَكَّرُونَ

तुम्हारे दिल में उसकी वजह से कोई न तंगी पैदा हो (लोगों) जो तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल किया गया है उसकी पैरवी करो और उसके सिवा दूसरे (फर्ज़ी) बुतों (माबुदों) की पैरवी न करो

Verse 4

وَكَم مِّن قَرۡيَةٍ أَهۡلَكۡنَـٰهَا فَجَآءَهَا بَأۡسُنَا بَيَـٰتًا أَوۡ هُمۡ قَآٮِٕلُونَ

तुम लोग बहुत ही कम नसीहत क़ुबूल करते हो और क्या (तुम्हें) ख़बर नहीं कि ऐसी बहुत सी बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने हलाक कर डाला तो हमारा अज़ाब (ऐसे वक्त) आ पहुचा

Verse 5

فَمَا كَانَ دَعۡوَٮٰهُمۡ إِذۡ جَآءَهُم بَأۡسُنَآ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ إِنَّا كُنَّا ظَـٰلِمِينَ

कि वह लोग या तो रात की नींद सो रहे थे या दिन को क़लीला (खाने के बाद का लेटना) कर रहे थे तब हमारा अज़ाब उन पर आ पड़ा तो उनसे सिवाए इसके और कुछ न कहते बन पड़ा कि हम बेशक ज़ालिम थे

Verse 6

فَلَنَسۡـَٔلَنَّ ٱلَّذِينَ أُرۡسِلَ إِلَيۡهِمۡ وَلَنَسۡـَٔلَنَّ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

फिर हमने तो ज़रूर उन लोगों से जिनकी तरफ पैग़म्बर भेजे गये थे (हर चीज़ का) सवाल करेगें और ख़ुद पैग़म्बरों से भी ज़रूर पूछेगें

Verse 7

فَلَنَقُصَّنَّ عَلَيۡہِم بِعِلۡمٍ‌ ۖ وَمَا كُنَّا غَآٮِٕبِينَ

फिर हम उनसे हक़ीक़त हाल ख़ूब समझ बूझ के (ज़रा ज़रा) दोहराएगें

Verse 8

وَٱلۡوَزۡنُ يَوۡمَٮِٕذٍ ٱلۡحَقُّ ۚ فَمَن ثَقُلَتۡ مَوَٲزِينُهُ ۥ فَأُوْلَـٰٓٮِٕكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ

और हम कुछ ग़ायब तो थे नहीं और उस दिन (आमाल का) तौला जाना बिल्कुल ठीक है फिर तो जिनके (नेक अमाल के) पल्ले भारी होगें तो वही लोग फायज़ुलहराम (नजात पाये हुए) होगें

Verse 9

وَمَنۡ خَفَّتۡ مَوَٲزِينُهُ ۥ فَأُوْلَـٰٓٮِٕكَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَہُم بِمَا كَانُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا يَظۡلِمُونَ

(और जिनके नेक अमाल के) पल्ले हलके होगें तो उन्हीं लोगों ने हमारी आयत से नाफरमानी करने की वजह से यक़ीनन अपना आप नुक़सान किया

Verse 10

وَلَقَدۡ مَكَّنَّـٰڪُمۡ فِى ٱلۡأَرۡضِ وَجَعَلۡنَا لَكُمۡ فِيہَا مَعَـٰيِشَ ۗ قَلِيلاً مَّا تَشۡكُرُونَ

और (ऐ बनीआदम) हमने तो यक़ीनन तुमको ज़मीन में क़ुदरत व इख़तेदार दिया और उसमें तुम्हारे लिए असबाब ज़िन्दगी मुहय्या किए (मगर) तुम बहुत ही कम शुक्र करते हो

Verse 11

وَلَقَدۡ خَلَقۡنَـٰڪُمۡ ثُمَّ صَوَّرۡنَـٰكُمۡ ثُمَّ قُلۡنَا لِلۡمَلَـٰٓٮِٕكَةِ ٱسۡجُدُواْ لِأَدَمَ فَسَجَدُوٓاْ إِلَّآ إِبۡلِيسَ لَمۡ يَكُن مِّنَ ٱلسَّـٰجِدِينَ

हालाकि इसमें तो शक ही नहीं कि हमने तुम्हारे बाप आदम को पैदा किया फिर तुम्हारी सूरते बनायीं फिर हमनें फ़रिश्तों से कहा कि तुम सब के सब आदम को सजदा करो तो सब के सब झुक पड़े मगर शैतान कि वह सजदा करने वालों में शामिल न हुआ।

Verse 12

قَالَ مَا مَنَعَكَ أَلَّا تَسۡجُدَ إِذۡ أَمَرۡتُكَ‌ ۖ قَالَ أَنَا۟ خَيۡرٌ مِّنۡهُ خَلَقۡتَنِى مِن نَّارٍ وَخَلَقۡتَهُ ۥ مِن طِينٍ

ख़ुदा ने (शैतान से) फरमाया जब मैनें तुझे हुक्म दिया कि तू फिर तुझे सजदा करने से किसी ने रोका कहने लगा मैं उससे अफ़ज़ल हूँ (क्योंकि) तूने मुझे आग (ऐसे लतीफ अनसर) से पैदा किया

Verse 13

قَالَ فَٱهۡبِطۡ مِنۡہَا فَمَا يَكُونُ لَكَ أَن تَتَكَبَّرَ فِيہَا فَٱخۡرُجۡ إِنَّكَ مِنَ ٱلصَّـٰغِرِينَ

और उसको मिट्टी (ऐसी कशीफ़ अनसर) से पैदा किया ख़ुदा ने फरमाया (तुझको ये ग़ुरूर है) तो बेहश्त से नीचे उतर जाओ क्योंकि तेरी ये मजाल नहीं कि तू यहाँ रहकर ग़ुरूर करे तो यहाँ से (बाहर) निकल बेशक तू ज़लील लोगों से है

Verse 14

قَالَ أَنظِرۡنِىٓ إِلَىٰ يَوۡمِ يُبۡعَثُونَ

कहने लगा तो (ख़ैर) हमें उस दिन तक की (मौत से) मोहलत दे

Verse 15

قَالَ إِنَّكَ مِنَ ٱلۡمُنظَرِينَ

जिस दिन सारी ख़ुदाई के लोग दुबारा जिलाकर उठा खड़े किये जाएगें

Verse 16

قَالَ فَبِمَآ أَغۡوَيۡتَنِى لَأَقۡعُدَنَّ لَهُمۡ صِرَٲطَكَ ٱلۡمُسۡتَقِيمَ

फ़रमाया (अच्छा मंजूर) तुझे ज़रूर मोहलत दी गयी कहने लगा चूँकि तूने मेरी राह मारी तो मैं भी तेरी सीधी राह पर बनी आदम को (गुमराह करने के लिए) ताक में बैठूं तो सही

Verse 17

ثُمَّ لَأَتِيَنَّهُم مِّنۢ بَيۡنِ أَيۡدِيہِمۡ وَمِنۡ خَلۡفِهِمۡ وَعَنۡ أَيۡمَـٰنِہِمۡ وَعَن شَمَآٮِٕلِهِمۡ‌ ۖ وَلَا تَجِدُ أَكۡثَرَهُمۡ شَـٰكِرِينَ

फिर उन लोगों से और उनके पीछे से और उनके दाहिने से और उनके बाएं से (गरज़ हर तरफ से) उन पर आ पडूंगा और (उनको बहकाउंगा) और तू उन में से बहुतरों की शुक्रग़ुज़ार नहीं पायेगा

Verse 18

قَالَ ٱخۡرُجۡ مِنۡہَا مَذۡءُومًا مَّدۡحُورًا‌ ۖ لَّمَن تَبِعَكَ مِنۡہُمۡ لَأَمۡلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكُمۡ أَجۡمَعِينَ

ख़ुदा ने फरमाया यहाँ से बुरे हाल में (राइन्दा होकर निकल) (दूर) जा उन लोगों से जो तेरा कहा मानेगा तो मैं यक़ीनन तुम (और उन) सबको जहन्नुम में भर दूंगा

Verse 19

وَيَـٰٓـَٔادَمُ ٱسۡكُنۡ أَنتَ وَزَوۡجُكَ ٱلۡجَنَّةَ فَكُلَا مِنۡ حَيۡثُ شِئۡتُمَا وَلَا تَقۡرَبَا هَـٰذِهِ ٱلشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ ٱلظَّـٰلِمِينَ

और (आदम से कहा) ऐ आदम तुम और तुम्हारी बीबी (दोनों) बेहश्त में रहा सहा करो और जहाँ से चाहो खाओ (पियो) मगर (ख़बरदार) उस दरख्त के करीब न जाना वरना तुम अपना आप नुक़सान करोगे

Verse 20

فَوَسۡوَسَ لَهُمَا ٱلشَّيۡطَـٰنُ لِيُبۡدِىَ لَهُمَا مَا وُ ۥرِىَ عَنۡہُمَا مِن سَوۡءَٲتِهِمَا وَقَالَ مَا نَہَٮٰكُمَا رَبُّكُمَا عَنۡ هَـٰذِهِ ٱلشَّجَرَةِ إِلَّآ أَن تَكُونَا مَلَكَيۡنِ أَوۡ تَكُونَا مِنَ ٱلۡخَـٰلِدِينَ

फिर शैतान ने उन दोनों को वसवसा (शक) दिलाया ताकि (नाफरमानी की वजह से) उनके अस्तर की चीज़े जो उनकी नज़र से बेहश्ती लिबास की वजह से पोशीदा थी खोल डाले कहने लगा कि तुम्हारे परवरदिगार ने दोनों को दरख्त (के फल खाने) से सिर्फ इसलिए मना किया है (कि मुबादा) तुम दोनों फरिश्ते बन जाओ या हमेशा (ज़िन्दा) रह जाओ

Verse 21

وَقَاسَمَهُمَآ إِنِّى لَكُمَا لَمِنَ ٱلنَّـٰصِحِينَ

और उन दोनों के सामने क़समें खायीं कि मैं यक़ीनन तुम्हारा ख़ैर ख्वाह हूँ

Verse 22

فَدَلَّٮٰهُمَا بِغُرُورٍ ۚ فَلَمَّا ذَاقَا ٱلشَّجَرَةَ بَدَتۡ لَهُمَا سَوۡءَٲتُہُمَا وَطَفِقَا يَخۡصِفَانِ عَلَيۡہِمَا مِن وَرَقِ ٱلۡجَنَّةِ‌ ۖ وَنَادَٮٰهُمَا رَبُّہُمَآ أَلَمۡ أَنۡہَكُمَا عَن تِلۡكُمَا ٱلشَّجَرَةِ وَأَقُل لَّكُمَآ إِنَّ ٱلشَّيۡطَـٰنَ لَكُمَا عَدُوٌّ مُّبِينٌ

ग़रज़ धोखे से उन दोनों को उस (के खाने) की तरफ ले गया ग़रज़ जो ही उन दोनों ने इस दरख्त (के फल) को चखा कि (बेहश्ती लिबास गिर गया और समझ पैदा हुई) उन पर उनकी शर्मगाहें ज़ाहिर हो गयीं और बेहश्त के पत्ते (तोड़ जोड़ कर) अपने ऊपर ढापने लगे तब उनको परवरदिगार ने उनको आवाज़ दी कि क्यों मैंने तुम दोनों को इस दरख्त के पास (जाने) से मना नहीं किया था और (क्या) ये न जता दिया था कि शैतान तुम्हारा यक़ीनन खुला हुआ दुश्मन है

Verse 23

قَالَا رَبَّنَا ظَلَمۡنَآ أَنفُسَنَا وَإِن لَّمۡ تَغۡفِرۡ لَنَا وَتَرۡحَمۡنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡخَـٰسِرِينَ

ये दोनों अर्ज क़रने लगे ऐ हमारे पालने वाले हमने अपना आप नुकसान किया और अगर तू हमें माफ न फरमाएगा और हम पर रहम न करेगा तो हम बिल्कुल घाटे में ही रहेगें

Verse 24

قَالَ ٱهۡبِطُواْ بَعۡضُكُمۡ لِبَعۡضٍ عَدُوٌّ‌ ۖ وَلَكُمۡ فِى ٱلۡأَرۡضِ مُسۡتَقَرٌّ وَمَتَـٰعٌ إِلَىٰ حِينٍ

हुक्म हुआ तुम (मियां बीबी शैतान) सब के सब बेहशत से नीचे उतरो तुममें से एक का एक दुश्मन है और (एक ख़ास) वक्त तक तुम्हारा ज़मीन में ठहराव (ठिकाना) और ज़िन्दगी का सामना है

Verse 25

قَالَ فِيہَا تَحۡيَوۡنَ وَفِيهَا تَمُوتُونَ وَمِنۡہَا تُخۡرَجُونَ

ख़ुदा ने (ये भी) फरमाया कि तुम ज़मीन ही में जिन्दगी बसर करोगे और इसी में मरोगे

Verse 26

يَـٰبَنِىٓ ءَادَمَ قَدۡ أَنزَلۡنَا عَلَيۡكُمۡ لِبَاسًا يُوَٲرِى سَوۡءَٲتِكُمۡ وَرِيشًا‌ ۖ وَلِبَاسُ ٱلتَّقۡوَىٰ ذَٲلِكَ خَيۡرٌ ۚ ذَٲلِكَ مِنۡ ءَايَـٰتِ ٱللَّهِ لَعَلَّهُمۡ يَذَّكَّرُونَ

और उसी में से (और) उसी में से फिर दोबारा तुम ज़िन्दा करके निकाले जाओगे ऐ आदम की औलाद हमने तुम्हारे लिए पोशाक नाज़िल की जो तुम्हारे शर्मगाहों को छिपाती है और ज़ीनत के लिए कपड़े और इसके अलावा परहेज़गारी का लिबास है और ये सब (लिबासों) से बेहतर है ये (लिबास) भी ख़ुदा (की कुदरत) की निशानियों से है

Verse 27

يَـٰبَنِىٓ ءَادَمَ لَا يَفۡتِنَنَّڪُمُ ٱلشَّيۡطَـٰنُ كَمَآ أَخۡرَجَ أَبَوَيۡكُم مِّنَ ٱلۡجَنَّةِ يَنزِعُ عَنۡہُمَا لِبَاسَہُمَا لِيُرِيَهُمَا سَوۡءَٲتِہِمَآ ۗ إِنَّهُ ۥ يَرَٮٰكُمۡ هُوَ وَقَبِيلُهُ ۥ مِنۡ حَيۡثُ لَا تَرَوۡنَہُمۡ ۗ إِنَّا جَعَلۡنَا ٱلشَّيَـٰطِينَ أَوۡلِيَآءَ لِلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ

ताकि लोग नसीहत व इबरत हासिल करें ऐ औलादे आदम (होशियार रहो) कहीं तुम्हें शैतान बहका न दे जिस तरह उसने तुम्हारे बाप माँ आदम व हव्वा को बेहश्त से निकलवा छोड़ा उसी ने उन दोनों से (बेहश्ती) पोशाक उतरवाई ताकि उन दोनों को उनकी शर्मगाहें दिखा दे वह और उसका क़ुनबा ज़रूर तुम्हें इस तरह देखता रहता है कि तुम उन्हे नहीं देखने पाते हमने शैतानों को उन्हीं लोगों का रफीक़ क़रार दिया है

Verse 28

وَإِذَا فَعَلُواْ فَـٰحِشَةً قَالُواْ وَجَدۡنَا عَلَيۡہَآ ءَابَآءَنَا وَٱللَّهُ أَمَرَنَا بِہَا ۗ قُلۡ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَأۡمُرُ بِٱلۡفَحۡشَآءِ‌ ۖ أَتَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

जो ईमान नही रखते और वह लोग जब कोई बुरा काम करते हैं कि हमने उस तरीके पर अपने बाप दादाओं को पाया और ख़ुदा ने (भी) यही हुक्म दिया है (ऐ रसूल) तुम साफ कह दो कि ख़ुदा ने (भी) यही हुक्म दिया है (ऐ रसूल) तुम (साफ) कह दो कि ख़ुदा हरगिज़ बुरे काम का हुक्म नहीं देता क्या तुम लोग ख़ुदा पर (इफ्तिरा करके) वह बातें कहते हो जो तुम नहीं जानते

Verse 29

قُلۡ أَمَرَ رَبِّى بِٱلۡقِسۡطِ‌ ۖ وَأَقِيمُواْ وُجُوهَكُمۡ عِندَ ڪُلِّ مَسۡجِدٍ وَٱدۡعُوهُ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَ ۚ كَمَا بَدَأَكُمۡ تَعُودُونَ

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरे परवरदिगार ने तो इन्साफ का हुक्म दिया है और (ये भी क़रार दिया है कि) हर नमाज़ के वक्त अपने अपने मुँह (क़िबले की तरफ़) सीधे कर लिया करो और इसके लिए निरी खरी इबादत करके उससे दुआ मांगो जिस तरह उसने तुम्हें शुरू शुरू पैदा किया था

Verse 30

فَرِيقًا هَدَىٰ وَفَرِيقًا حَقَّ عَلَيۡہِمُ ٱلضَّلَـٰلَةُ ۗ إِنَّهُمُ ٱتَّخَذُواْ ٱلشَّيَـٰطِينَ أَوۡلِيَآءَ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَيَحۡسَبُونَ أَنَّہُم مُّهۡتَدُونَ

उसी तरह फिर (दोबारा) ज़िन्दा किये जाओगे उसी ने एक फरीक़ की हिदायत की और एक गिरोह (के सर) पर गुमराही सवार हो गई उन लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर शैतानों को अपना सरपरस्त बना लिया और बावजूद उसके गुमराह करते हैं कि वह राह रास्ते पर है

Verse 31

۞ يَـٰبَنِىٓ ءَادَمَ خُذُواْ زِينَتَكُمۡ عِندَ كُلِّ مَسۡجِدٍ وَڪُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ وَلَا تُسۡرِفُوٓاْ ۚ إِنَّهُ ۥ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُسۡرِفِينَ

ऐ औलाद आदम हर नमाज़ के वक्त बन सवर के निखर जाया करो और खाओ और पियो और फिज़ूल ख़र्ची मत करो (क्योंकि) ख़ुदा फिज़ूल ख़र्च करने वालों को दोस्त नहीं रखता

Verse 32

قُلۡ مَنۡ حَرَّمَ زِينَةَ ٱللَّهِ ٱلَّتِىٓ أَخۡرَجَ لِعِبَادِهِۦ وَٱلطَّيِّبَـٰتِ مِنَ ٱلرِّزۡقِ ۚ قُلۡ هِىَ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ فِى ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا خَالِصَةً يَوۡمَ ٱلۡقِيَـٰمَةِ ۗ كَذَٲلِكَ نُفَصِّلُ ٱلۡأَيَـٰتِ لِقَوۡمٍ يَعۡلَمُونَ

(ऐ रसूल से) पूछो तो कि जो ज़ीनत (के साज़ों सामान) और खाने की साफ सुथरी चीज़ें ख़ुदा ने अपने बन्दो के वास्ते पैदा की हैं किसने हराम कर दी तुम ख़ुद कह दो कि सब पाक़ीज़ा चीज़े क़यामत के दिन उन लोगों के लिए ख़ास हैं जो दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में ईमान लाते थे हम यूँ अपनी आयतें समझदार लोगों के वास्ते तफसीलदार बयान करतें हैं

Verse 33

قُلۡ إِنَّمَا حَرَّمَ رَبِّىَ ٱلۡفَوَٲحِشَ مَا ظَهَرَ مِنۡہَا وَمَا بَطَنَ وَٱلۡإِثۡمَ وَٱلۡبَغۡىَ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّ وَأَن تُشۡرِكُواْ بِٱللَّهِ مَا لَمۡ يُنَزِّلۡ بِهِۦ سُلۡطَـٰنًا وَأَن تَقُولُواْ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

(ऐ रसूल) तुम साफ कह दो कि हमारे परवरदिगार ने तो तमाम बदकारियों को ख्वाह (चाहे) ज़ाहिरी हो या बातिनी और गुनाह और नाहक़ ज्यादती करने को हराम किया है और इस बात को कि तुम किसी को ख़ुदा का शरीक बनाओ जिनकी उनसे कोई दलील न ही नाज़िल फरमाई और ये भी कि बे समझे बूझे ख़ुदा पर बोहतान बॉधों

Verse 34

وَلِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌ‌ ۖ فَإِذَا جَآءَ أَجَلُهُمۡ لَا يَسۡتَأۡخِرُونَ سَاعَةً‌ ۖ وَلَا يَسۡتَقۡدِمُونَ

और हर गिरोह (के न पैदा होने) का एक ख़ास वक्त है फिर जब उनका वक्त आ पहुंचता है तो न एक घड़ी पीछे रह सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं

Verse 35

يَـٰبَنِىٓ ءَادَمَ إِمَّا يَأۡتِيَنَّكُمۡ رُسُلٌ مِّنكُمۡ يَقُصُّونَ عَلَيۡكُمۡ ءَايَـٰتِى‌ ۙ فَمَنِ ٱتَّقَىٰ وَأَصۡلَحَ فَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡہِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ

ऐ औलादे आदम जब तुम में के (हमारे) पैग़म्बर तुम्हारे पास आए और तुमसे हमारे एहकाम बयान करे तो (उनकी इताअत करना क्योंकि जो शख्स परहेज़गारी और नेक काम करेगा तो ऐसे लोगों पर न तो (क़यामत में) कोई ख़ौफ़ होगा और न वह आर्ज़दा ख़ातिर (परेशान) होंगे

Verse 36

وَٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا وَٱسۡتَكۡبَرُواْ عَنۡہَآ أُوْلَـٰٓٮِٕكَ أَصۡحَـٰبُ ٱلنَّارِ‌ ۖ هُمۡ فِيہَا خَـٰلِدُونَ

और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उनसे सरताबी कर बैठे वह लोग जहन्नुमी हैं कि वह उसमें हमेशा रहेगें

Verse 37

فَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا أَوۡ كَذَّبَ بِـَٔايَـٰتِهِۦۤ ۚ أُوْلَـٰٓٮِٕكَ يَنَالُهُمۡ نَصِيبُہُم مِّنَ ٱلۡكِتَـٰبِ‌ ۖ حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَتۡہُمۡ رُسُلُنَا يَتَوَفَّوۡنَہُمۡ قَالُوٓاْ أَيۡنَ مَا كُنتُمۡ تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ‌ ۖ قَالُواْ ضَلُّواْ عَنَّا وَشَہِدُواْ عَلَىٰٓ أَنفُسِہِمۡ أَنَّہُمۡ كَانُواْ كَـٰفِرِينَ

तो जो शख्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या उसकी आयतों को झुठलाए उससे बढ़कर ज़ालिम और कौन होगा फिर तो वह लोग हैं जिन्हें उनकी (तक़दीर) का लिखा हिस्सा (रिज़क) वग़ैरह मिलता रहेगा यहाँ तक कि जब हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) उनके पास आकर उनकी रूह कब्ज़ करेगें तो (उनसे) पूछेगें कि जिन्हें तुम ख़ुदा को छोड़कर पुकारा करते थे अब वह (कहाँ हैं तो वह कुफ्फार) जवाब देगें कि वह सब तो हमें छोड़ कर चल चंपत हुए और अपने खिलाफ आप गवाही देगें कि वह बेशक काफ़िर थे

Verse 38

قَالَ ٱدۡخُلُواْ فِىٓ أُمَمٍ قَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلِڪُم مِّنَ ٱلۡجِنِّ وَٱلۡإِنسِ فِى ٱلنَّارِ‌ ۖ كُلَّمَا دَخَلَتۡ أُمَّةٌ لَّعَنَتۡ أُخۡتَہَا‌ ۖ حَتَّىٰٓ إِذَا ٱدَّارَڪُواْ فِيہَا جَمِيعًا قَالَتۡ أُخۡرَٮٰهُمۡ لِأُولَٮٰهُمۡ رَبَّنَا هَـٰٓؤُلَآءِ أَضَلُّونَا فَـَٔاتِہِمۡ عَذَابًا ضِعۡفًا مِّنَ ٱلنَّارِ‌ ۖ قَالَ لِكُلٍّ ضِعۡفٌ وَلَـٰكِن لَّا تَعۡلَمُونَ

(तब ख़ुदा उनसे) फरमाएगा कि जो लोग जिन व इन्स के तुम से पहले बसे हैं उन्हीं में मिलजुल कर तुम भी जहन्नुम वासिल हो जाओ (और ) अहले जहन्नुम का ये हाल होगा कि जब उसमें एक गिरोह दाख़िल होगा तो अपने साथी दूसरे गिरोह पर लानत करेगा यहाँ तक कि जब सब के सब पहुंच जाएगें तो उनमें की पिछली जमात अपने से पहली जमाअत के वास्ते बदद्आ करेगी कि परवरदिगार उन्हीं लोगों ने हमें गुमराह किया था तो उन पर जहन्नुम का दोगुना अज़ाब फरमा (इस पर) ख़ुदा फरमाएगा कि हर एक के वास्ते दो गुना अज़ाब है लेकिन (तुम पर) तुफ़ है तुम जानते नहीं

Verse 39

وَقَالَتۡ أُولَٮٰهُمۡ لِأُخۡرَٮٰهُمۡ فَمَا كَانَ لَكُمۡ عَلَيۡنَا مِن فَضۡلٍ فَذُوقُواْ ٱلۡعَذَابَ بِمَا كُنتُمۡ تَكۡسِبُونَ

और उनमें से पहली जमाअत पिछली जमाअत की तरफ मुख़ातिब होकर कहेगी कि अब तो तुमको हमपर कोई फज़ीलत न रही पस (हमारी तरह) तुम भी अपने करतूत की बदौलत अज़ाब (के मज़े) चखो बेशक जिन लोगों ने हमारे आयात को झुठलाया

Verse 40

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا وَٱسۡتَكۡبَرُواْ عَنۡہَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمۡ أَبۡوَٲبُ ٱلسَّمَآءِ وَلَا يَدۡخُلُونَ ٱلۡجَنَّةَ حَتَّىٰ يَلِجَ ٱلۡجَمَلُ فِى سَمِّ ٱلۡخِيَاطِ ۚ وَڪَذَٲلِكَ نَجۡزِى ٱلۡمُجۡرِمِينَ

और उनसे सरताबी की न उनके लिए आसमान के दरवाज़े खोले जाएंगें और वह बेहश्त ही में दाखिल होने पाएगें यहाँ तक कि ऊँट सूई के नाके में होकर निकल जाए (यानि जिस तरह ये मुहाल है) उसी तरह उनका बेहश्त में दाखिल होना मुहाल है और हम मुजरिमों को ऐसी ही सज़ा दिया करते हैं उनके लिए जहन्नुम (की आग) का बिछौना होगा

Verse 41

لَهُم مِّن جَهَنَّمَ مِهَادٌ وَمِن فَوۡقِهِمۡ غَوَاشٍ ۚ وَكَذَٲلِكَ نَجۡزِى ٱلظَّـٰلِمِينَ

और उनके ऊपर से (आग ही का) ओढ़ना भी और हम ज़ालिमों को ऐसी ही सज़ा देते हैं और जिन लोगों ने ईमान कुबुल किया

Verse 42

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَا نُكَلِّفُ نَفۡسًا إِلَّا وُسۡعَهَآ أُوْلَـٰٓٮِٕكَ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡجَنَّةِ‌ ۖ هُمۡ فِيہَا خَـٰلِدُونَ

और अच्छे अच्छे काम किये और हम तो किसी शख्स को उसकी ताकत से ज्यादा तकलीफ देते ही नहीं यहीं लोग जन्नती हैं कि वह हमेशा जन्नत ही में रहा (सहा) करेगें

Verse 43

وَنَزَعۡنَا مَا فِى صُدُورِهِم مِّنۡ غِلٍّ تَجۡرِى مِن تَحۡتِہِمُ ٱلۡأَنۡہَـٰرُ‌ ۖ وَقَالُواْ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى هَدَٮٰنَا لِهَـٰذَا وَمَا كُنَّا لِنَہۡتَدِىَ لَوۡلَآ أَنۡ هَدَٮٰنَا ٱللَّهُ‌ ۖ لَقَدۡ جَآءَتۡ رُسُلُ رَبِّنَا بِٱلۡحَقِّ‌ ۖ وَنُودُوٓاْ أَن تِلۡكُمُ ٱلۡجَنَّةُ أُورِثۡتُمُوهَا بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

और उन लोगों के दिल में जो कुछ (बुग़ज़ व कीना) होगा वह सब हम निकाल (बाहर कर) देगें उनके महलों के नीचे नहरें जारी होगीं और कहते होगें शुक्र है उस ख़ुदा का जिसने हमें इस (मंज़िले मक़सूद) तक पहुंचाया और अगर ख़ुदा हमें यहाँ न पहुंचाता तो हम किसी तरह यहाँ न पहुंच सकते बेशक हमारे परवरदिगार के पैग़म्बर दीने हक़ लेकर आये थे और उन लोगों से पुकार कर कह दिया जाएगा कि वह बेहिश्त हैं जिसके तुम अपनी कारग़ुज़ारियों की जज़ा में वारिस व मालिक बनाए गये हों

Verse 44

وَنَادَىٰٓ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡجَنَّةِ أَصۡحَـٰبَ ٱلنَّارِ أَن قَدۡ وَجَدۡنَا مَا وَعَدَنَا رَبُّنَا حَقًّا فَهَلۡ وَجَدتُّم مَّا وَعَدَ رَبُّكُمۡ حَقًّا‌ ۖ قَالُواْ نَعَمۡ ۚ فَأَذَّنَ مُؤَذِّنُۢ بَيۡنَہُمۡ أَن لَّعۡنَةُ ٱللَّهِ عَلَى ٱلظَّـٰلِمِينَ

और जन्नती लोग जहन्नुमी वालों से पुकार कर कहेगें हमने तो बेशक जो हमारे परवरदिगार ने हमसे वायदा किया था ठीक ठीक पा लिया तो क्या तुमने भी जो तुमसे तम्हारे परवरदिगार ने वायदा किया था ठीक पाया (या नहीं) अहले जहन्नुम कहेगें हाँ (पाया) एक मुनादी उनके दरमियान निदा करेगा कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की लानत है

Verse 45

ٱلَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَيَبۡغُونَہَا عِوَجًا وَهُم بِٱلۡأَخِرَةِ كَـٰفِرُونَ

जो ख़ुदा की राह से लोगों को रोकते थे और उसमें (ख्वामख्वाह) कज़ी (टेढ़ापन) करना चाहते थे और वह रोज़े आख़ेरत से इन्कार करते थे

Verse 46

وَبَيۡنَہُمَا حِجَابٌ ۚ وَعَلَى ٱلۡأَعۡرَافِ رِجَالٌ يَعۡرِفُونَ كُلاَّۢ بِسِيمَٮٰهُمۡ ۚ وَنَادَوۡاْ أَصۡحَـٰبَ ٱلۡجَنَّةِ أَن سَلَـٰمٌ عَلَيۡكُمۡ ۚ لَمۡ يَدۡخُلُوهَا وَهُمۡ يَطۡمَعُونَ

और बेहश्त व दोज़ख के दरमियान एक हद फ़ासिल है और कुछ लोग आराफ़ पर होगें जो हर शख्स को (बेहिश्ती हो या जहन्नुमी) उनकी पेशानी से पहचान लेगें और वह जन्नत वालों को आवाज़ देगें कि तुम पर सलाम हो या (आराफ़ वाले) लोग अभी दाख़िले जन्नत नहीं हुए हैं मगर वह तमन्ना ज़रूर रखते हैं

Verse 47

۞ وَإِذَا صُرِفَتۡ أَبۡصَـٰرُهُمۡ تِلۡقَآءَ أَصۡحَـٰبِ ٱلنَّارِ قَالُواْ رَبَّنَا لَا تَجۡعَلۡنَا مَعَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ

और जब उनकी निगाहें पलटकर जहन्नुमी लोगों की तरफ जा पड़ेगीं (तो उनकी ख़राब हालत देखकर ख़ुदा से अर्ज़ करेगें) ऐ हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना

Verse 48

وَنَادَىٰٓ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡأَعۡرَافِ رِجَالاً يَعۡرِفُونَہُم بِسِيمَٮٰهُمۡ قَالُواْ مَآ أَغۡنَىٰ عَنكُمۡ جَمۡعُكُمۡ وَمَا كُنتُمۡ تَسۡتَكۡبِرُونَ

और आराफ वाले कुछ (जहन्नुमी) लोगों को जिन्हें उनका चेहरा देखकर पहचान लेगें आवाज़ देगें और और कहेगें अब न तो तुम्हारा जत्था ही तुम्हारे काम आया और न तुम्हारी शेखी बाज़ी ही (सूद मन्द हुई)

Verse 49

أَهَـٰٓؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ أَقۡسَمۡتُمۡ لَا يَنَالُهُمُ ٱللَّهُ بِرَحۡمَةٍ ۚ ٱدۡخُلُواْ ٱلۡجَنَّةَ لَا خَوۡفٌ عَلَيۡكُمۡ وَلَآ أَنتُمۡ تَحۡزَنُونَ

जो तुम दुनिया में किया करते थे यही लोग वह हैं जिनकी निस्बत तुम कसमें खाया करते थे कि उन पर ख़ुदा (अपनी) रहमत न करेगा (देखो आज वही लोग हैं जिनसे कहा गया कि बेतकल्लुफ) बेहश्त में चलो जाओ न तुम पर कोई खौफ है और न तुम किसी तरह आर्ज़ुदा ख़ातिर परेशानी होगी

Verse 50

وَنَادَىٰٓ أَصۡحَـٰبُ ٱلنَّارِ أَصۡحَـٰبَ ٱلۡجَنَّةِ أَنۡ أَفِيضُواْ عَلَيۡنَا مِنَ ٱلۡمَآءِ أَوۡ مِمَّا رَزَقَڪُمُ ٱللَّهُ ۚ قَالُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ حَرَّمَهُمَا عَلَى ٱلۡكَـٰفِرِينَ

और दोज़ख वाले अहले बेहिश्त को (लजाजत से) आवाज़ देगें कि हम पर थोड़ा सा पानी ही उंडेल दो या जो (नेअमतों) खुदा ने तुम्हें दी है उसमें से कुछ (दे डालो दो तो अहले बेहिश्त जवाब में) कहेंगें कि ख़ुदा ने तो जन्नत का खाना पानी काफिरों पर कतई हराम कर दिया है

Verse 51

ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ دِينَهُمۡ لَهۡوًا وَلَعِبًا وَغَرَّتۡهُمُ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا ۚ فَٱلۡيَوۡمَ نَنسَٮٰهُمۡ ڪَمَا نَسُواْ لِقَآءَ يَوۡمِهِمۡ هَـٰذَا وَمَا ڪَانُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا يَجۡحَدُونَ

जिन लोगों ने अपने दीन को खेल तमाशा बना लिया था और दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी ने उनको फरेब दिया था तो हम भी आज (क़यामत में) उन्हें (क़सदन) भूल जाएगें

Verse 52

وَلَقَدۡ جِئۡنَـٰهُم بِكِتَـٰبٍ فَصَّلۡنَـٰهُ عَلَىٰ عِلۡمٍ هُدًى وَرَحۡمَةً لِّقَوۡمٍ يُؤۡمِنُونَ

जिस तरह यह लोग (हमारी) आज की हुज़ूरी को भूलें बैठे थे और हमारी आयतों से इन्कार करते थे हालांकि हमने उनके पास (रसूल की मारफत किताब भी भेज दी है)

Verse 53

هَلۡ يَنظُرُونَ إِلَّا تَأۡوِيلَهُ ۥ ۚ يَوۡمَ يَأۡتِى تَأۡوِيلُهُ ۥ يَقُولُ ٱلَّذِينَ نَسُوهُ مِن قَبۡلُ قَدۡ جَآءَتۡ رُسُلُ رَبِّنَا بِٱلۡحَقِّ فَهَل لَّنَا مِن شُفَعَآءَ فَيَشۡفَعُواْ لَنَآ أَوۡ نُرَدُّ فَنَعۡمَلَ غَيۡرَ ٱلَّذِى كُنَّا نَعۡمَلُ ۚ قَدۡ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَہُمۡ وَضَلَّ عَنۡہُم مَّا ڪَانُواْ يَفۡتَرُونَ

जिसे हर तरह समझ बूझ के तफसीलदार बयान कर दिया है (और वह) ईमानदार लोगों के लिए हिदायत और रहमत है क्या ये लोग बस सिर्फ अन्जाम (क़यामत ही) के मुन्तज़िर है (हालांकि) जिस दिन उसके अन्जाम का (वक्त) आ जाएगा तो जो लोग उसके पहले भूले बैठे थे (बेसाख्ता) बोल उठेगें कि बेशक हमारे परवरदिगार के सब रसूल हक़ लेकर आये थे तो क्या उस वक्त हमारी भी सिफरिश करने वाले हैं जो हमारी सिफारिश करें या हम फिर (दुनिया में) लौटाएं जाएं तो जो जो काम हम करते थे उसको छोड़कर दूसरें काम करें

Verse 54

إِنَّ رَبَّكُمُ ٱللَّهُ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٲتِ وَٱلۡأَرۡضَ فِى سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰ عَلَى ٱلۡعَرۡشِ يُغۡشِى ٱلَّيۡلَ ٱلنَّہَارَ يَطۡلُبُهُ ۥ حَثِيثًا وَٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَ وَٱلنُّجُومَ مُسَخَّرَٲتِۭ بِأَمۡرِهِۦۤ ۗ أَلَا لَهُ ٱلۡخَلۡقُ وَٱلۡأَمۡرُ ۗ تَبَارَكَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلۡعَـٰلَمِينَ

बेशक उन लोगों ने अपना सख्त घाटा किया और जो इफ़तेरा परदाज़िया किया करते थे वह सब गायब (ग़ल्ला) हो गयीं बेशक तुम्हारा परवरदिगार ख़ुदा ही है जिसके (सिर्फ) 6 दिनों में आसमान और ज़मीन को पैदा किया फिर अर्श के बनाने पर आमादा हुआ वही रात को दिन का लिबास पहनाता है तो (गोया) रात दिन को पीछे पीछे तेज़ी से ढूंढती फिरती है और उसी ने आफ़ताब और माहताब और सितारों को पैदा किया कि ये सब के सब उसी के हुक्म के ताबेदार हैं

Verse 55

ٱدۡعُواْ رَبَّكُمۡ تَضَرُّعًا وَخُفۡيَةً ۚ إِنَّهُ ۥ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُعۡتَدِينَ

देखो हुकूमत और पैदा करना बस ख़ास उसी के लिए है वह ख़ुदा जो सारे जहाँन का परवरदिगार बरक़त वाला है

Verse 56

وَلَا تُفۡسِدُواْ فِى ٱلۡأَرۡضِ بَعۡدَ إِصۡلَـٰحِهَا وَٱدۡعُوهُ خَوۡفًا وَطَمَعًا ۚ إِنَّ رَحۡمَتَ ٱللَّهِ قَرِيبٌ مِّنَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

(लोगों) अपने परवरदिगार से गिड़गिड़ाकर और चुपके – चुपके दुआ करो, वह हद से तजाविज़ करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता और ज़मीन में असलाह के बाद फसाद न करते फिरो और (अज़ाब) के ख़ौफ से और (रहमत) की आस लगा के ख़ुदा से दुआ मांगो

Verse 57

وَهُوَ ٱلَّذِى يُرۡسِلُ ٱلرِّيَـٰحَ بُشۡرَۢا بَيۡنَ يَدَىۡ رَحۡمَتِهِۦ‌ ۖ حَتَّىٰٓ إِذَآ أَقَلَّتۡ سَحَابًا ثِقَالاً سُقۡنَـٰهُ لِبَلَدٍ مَّيِّتٍ فَأَنزَلۡنَا بِهِ ٱلۡمَآءَ فَأَخۡرَجۡنَا بِهِۦ مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٲتِ ۚ كَذَٲلِكَ نُخۡرِجُ ٱلۡمَوۡتَىٰ لَعَلَّكُمۡ تَذَڪَّرُونَ

(क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब है और वही तो (वह) ख़ुदा है जो अपनी रहमत (अब्र) से पहले खुशखबरी देने वाली हवाओ को भेजता है यहाँ तक कि जब हवाएं (पानी से भरे) बोझल बादलों के ले उड़े तो हम उनको किसी शहर की की तरफ (जो पानी का नायाबी (कमी) से गोया) मर चुका था हॅका दिया फिर हमने उससे पानी बरसाया, फिर हमने उससे हर तरह के फल ज़मीन से निकाले

Verse 58

وَٱلۡبَلَدُ ٱلطَّيِّبُ يَخۡرُجُ نَبَاتُهُ ۥ بِإِذۡنِ رَبِّهِۦ‌ ۖ وَٱلَّذِى خَبُثَ لَا يَخۡرُجُ إِلَّا نَكِدًا ۚ ڪَذَٲلِكَ نُصَرِّفُ ٱلۡأَيَـٰتِ لِقَوۡمٍ يَشۡكُرُونَ

हम यूं ही (क़यामत के दिन ज़मीन से) मुर्दों को निकालेंगें ताकि तुम लोग नसीहत व इबरत हासिल करो और उम्दा ज़मीन उसके परवरदिगार के हुक्म से उस सब्ज़ा (अच्छा ही) है और जो ज़मीन बड़ी है उसकी पैदावार ख़राब ही होती है

Verse 59

لَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦ فَقَالَ يَـٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَـٰهٍ غَيۡرُهُ ۥۤ إِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيۡكُمۡ عَذَابَ يَوۡمٍ عَظِيمٍ

हम यू अपनी आयतों को उलेटफेर कर शुक्रग़ुजार लोगों के वास्ते बयान करते हैं बेशक हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (रसूल बनाकर) भेजा तो उन्होनें (लोगों से ) कहाकि ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की ही इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है और मैं तुम्हारी निस्बत (क़यामत जैसे) बड़े ख़ौफनाक दिन के अज़ाब से डरता हूँ

Verse 60

قَالَ ٱلۡمَلَأُ مِن قَوۡمِهِۦۤ إِنَّا لَنَرَٮٰكَ فِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ

तो उनकी क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा हम तो यक़ीनन देखते हैं कि तुम खुल्लम खुल्ला गुमराही में (पड़े) हो

Verse 61

قَالَ يَـٰقَوۡمِ لَيۡسَ بِى ضَلَـٰلَةٌ وَلَـٰكِنِّى رَسُولٌ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَـٰلَمِينَ

तब नूह ने कहा कि ऐ मेरी क़ौम मुझ में गुमराही (वग़ैरह) तो कुछ नहीं बल्कि मैं तो परवरदिगारे आलम की तरफ से रसूल हूँ

Verse 62

أُبَلِّغُكُمۡ رِسَـٰلَـٰتِ رَبِّى وَأَنصَحُ لَكُمۡ وَأَعۡلَمُ مِنَ ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

तुम तक अपने परवरदिगार के पैग़ामात पहुचाएं देता हूँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी ख़ैर ख्वाही करता हूँ और ख़ुदा की तरफ से जो बातें मै जानता हूँ तुम नहीं जानते

Verse 63

أَوَعَجِبۡتُمۡ أَن جَآءَكُمۡ ذِكۡرٌ مِّن رَّبِّكُمۡ عَلَىٰ رَجُلٍ مِّنكُمۡ لِيُنذِرَكُمۡ وَلِتَتَّقُواْ وَلَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ

क्या तुम्हें उस बात पर ताअज्जुब है कि तुम्हारे पास तुम्ही में से एक मर्द (आदमी) के ज़रिए से तुम्हारे परवरदिगार का ज़िक्र (हुक्म) आया है ताकि वह तुम्हें (अज़ाब से) डराए और ताकि तुम परहेज़गार बनों और ताकि तुम पर रहम किया जाए

Verse 64

فَكَذَّبُوهُ فَأَنجَيۡنَـٰهُ وَٱلَّذِينَ مَعَهُ ۥ فِى ٱلۡفُلۡكِ وَأَغۡرَقۡنَا ٱلَّذِينَ ڪَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَآ ۚ إِنَّہُمۡ ڪَانُواْ قَوۡمًا عَمِينَ

इस पर भी लोगों ने उनकों झुठला दिया तब हमने उनको और जो लोग उनके साथ कश्ती में थे बचा लिया और बाक़ी जितने लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था सबको डुबो मारा ये सब के सब यक़ीनन अन्धे लोग थे

Verse 65

۞ وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمۡ هُودًا ۗ قَالَ يَـٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَـٰهٍ غَيۡرُهُ ۥۤ ۚ أَفَلَا تَتَّقُونَ

और (हमने) क़ौम आद की तरफ उनके भाई हूद को (रसूल बनाकर भेजा) तो उन्होनें लोगों से कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं तो क्या तुम (ख़ुदा से) डरते नहीं हो

Verse 66

قَالَ ٱلۡمَلَأُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦۤ إِنَّا لَنَرَٮٰكَ فِى سَفَاهَةٍ وَإِنَّا لَنَظُنُّكَ مِنَ ٱلۡكَـٰذِبِينَ

(तो) उनकी क़ौम के चन्द सरदार जो काफिर थे कहने लगे हम तो बेशक तुमको हिमाक़त में (मुब्तिला) देखते हैं और हम यक़ीनी तुम को झूठा समझते हैं

Verse 67

قَالَ يَـٰقَوۡمِ لَيۡسَ بِى سَفَاهَةٌ وَلَـٰكِنِّى رَسُولٌ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَـٰلَمِينَ

हूद ने कहा ऐ मेरी क़ौम मुझमें में तो हिमाक़त की कोई बात नहीं बल्कि मैं तो परवरदिगार आलम का रसूल हूँ

Verse 68

أُبَلِّغُڪُمۡ رِسَـٰلَـٰتِ رَبِّى وَأَنَا۟ لَكُمۡ نَاصِحٌ أَمِينٌ

मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार के पैग़ामात पहँचाए देता हूँ और मैं तुम्हारा सच्चा ख़ैरख्वाह हूँ

Verse 69

أَوَعَجِبۡتُمۡ أَن جَآءَكُمۡ ذِڪۡرٌ مِّن رَّبِّكُمۡ عَلَىٰ رَجُلٍ مِّنكُمۡ لِيُنذِرَڪُمۡ ۚ وَٱذۡڪُرُوٓاْ إِذۡ جَعَلَكُمۡ خُلَفَآءَ مِنۢ بَعۡدِ قَوۡمِ نُوحٍ وَزَادَكُمۡ فِى ٱلۡخَلۡقِ بَصۜۡطَةً‌ ۖ فَٱذۡڪُرُوٓاْ ءَالَآءَ ٱللَّهِ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ

क्या तुम्हें इस पर ताअज्जुब है कि तुम्हारे परवरदिगार का हुक्म तुम्हारे पास तुम्ही में एक मर्द (आदमी) के ज़रिए से (आया) कि तुम्हें (अजाब से) डराए और (वह वक्त) याद करो जब उसने तुमको क़ौम नूह के बाद ख़लीफा (व जानशीन) बनाया और तुम्हारी ख़िलाफ़त में भी बहुत ज्यादती कर दी तो ख़ुदा की नेअमतों को याद करो ताकि तुम दिली मुरादे पाओ

Verse 70

قَالُوٓاْ أَجِئۡتَنَا لِنَعۡبُدَ ٱللَّهَ وَحۡدَهُ ۥ وَنَذَرَ مَا ڪَانَ يَعۡبُدُ ءَابَآؤُنَا‌ ۖ فَأۡتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

तो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि सिर्फ ख़ुदा की तो इबादत करें और जिनको हमारे बाप दादा पूजते चले आए छोड़ बैठें पस अगर तुम सच्चे हो तो जिससे तुम हमको डराते हो हमारे पास लाओ

Verse 71

قَالَ قَدۡ وَقَعَ عَلَيۡڪُم مِّن رَّبِّكُمۡ رِجۡسٌ وَغَضَبٌ‌ ۖ أَتُجَـٰدِلُونَنِى فِىٓ أَسۡمَآءٍ سَمَّيۡتُمُوهَآ أَنتُمۡ وَءَابَآؤُكُم مَّا نَزَّلَ ٱللَّهُ بِہَا مِن سُلۡطَـٰنٍ ۚ فَٱنتَظِرُوٓاْ إِنِّى مَعَڪُم مِّنَ ٱلۡمُنتَظِرِينَ

हूद ने जवाब दिया (कि बस समझ लो) कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर अज़ाब और ग़ज़ब नाज़िल हो चुका क्या तुम मुझसे चन्द (बुतो के फर्ज़ी) नामों के बारे में झगड़ते हो जिनको तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने (ख्वाहमख्वाह) गढ़ लिए हैं हालाकि ख़ुदा ने उनके लिए कोई सनद नहीं नाज़िल की पस तुम ( अज़ाबे ख़ुदा का) इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ मुन्तिज़र हूँ

Verse 72

فَأَنجَيۡنَـٰهُ وَٱلَّذِينَ مَعَهُ ۥ بِرَحۡمَةٍ مِّنَّا وَقَطَعۡنَا دَابِرَ ٱلَّذِينَ ڪَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا‌ ۖ وَمَا كَانُواْ مُؤۡمِنِينَ

आख़िर हमने उनको और जो लोग उनके साथ थे उनको अपनी रहमत से नजात दी और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था हमने उनकी जड़ काट दी और वह लोग ईमान लाने वाले थे भी नहीं

Verse 73

وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمۡ صَـٰلِحًا ۗ قَالَ يَـٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَڪُم مِّنۡ إِلَـٰهٍ غَيۡرُهُ ۥ‌ ۖ قَدۡ جَآءَتۡڪُم بَيِّنَةٌ مِّن رَّبِّكُمۡ‌ ۖ هَـٰذِهِۦ نَاقَةُ ٱللَّهِ لَڪُمۡ ءَايَةً‌ ۖ فَذَرُوهَا تَأۡڪُلۡ فِىٓ أَرۡضِ ٱللَّهِ‌ ۖ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٍ فَيَأۡخُذَكُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٌ

और (हमने क़ौम) समूद की तरफ उनके भाई सालेह को रसूल बनाकर भेजा तो उन्होनें (उन लोगों से कहा) ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की इबादत करो और उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं है तुम्हारे पास तो तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वाज़ेए और रौशन दलील आ चुकी है ये ख़ुदा की भेजी हुई ऊँटनी तुम्हारे वास्ते एक मौजिज़ा है तो तुम लोग उसको छोड़ दो कि ख़ुदा की ज़मीन में जहाँ चाहे चरती फिरे और उसे कोई तकलीफ़ ना पहुंचाओ वरना तुम दर्दनाक अज़ाब में गिरफ्तार हो जाआगे

Verse 74

وَٱذۡڪُرُوٓاْ إِذۡ جَعَلَكُمۡ خُلَفَآءَ مِنۢ بَعۡدِ عَادٍ وَبَوَّأَڪُمۡ فِى ٱلۡأَرۡضِ تَتَّخِذُونَ مِن سُهُولِهَا قُصُورًا وَتَنۡحِتُونَ ٱلۡجِبَالَ بُيُوتًا‌ ۖ فَٱذۡڪُرُوٓاْ ءَالَآءَ ٱللَّهِ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِى ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ

और वह वक्त याद करो जब उसने तुमको क़ौम आद के बाद (ज़मीन में) ख़लीफा (व जानशीन) बनाया और तुम्हें ज़मीन में इस तरह बसाया कि तुम हमवार व नरम ज़मीन में (बड़े-बड़े) महल उठाते हो और पहाड़ों को तराश के घर बनाते हो तो ख़ुदा की नेअमतों को याद करो और रूए ज़मीन में फसाद न करते फिरो

Verse 75

قَالَ ٱلۡمَلَأُ ٱلَّذِينَ ٱسۡتَڪۡبَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦ لِلَّذِينَ ٱسۡتُضۡعِفُواْ لِمَنۡ ءَامَنَ مِنۡہُمۡ أَتَعۡلَمُونَ أَنَّ صَـٰلِحًا مُّرۡسَلٌ مِّن رَّبِّهِۦ ۚ قَالُوٓاْ إِنَّا بِمَآ أُرۡسِلَ بِهِۦ مُؤۡمِنُونَ

तो उसकी क़ौम के बड़े बड़े लोगों ने बेचारें ग़रीबों से उनमें से जो ईमान लाए थे कहा क्या तुम्हें मालूम है कि सालेह (हक़ीकतन) अपने परवरदिगार के सच्चे रसूल हैं – उन बेचारों ने जवाब दिया कि जिन बातों का वह पैग़ाम लाए हैं हमारा तो उस पर ईमान है

Verse 76

قَالَ ٱلَّذِينَ ٱسۡتَڪۡبَرُوٓاْ إِنَّا بِٱلَّذِىٓ ءَامَنتُم بِهِۦ كَـٰفِرُونَ

तब जिन लोगों को (अपनी दौलत दुनिया पर) घमन्ड था कहने लगे हम तो जिस पर तुम ईमान लाए हो उसे नहीं मानते

Verse 77

فَعَقَرُواْ ٱلنَّاقَةَ وَعَتَوۡاْ عَنۡ أَمۡرِ رَبِّهِمۡ وَقَالُواْ يَـٰصَـٰلِحُ ٱئۡتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ إِن كُنتَ مِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

ग़रज़ उन लोगों ने ऊँटनी के कूचें और पैर काट डाले और अपने परवरदिगार के हुक्म से सरताबी की और (बेबाकी से) कहने लगे अगर तुम सच्चे रसूल हो तो जिस (अज़ाब) से हम लोगों को डराते थे अब लाओ

Verse 78

فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلرَّجۡفَةُ فَأَصۡبَحُواْ فِى دَارِهِمۡ جَـٰثِمِينَ

तब उन्हें ज़लज़ले ने ले डाला और वह लोग ज़ानू पर सर किए (जिस तरह) बैठे थे बैठे के बैठे रह गए

Verse 79

فَتَوَلَّىٰ عَنۡہُمۡ وَقَالَ يَـٰقَوۡمِ لَقَدۡ أَبۡلَغۡتُڪُمۡ رِسَالَةَ رَبِّى وَنَصَحۡتُ لَكُمۡ وَلَـٰكِن لَّا تُحِبُّونَ ٱلنَّـٰصِحِينَ

उसके बाद सालेह उनसे टल गए और (उनसे मुख़ातिब होकर) कहा मेरी क़ौम (आह) मैनें तो अपने परवरदिगार के पैग़ाम तुम तक पहुचा दिए थे और तुम्हारे ख़ैरख्वाही की थी (और ऊँच नीच समझा दिया था) मगर अफसोस तुम (ख़ैरख्वाह) समझाने वालों को अपना दोस्त ही नहीं समझते

Verse 80

وَلُوطًا إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦۤ أَتَأۡتُونَ ٱلۡفَـٰحِشَةَ مَا سَبَقَكُم بِہَا مِنۡ أَحَدٍ مِّنَ ٱلۡعَـٰلَمِينَ

और (लूत को हमने रसूल बनाकर भेजा था) जब उन्होनें अपनी क़ौम से कहा कि (अफसोस) तुम ऐसी बदकारी (अग़लाम) करते हो कि तुमसे पहले सारी ख़ुदाई में किसी ने ऐसी बदकारी नहीं की थी

Verse 81

إِنَّڪُمۡ لَتَأۡتُونَ ٱلرِّجَالَ شَہۡوَةً مِّن دُونِ ٱلنِّسَآءِ ۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٌ مُّسۡرِفُونَ

हाँ तुम औरतों को छोड़कर शहवत परस्ती के वास्ते मर्दों की तरफ माएल होते हो (हालाकि उसकी ज़रूरत नहीं) मगर तुम लोग कुछ हो ही बेहूदा

Verse 82

وَمَا ڪَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦۤ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ أَخۡرِجُوهُم مِّن قَرۡيَتِڪُمۡ‌ ۖ إِنَّهُمۡ أُنَاسٌ يَتَطَهَّرُونَ

सिर्फ करनें वालों (को नुत्फे को ज़ाए करते हो उस पर उसकी क़ौम का उसके सिवा और कुछ जवाब नहीं था कि वह आपस में कहने लगे कि उन लोगों को अपनी बस्ती से निकाल बाहर करो क्योंकि ये तो वह लोग हैं जो पाक साफ बनना चाहते हैं)

Verse 83

فَأَنجَيۡنَـٰهُ وَأَهۡلَهُ ۥۤ إِلَّا ٱمۡرَأَتَهُ ۥ كَانَتۡ مِنَ ٱلۡغَـٰبِرِينَ

तब हमने उनको और उनके घर वालों को नजात दी मगर सिर्फ (एक) उनकी बीबी को कि वह (अपनी बदआमाली से) पीछे रह जाने वालों में थी

Verse 84

وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرًا‌ ۖ فَٱنظُرۡ ڪَيۡفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلۡمُجۡرِمِينَ

और हमने उन लोगों पर (पत्थर का) मेह बरसाया-पस ज़रा ग़ौर तो करो कि गुनाहगारों का अन्जाम आखिर क्या हुआ

Verse 85

وَإِلَىٰ مَدۡيَنَ أَخَاهُمۡ شُعَيۡبًا ۗ قَالَ يَـٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَڪُم مِّنۡ إِلَـٰهٍ غَيۡرُهُ ۥ‌ ۖ قَدۡ جَآءَتۡڪُم بَيِّنَةٌ مِّن رَّبِّڪُمۡ‌ ۖ فَأَوۡفُواْ ٱلۡڪَيۡلَ وَٱلۡمِيزَانَ وَلَا تَبۡخَسُواْ ٱلنَّاسَ أَشۡيَآءَهُمۡ وَلَا تُفۡسِدُواْ فِى ٱلۡأَرۡضِ بَعۡدَ إِصۡلَـٰحِهَا ۚ ذَٲلِڪُمۡ خَيۡرٌ لَّكُمۡ إِن ڪُنتُم مُّؤۡمِنِينَ

और (हमने) मदयन (वालों के) पास उनके भाई शुएब को (रसूल बनाकर भेजा) तो उन्होंने (उन लोगों से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा ही की इबादत करो उसके सिवा कोई दूसरा माबूद नहीं (और) तुम्हारे पास तो तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से एक वाजेए व रौशन मौजिज़ा (भी) आ चुका तो नाप और तौल पूरी किया करो और लोगों को उनकी (ख़रीदी हुई) चीज़ में कम न दिया करो और ज़मीन में उसकी असलाह व दुरूस्ती के बाद फसाद न करते फिरो अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है

Verse 86

وَلَا تَقۡعُدُواْ بِڪُلِّ صِرَٲطٍ تُوعِدُونَ وَتَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ مَنۡ ءَامَنَ بِهِۦ وَتَبۡغُونَهَا عِوَجًا ۚ وَٱذۡڪُرُوٓاْ إِذۡ ڪُنتُمۡ قَلِيلاً فَكَثَّرَڪُمۡ‌ ۖ وَٱنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلۡمُفۡسِدِينَ

और तुम लोग जो रास्तों पर (बैठकर) जो ख़ुदा पर ईमान लाया है उसको डराते हो और ख़ुदा की राह से रोकते हो और उसकी राह में (ख्वाहमाख्वाह) कज़ी ढूँढ निकालते हो अब न बैठा करो और उसको तो याद करो कि जब तुम (शुमार में) कम थे तो ख़ुदा ही ने तुमको बढ़ाया, और ज़रा ग़ौर तो करो कि (आख़िर) फसाद फैलाने वालों का अन्जाम क्या हुआ

Verse 87

وَإِن كَانَ طَآٮِٕفَةٌ مِّنڪُمۡ ءَامَنُواْ بِٱلَّذِىٓ أُرۡسِلۡتُ بِهِۦ وَطَآٮِٕفَةٌ لَّمۡ يُؤۡمِنُواْ فَٱصۡبِرُواْ حَتَّىٰ يَحۡكُمَ ٱللَّهُ بَيۡنَنَا ۚ وَهُوَ خَيۡرُ ٱلۡحَـٰكِمِينَ

और जिन बातों का मै पैग़ाम लेकर आया हूँ अगर तुममें से एक गिरोह ने उनको मान लिया और एक गिरोह ने नहीं माना तो (कुछ परवाह नहीं) तो तुम सब्र से बैठे (देखते) रहो यहाँ तक कि ख़ुदा (खुद) हमारे दरमियान फैसला कर दे, वह तो सबसे बेहतर फैसला करने वाला है

Verse 88

۞ قَالَ ٱلۡمَلَأُ ٱلَّذِينَ ٱسۡتَكۡبَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦ لَنُخۡرِجَنَّكَ يَـٰشُعَيۡبُ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَكَ مِن قَرۡيَتِنَآ أَوۡ لَتَعُودُنَّ فِى مِلَّتِنَا ۚ قَالَ أَوَلَوۡ كُنَّا كَـٰرِهِينَ

तो उनकी क़ौम में से जिन लोगों को (अपनी हशमत (दुनिया पर) बड़ा घमण्ड था कहने लगे कि ऐ शुएब हम तुम्हारे साथ ईमान लाने वालों को अपनी बस्ती से निकाल बाहर कर देगें मगर जबकि तुम भी हमारे उसी मज़हब मिल्लत में लौट कर आ जाओ

Verse 89

قَدِ ٱفۡتَرَيۡنَا عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا إِنۡ عُدۡنَا فِى مِلَّتِڪُم بَعۡدَ إِذۡ نَجَّٮٰنَا ٱللَّهُ مِنۡہَا ۚ وَمَا يَكُونُ لَنَآ أَن نَّعُودَ فِيہَآ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّنَا ۚ وَسِعَ رَبُّنَا كُلَّ شَىۡءٍ عِلۡمًا ۚ عَلَى ٱللَّهِ تَوَكَّلۡنَا ۚ رَبَّنَا ٱفۡتَحۡ بَيۡنَنَا وَبَيۡنَ قَوۡمِنَا بِٱلۡحَقِّ وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلۡفَـٰتِحِينَ

हम अगरचे तुम्हारे मज़हब से नफरत ही रखते हों (तब भी लौट जाएं माज़अल्लाह) जब तुम्हारे बातिल दीन से ख़ुदा ने मुझे नजात दी उसके बाद भी अब अगर हम तुम्हारे मज़हब मे लौट जाएं तब हमने ख़ुदा पर बड़ा झूठा बोहतान बॉधा (ना) और हमारे वास्ते तो किसी तरह जायज़ नहीं कि हम तुम्हारे मज़हब की तरफ लौट जाएँ मगर हाँ जब मेरा परवरदिगार अल्लाह चाहे तो हमारा परवरदिगार तो (अपने) इल्म से तमाम (आलम की) चीज़ों को घेरे हुए है हमने तो ख़ुदा ही पर भरोसा कर लिया ऐ हमारे परवरदिगार तू ही हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान ठीक ठीक फैसला कर दे और तू सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है

Verse 90

وَقَالَ ٱلۡمَلَأُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن قَوۡمِهِۦ لَٮِٕنِ ٱتَّبَعۡتُمۡ شُعَيۡبًا إِنَّكُمۡ إِذًا لَّخَـٰسِرُونَ

और उनकी क़ौम के चन्द सरदार जो काफिर थे (लोगों से) कहने लगे कि अगर तुम लोगों ने शुएब की पैरवी की तो उसमें शक़ ही नहीं कि तुम सख्त घाटे में रहोगे

Verse 91

فَأَخَذَتۡہُمُ ٱلرَّجۡفَةُ فَأَصۡبَحُواْ فِى دَارِهِمۡ جَـٰثِمِينَ

ग़रज़ उन लोगों को ज़लज़ले ने ले डाला बस तो वह अपने घरों में औन्धे पड़े रह गए

Verse 92

ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ شُعَيۡبًا كَأَن لَّمۡ يَغۡنَوۡاْ فِيهَا ۚ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ شُعَيۡبًا كَانُواْ هُمُ ٱلۡخَـٰسِرِينَ

जिन लोगों ने शुएब को झुठलाया था वह (ऐसे मर मिटे कि) गोया उन बस्तियों में कभी आबाद ही न थे जिन लोगों ने शुएब को झुठलाया वही लोग घाटे में रहे

Verse 93

فَتَوَلَّىٰ عَنۡهُمۡ وَقَالَ يَـٰقَوۡمِ لَقَدۡ أَبۡلَغۡتُڪُمۡ رِسَـٰلَـٰتِ رَبِّى وَنَصَحۡتُ لَكُمۡ‌ ۖ فَكَيۡفَ ءَاسَىٰ عَلَىٰ قَوۡمٍ كَـٰفِرِينَ

तब शुएब उन लोगों के सर से टल गए और (उनसे मुख़ातिब हो के) कहा ऐ मेरी क़ौम मैं ने तो अपने परवरदिगार के पैग़ाम तुम तक पहुँचा दिए और तुम्हारी ख़ैर ख्वाही की थी, फिर अब मैं काफिरों पर क्यों कर अफसोस करूँ

Verse 94

وَمَآ أَرۡسَلۡنَا فِى قَرۡيَةٍ مِّن نَّبِىٍّ إِلَّآ أَخَذۡنَآ أَهۡلَهَا بِٱلۡبَأۡسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ لَعَلَّهُمۡ يَضَّرَّعُونَ

और हमने किसी बस्ती में कोई नबी नही भेजा मगर वहाँ के रहने वालों को (कहना न मानने पर) सख्ती और मुसीबत में मुब्तिला किया ताकि वह लोग (हमारी बारगाह में) गिड़गिड़ाए

Verse 95

ثُمَّ بَدَّلۡنَا مَكَانَ ٱلسَّيِّئَةِ ٱلۡحَسَنَةَ حَتَّىٰ عَفَواْ وَّقَالُواْ قَدۡ مَسَّ ءَابَآءَنَا ٱلضَّرَّآءُ وَٱلسَّرَّآءُ فَأَخَذۡنَـٰهُم بَغۡتَةً وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ

फिर हमने तकलीफ़ की जगह आराम को बदल दिया यहाँ तक कि वह लोग बढ़ निकले और कहने लगे कि इस तरह की तकलीफ़ व आराम तो हमारे बाप दादाओं को पहुँच चुका है तब हमने (उस बढ़ाने के की सज़ा में (अचानक उनको अज़ाब में) गिरफ्तार किया

Verse 96

وَلَوۡ أَنَّ أَهۡلَ ٱلۡقُرَىٰٓ ءَامَنُواْ وَٱتَّقَوۡاْ لَفَتَحۡنَا عَلَيۡہِم بَرَكَـٰتٍ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ وَلَـٰكِن كَذَّبُواْ فَأَخَذۡنَـٰهُم بِمَا ڪَانُواْ يَكۡسِبُونَ

और वह बिल्कुल बेख़बर थे और अगर उन बस्तियों के रहने वाले ईमान लाते और परहेज़गार बनते तो हम उन पर आसमान व ज़मीन की बरकतों (के दरवाजे) ख़ोल देते मगर (अफसोस) उन लोगों ने (हमारे पैग़म्बरों को) झूठलाया तो हमने भी उनके करतूतों की बदौलत उन को (अज़ाब में) गिरफ्तार किया

Verse 97

أَفَأَمِنَ أَهۡلُ ٱلۡقُرَىٰٓ أَن يَأۡتِيَہُم بَأۡسُنَا بَيَـٰتًا وَهُمۡ نَآٮِٕمُونَ

(उन) बस्तियों के रहने वाले उस बात से बेख़ौफ हैं कि उन पर हमारा अज़ाब रातों रात आ जाए जब कि वह पड़े बेख़बर सोते हों

Verse 98

أَوَأَمِنَ أَهۡلُ ٱلۡقُرَىٰٓ أَن يَأۡتِيَهُم بَأۡسُنَا ضُحًى وَهُمۡ يَلۡعَبُونَ

या उन बस्तियों वाले इससे बेख़ौफ हैं कि उन पर दिन दहाड़े हमारा अज़ाब आ पहुँचे जब वह खेल कूद (में मशग़ूल हो)

Verse 99

أَفَأَمِنُواْ مَڪۡرَ ٱللَّهِ ۚ فَلَا يَأۡمَنُ مَڪۡرَ ٱللَّهِ إِلَّا ٱلۡقَوۡمُ ٱلۡخَـٰسِرُونَ

तो क्या ये लोग ख़ुदा की तद्बीर से ढीट हो गए हैं तो (याद रहे कि) ख़ुदा के दॉव से घाटा उठाने वाले ही निडर हो बैठे हैं

Verse 100

أَوَلَمۡ يَهۡدِ لِلَّذِينَ يَرِثُونَ ٱلۡأَرۡضَ مِنۢ بَعۡدِ أَهۡلِهَآ أَن لَّوۡ نَشَآءُ أَصَبۡنَـٰهُم بِذُنُوبِهِمۡ ۚ وَنَطۡبَعُ عَلَىٰ قُلُوبِہِمۡ فَهُمۡ لَا يَسۡمَعُونَ

क्या जो लोग अहले ज़मीन के बाद ज़मीन के वारिस (व मालिक) होते हैं उन्हें ये मालूम नहीं कि अगर हम चाहते तो उनके गुनाहों की बदौलत उनको मुसीबत में फँसा देते (मगर ये लोग ऐसे नासमझ हैं कि गोया) उनके दिलों पर हम ख़ुद (मोहर कर देते हैं कि ये लोग कुछ सुनते ही नहीं

Verse 101

تِلۡكَ ٱلۡقُرَىٰ نَقُصُّ عَلَيۡكَ مِنۡ أَنۢبَآٮِٕهَا ۚ وَلَقَدۡ جَآءَتۡہُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَـٰتِ فَمَا ڪَانُواْ لِيُؤۡمِنُواْ بِمَا ڪَذَّبُواْ مِن قَبۡلُ ۚ كَذَٲلِكَ يَطۡبَعُ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ ٱلۡڪَـٰفِرِينَ

(ऐ रसूल) ये चन्द बस्तियाँ हैं जिन के हालात हम तुमसे बयान करते हैं और इसमें तो शक़ ही नहीं कि उनके पैग़म्बर उनके पास वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर आए मगर ये लोग जिसके पहले झुठला चुके थे उस पर भला काहे को ईमान लाने वाले थे ख़ुदा यूं काफिरों के दिलों पर अलामत मुकर्रर कर देता है (कि ये ईमान न लाएँगें)

Verse 102

وَمَا وَجَدۡنَا لِأَڪۡثَرِهِم مِّنۡ عَهۡدٍ‌ ۖ وَإِن وَجَدۡنَآ أَڪۡثَرَهُمۡ لَفَـٰسِقِينَ

और हमने तो उसमें से अक्सरों का एहद (ठीक) न पाया और हमने उनमें से अक्सरों को बदकार ही पाया

Verse 103

ثُمَّ بَعَثۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِم مُّوسَىٰ بِـَٔايَـٰتِنَآ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ فَظَلَمُواْ بِہَا‌ ۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلۡمُفۡسِدِينَ

फिर हमने (उन पैग़म्बरान मज़कूरीन के बाद) मूसा को फिरऔन और उसके सरदारों के पास मौजिज़े अता करके (रसूल बनाकर) भेजा तो उन लोगों ने उन मौजिज़ात के साथ (बड़ी बड़ी) शरारतें की पस ज़रा ग़ौर तो करो कि आख़िर फसादियों का अन्जाम क्या हुआ

Verse 104

وَقَالَ مُوسَىٰ يَـٰفِرۡعَوۡنُ إِنِّى رَسُولٌ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَـٰلَمِينَ

और मूसा ने (फिरऔन से) कहा ऐ फिरऔनमें यक़ीनन परवरदिगारे आलम का रसूल हूँ

Verse 105

حَقِيقٌ عَلَىٰٓ أَن لَّآ أَقُولَ عَلَى ٱللَّهِ إِلَّا ٱلۡحَقَّ ۚ قَدۡ جِئۡتُڪُم بِبَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّكُمۡ فَأَرۡسِلۡ مَعِىَ بَنِىٓ إِسۡرَٲٓءِيلَ

मुझ पर वाजिब है कि ख़ुदा पर सच के सिवा (एक हुरमत भी झूठ) न कहूँ मै यक़ीनन तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वाजेए व रोशन मौजिज़े लेकर आया हूँ

Verse 106

قَالَ إِن كُنتَ جِئۡتَ بِـَٔايَةٍ فَأۡتِ بِہَآ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

तो तू बनी ईसराइल को मेरे हमराह करे दे फिरऔन कहने लगा अगर तुम सच्चे हो और वाक़ई कोई मौजिज़ा लेकर आए हो तो उसे दिखाओ

Verse 107

فَأَلۡقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِىَ ثُعۡبَانٌ مُّبِينٌ

(ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी पस वह यकायक (अच्छा खासा) ज़ाहिर बज़ाहिर अजदहा बन गई

Verse 108

وَنَزَعَ يَدَهُ ۥ فَإِذَا هِىَ بَيۡضَآءُ لِلنَّـٰظِرِينَ

और अपना हाथ बाहर निकाला तो क्या देखते है कि वह हर शख़्श की नज़र मे जगमगा रहा है

Verse 109

قَالَ ٱلۡمَلَأُ مِن قَوۡمِ فِرۡعَوۡنَ إِنَّ هَـٰذَا لَسَـٰحِرٌ عَلِيمٌ

तब फिरऔन के क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा ये तो अलबत्ता बड़ा माहिर जादूगर है

Verse 110

يُرِيدُ أَن يُخۡرِجَكُم مِّنۡ أَرۡضِكُمۡ‌ ۖ فَمَاذَا تَأۡمُرُونَ

ये चाहता है कि तुम्हें तुम्हारें मुल्क से निकाल बाहर कर दे तो अब तुम लोग उसके बारे में क्या सलाह देते हो

Verse 111

قَالُوٓاْ أَرۡجِهۡ وَأَخَاهُ وَأَرۡسِلۡ فِى ٱلۡمَدَآٮِٕنِ حَـٰشِرِينَ

(आख़िर) सबने मुत्तफिक़ अलफाज़ (एक ज़बान होकर) कहा कि (ऐ फिरऔन) उनको और उनके भाई (हारून) को चन्द दिन कैद में रखिए और (एतराफ़ के) शहरों में हरकारों को भेजिए

Verse 112

يَأۡتُوكَ بِكُلِّ سَـٰحِرٍ عَلِيمٍ

कि तमाम बड़े बड़े जादूगरों का जमा करके अपके पास दरबार में हाज़िर करें

Verse 113

وَجَآءَ ٱلسَّحَرَةُ فِرۡعَوۡنَ قَالُوٓاْ إِنَّ لَنَا لَأَجۡرًا إِن ڪُنَّا نَحۡنُ ٱلۡغَـٰلِبِينَ

ग़रज़ जादूगर सब फिरऔन के पास हाज़िर होकर कहने लगे कि अगर हम (मूसा से) जीत जाएं तो हमको बड़ा भारी इनाम ज़रुर मिलना चाहिए

Verse 114

قَالَ نَعَمۡ وَإِنَّكُمۡ لَمِنَ ٱلۡمُقَرَّبِينَ

फिरऔन ने कहा (हॉ इनाम ही नहीं) बल्कि फिर तो तुम हमारे दरबार के मुक़र्रेबीन में से होगें

Verse 115

قَالُواْ يَـٰمُوسَىٰٓ إِمَّآ أَن تُلۡقِىَ وَإِمَّآ أَن نَّكُونَ نَحۡنُ ٱلۡمُلۡقِينَ

और मुक़र्रर वक्त पर सब जमा हुए तो बोल उठे कि ऐ मूसा या तो तुम्हें (अपने मुन्तसिर (मंत्र)) या हम ही (अपने अपने मंत्र फेके)

Verse 116

قَالَ أَلۡقُواْ‌ ۖ فَلَمَّآ أَلۡقَوۡاْ سَحَرُوٓاْ أَعۡيُنَ ٱلنَّاسِ وَٱسۡتَرۡهَبُوهُمۡ وَجَآءُو بِسِحۡرٍ عَظِيمٍ

मूसा ने कहा (अच्छा पहले) तुम ही फेक (के अपना हौसला निकालो) तो तब जो ही उन लोगों ने (अपनी रस्सियाँ) डाली तो लोगों की नज़र बन्दी कर दी (कि सब सापँ मालूम होने लगे) और लोगों को डरा दिया

Verse 117

۞ وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنۡ أَلۡقِ عَصَاكَ‌ ۖ فَإِذَا هِىَ تَلۡقَفُ مَا يَأۡفِكُونَ

और उन लोगों ने बड़ा (भारी जादू दिखा दिया और हमने मूसा के पास वही भेजी कि (बैठे क्या हो) तुम भी अपनी छड़ी डाल दो तो क्या देखते हैं कि वह छड़ी उनके बनाए हुए (झूठे साँपों को) एक एक करके निगल रही है

Verse 118

فَوَقَعَ ٱلۡحَقُّ وَبَطَلَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

अल किस्सा हक़ बात तो जम के बैठी और उनकी सारी कारस्तानी मटियामेट हो गई

Verse 119

فَغُلِبُواْ هُنَالِكَ وَٱنقَلَبُواْ صَـٰغِرِينَ

पस फिरऔन और उसके तरफदार सब के सब इस अखाड़े मे हारे और ज़लील व रूसवा हो के पलटे

Verse 120

وَأُلۡقِىَ ٱلسَّحَرَةُ سَـٰجِدِينَ

और जादूगर सब मूसा के सामने सजदे में गिर पड़े

Verse 121

قَالُوٓاْ ءَامَنَّا بِرَبِّ ٱلۡعَـٰلَمِينَ

और (आजिज़ी से) बोले हम सारे जहाँन के परवरदिगार पर ईमान लाए

Verse 122

رَبِّ مُوسَىٰ وَهَـٰرُونَ

जो मूसा व हारून का परवरदिगार है

Verse 123

قَالَ فِرۡعَوۡنُ ءَامَنتُم بِهِۦ قَبۡلَ أَنۡ ءَاذَنَ لَكُمۡ‌ ۖ إِنَّ هَـٰذَا لَمَكۡرٌ مَّكَرۡتُمُوهُ فِى ٱلۡمَدِينَةِ لِتُخۡرِجُواْ مِنۡہَآ أَهۡلَهَا‌ ۖ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ

फिरऔन ने कहा (हाए) तुम लोग मेरी इजाज़त के क़ब्ल (पहले) उस पर ईमान ले आए ये ज़रूर तुम लोगों की मक्कारी है जो तुम लोगों ने उस शहर में फैला रखी है ताकि उसके बाशिन्दों को यहाँ से निकाल कर बाहर करो पस तुम्हें अन क़रीब ही उस शरारत का मज़ा मालूम हो जाएगा

Verse 124

لَأُقَطِّعَنَّ أَيۡدِيَكُمۡ وَأَرۡجُلَكُم مِّنۡ خِلَـٰفٍ ثُمَّ لَأُصَلِّبَنَّكُمۡ أَجۡمَعِينَ

मै तो यक़ीनन तुम्हारे (एक तरफ के) हाथ और दूसरी तरफ के पॉव कटवा डालूंगा फिर तुम सबके सब को सूली दे दूंगा

Verse 125

قَالُوٓاْ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ

जादूगर कहने लगे हम को तो (आख़िर एक रोज़) अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना (मर जाना) है

Verse 126

وَمَا تَنقِمُ مِنَّآ إِلَّآ أَنۡ ءَامَنَّا بِـَٔايَـٰتِ رَبِّنَا لَمَّا جَآءَتۡنَا ۚ رَبَّنَآ أَفۡرِغۡ عَلَيۡنَا صَبۡرًا وَتَوَفَّنَا مُسۡلِمِينَ

तू हमसे उसके सिवा और काहे की अदावत रखता है कि जब हमारे पास ख़ुदा की निशानियाँ आयी तो हम उन पर ईमान लाए (और अब तो हमारी ये दुआ है कि) ऐ हमारे परवरदिगार हम पर सब्र (का मेंह बरसा)

Verse 127

وَقَالَ ٱلۡمَلَأُ مِن قَوۡمِ فِرۡعَوۡنَ أَتَذَرُ مُوسَىٰ وَقَوۡمَهُ ۥ لِيُفۡسِدُواْ فِى ٱلۡأَرۡضِ وَيَذَرَكَ وَءَالِهَتَكَ ۚ قَالَ سَنُقَتِّلُ أَبۡنَآءَهُمۡ وَنَسۡتَحۡىِۦ نِسَآءَهُمۡ وَإِنَّا فَوۡقَهُمۡ قَـٰهِرُونَ

और हमने अपनी फरमाबरदारी की हालत में दुनिया से उठा ले और फिरऔन की क़ौम के चन्द सरदारों ने (फिरऔन) से कहा कि क्या आप मूसा और उसकी क़ौम को उनकी हालत पर छोड़ देंगे कि मुल्क में फ़साद करते फिरे और आपके और आपके ख़ुदाओं (की परसतिश) को छोड़ बैठें- फिरऔन कहने लगा (तुम घबराओ नहीं) हम अनक़रीब ही उनके बेटों की क़त्ल करते हैं और उनकी औरतों को (लौन्डियॉ बनाने के वास्ते) जिन्दा रखते हैं और हम तो उन पर हर तरह क़ाबू रखते हैं

Verse 128

قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِ ٱسۡتَعِينُواْ بِٱللَّهِ وَٱصۡبِرُوٓاْ‌ ۖ إِنَّ ٱلۡأَرۡضَ لِلَّهِ يُورِثُهَا مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦ‌ ۖ وَٱلۡعَـٰقِبَةُ لِلۡمُتَّقِينَ

(ये सुनकर) मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि (भाइयों) ख़ुदा से मदद माँगों और सब्र करो सारी ज़मीन तो ख़ुदा ही की है वह अपने बन्दों में जिसकी चाहे उसका वारिस (व मालिक) बनाए और ख़ातमा बिल ख़ैर तो सब परहेज़गार ही का है

Verse 129

قَالُوٓاْ أُوذِينَا مِن قَبۡلِ أَن تَأۡتِيَنَا وَمِنۢ بَعۡدِ مَا جِئۡتَنَا ۚ قَالَ عَسَىٰ رَبُّكُمۡ أَن يُهۡلِكَ عَدُوَّڪُمۡ وَيَسۡتَخۡلِفَڪُمۡ فِى ٱلۡأَرۡضِ فَيَنظُرَ ڪَيۡفَ تَعۡمَلُونَ

वह लोग कहने लगे कि (ऐ मूसा) तुम्हारे आने के क़ब्ल (पहले) ही से और तुम्हारे आने के बाद भी हम को तो बराबर तकलीफ ही पहुँच रही है (आख़िर कहाँ तक सब्र करें) मूसा ने कहा अनकरीब ही तुम्हारा परवरदिगार तुम्हारे दुश्मन को हलाक़ करेगा और तुम्हें (उसका जानशीन) बनाएगा फिर देखेगा कि तुम कैसा काम करते हो

Verse 130

وَلَقَدۡ أَخَذۡنَآ ءَالَ فِرۡعَوۡنَ بِٱلسِّنِينَ وَنَقۡصٍ مِّنَ ٱلثَّمَرَٲتِ لَعَلَّهُمۡ يَذَّڪَّرُونَ

और बेशक हमने फिरऔन के लोगों को बरसों से कहत और फलों की कम पैदावार (के अज़ाब) में गिरफ्तार किया ताकि वह इबरत हासिल करें

Verse 131

فَإِذَا جَآءَتۡهُمُ ٱلۡحَسَنَةُ قَالُواْ لَنَا هَـٰذِهِۦ‌ ۖ وَإِن تُصِبۡہُمۡ سَيِّئَةٌ يَطَّيَّرُواْ بِمُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُ ۥۤ ۗ أَلَآ إِنَّمَا طَـٰٓٮِٕرُهُمۡ عِندَ ٱللَّهِ وَلَـٰكِنَّ أَڪۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ

तो जब उन्हें कोई राहत मिलती तो कहने लगते कि ये तो हमारे लिए सज़ावार ही है और जब उन्हें कोई मुसीबत पहुँचती तो मूसा और उनके साथियों की बदशुगूनी समझते देखो उनकी बदशुगूनी तो ख़ुदा के हा (लिखी जा चुकी) थी मगर बहुतेरे लोग नही जानते हैं

Verse 132

وَقَالُواْ مَهۡمَا تَأۡتِنَا بِهِۦ مِنۡ ءَايَةٍ لِّتَسۡحَرَنَا بِہَا فَمَا نَحۡنُ لَكَ بِمُؤۡمِنِينَ

और फिरऔन के लोग मूसा से एक मरतबा कहने लगे कि तुम हम पर जादू करने के लिए चाहे जितनी निशानियाँ लाओ मगर हम तुम पर किसी तरह ईमान नहीं लाएँगें

Verse 133

فَأَرۡسَلۡنَا عَلَيۡہِمُ ٱلطُّوفَانَ وَٱلۡجَرَادَ وَٱلۡقُمَّلَ وَٱلضَّفَادِعَ وَٱلدَّمَ ءَايَـٰتٍ مُّفَصَّلَـٰتٍ فَٱسۡتَڪۡبَرُواْ وَكَانُواْ قَوۡمًا مُّجۡرِمِينَ

तब हमने उन पर (पानी को) तूफान और टिड़डियाँ और जुएं और मेंढ़कों और खून (का अज़ाब भेजा कि सब जुदा जुदा (हमारी कुदरत की) निशानियाँ थी उस पर भी वह लोग तकब्बुर ही करते रहें और वह लोग गुनेहगार तो थे ही

Verse 134

وَلَمَّا وَقَعَ عَلَيۡهِمُ ٱلرِّجۡزُ قَالُواْ يَـٰمُوسَى ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ‌ ۖ لَٮِٕن كَشَفۡتَ عَنَّا ٱلرِّجۡزَ لَنُؤۡمِنَنَّ لَكَ وَلَنُرۡسِلَنَّ مَعَكَ بَنِىٓ إِسۡرَٲٓءِيلَ

(और जब उन पर अज़ाब आ पड़ता तो कहने लगते कि ऐ मूसा तुम से जो ख़ुदा ने (क़बूल दुआ का) अहद किया है उसी की उम्मीद पर अपने ख़ुदा से दुआ माँगों और अगर तुमने हम से अज़ाब को टाल दिया तो हम ज़रूर भेज देगें

Verse 135

فَلَمَّا ڪَشَفۡنَا عَنۡہُمُ ٱلرِّجۡزَ إِلَىٰٓ أَجَلٍ هُم بَـٰلِغُوهُ إِذَا هُمۡ يَنكُثُونَ

फिर जब हम उनसे उस वक्त क़े वास्ते जिस तक वह ज़रूर पहुँचते अज़ाब को हटा लेते तो फिर फौरन बद अहदी करने लगते

Verse 136

فَٱنتَقَمۡنَا مِنۡہُمۡ فَأَغۡرَقۡنَـٰهُمۡ فِى ٱلۡيَمِّ بِأَنَّہُمۡ كَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا وَڪَانُواْ عَنۡہَا غَـٰفِلِينَ

तब आख़िर हमने उनसे (उनकी शरारत का) बदला लिया तो चूंकि वह लोग हमारी आयतों को झुटलाते थे और उनसे ग़ाफिल रहते थे हमने उन्हें दरिया में डुबो दिया

Verse 137

وَأَوۡرَثۡنَا ٱلۡقَوۡمَ ٱلَّذِينَ كَانُواْ يُسۡتَضۡعَفُونَ مَشَـٰرِقَ ٱلۡأَرۡضِ وَمَغَـٰرِبَهَا ٱلَّتِى بَـٰرَكۡنَا فِيہَا‌ ۖ وَتَمَّتۡ كَلِمَتُ رَبِّكَ ٱلۡحُسۡنَىٰ عَلَىٰ بَنِىٓ إِسۡرَٲٓءِيلَ بِمَا صَبَرُواْ‌ ۖ وَدَمَّرۡنَا مَا كَانَ يَصۡنَعُ فِرۡعَوۡنُ وَقَوۡمُهُ ۥ وَمَا ڪَانُواْ يَعۡرِشُونَ

और जिन बेचारों को ये लोग कमज़ोर समझते थे उन्हीं को (मुल्क शाम की) ज़मीन का जिसमें हमने (ज़रखेज़ होने की) बरकत दी थी उसके पूरब पश्चिम (सब) का वारिस (मालिक) बना दिया और चूंकि बनी इसराईल नें (फिरऔन के ज़ालिमों) पर सब्र किया था इसलिए तुम्हारे परवरदिगार का नेक वायदा (जो उसने बनी इसराइल से किया था) पूरा हो गया और जो कुछ फिरऔन और उसकी क़ौम के लोग करते थे और जो ऊँची ऊँची इमारते बनाते थे सब हमने बरबाद कर दी

Verse 138

وَجَـٰوَزۡنَا بِبَنِىٓ إِسۡرَٲٓءِيلَ ٱلۡبَحۡرَ فَأَتَوۡاْ عَلَىٰ قَوۡمٍ يَعۡكُفُونَ عَلَىٰٓ أَصۡنَامٍ لَّهُمۡ ۚ قَالُواْ يَـٰمُوسَى ٱجۡعَل لَّنَآ إِلَـٰهًا كَمَا لَهُمۡ ءَالِهَةٌ ۚ قَالَ إِنَّكُمۡ قَوۡمٌ تَجۡهَلُونَ

और हमने बनी ईसराइल को दरिया के उस पार उतार दिया तो एक ऐसे लोगों पर से गुज़रे जो अपने (हाथों से बनाए हुए) बुतों की परसतिश पर जमा बैठे थे (तो उनको देख कर बनी ईसराइल से) कहने लगे ऐ मूसा जैसे उन लोगों के माबूद (बुत) हैं वैसे ही हमारे लिए भी एक माबूद बनाओ मूसा ने जवाब दिया कि तुम लोग जाहिल लोग हो

Verse 139

إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ مُتَبَّرٌ مَّا هُمۡ فِيهِ وَبَـٰطِلٌ مَّا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

(अरे कमबख्तो) ये लोग जिस मज़हब पर हैं (वह यक़ीनी बरबाद होकर रहेगा) और जो अमल ये लोग कर रहे हैं (वह सब मिटिया मेट हो जाएगा)

Verse 140

قَالَ أَغَيۡرَ ٱللَّهِ أَبۡغِيڪُمۡ إِلَـٰهًا وَهُوَ فَضَّلَڪُمۡ عَلَى ٱلۡعَـٰلَمِينَ

(मूसा ने ये भी) कहा क्या तुम्हारा ये मतलब है कि ख़ुदा को छोड़कर मै दूसरे को तुम्हारा माबूद तलाश करू

Verse 141

وَإِذۡ أَنجَيۡنَـٰڪُم مِّنۡ ءَالِ فِرۡعَوۡنَ يَسُومُونَڪُمۡ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ‌ ۖ يُقَتِّلُونَ أَبۡنَآءَكُمۡ وَيَسۡتَحۡيُونَ نِسَآءَكُمۡ ۚ وَفِى ذَٲلِڪُم بَلَآءٌ مِّن رَّبِّڪُمۡ عَظِيمٌ

हालॉकि उसने तुमको सारी खुदाई पर फज़ीलत दी है (ऐ बनी इसराइल वह वक्त याद करो) जब हमने तुमको फिरऔन के लोगों से नजात दी जब वह लोग तुम्हें बड़ी बड़ी तकलीफें पहुंचाते थे तुम्हारे बेटों को तो (चुन चुन कर) क़त्ल कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को (लौन्डियॉ बनाने के वास्ते ज़िन्दा रख छोड़ते) और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे (सब्र की) सख्त आज़माइश थी

Verse 142

۞ وَوَٲعَدۡنَا مُوسَىٰ ثَلَـٰثِينَ لَيۡلَةً وَأَتۡمَمۡنَـٰهَا بِعَشۡرٍ فَتَمَّ مِيقَـٰتُ رَبِّهِۦۤ أَرۡبَعِينَ لَيۡلَةً ۚ وَقَالَ مُوسَىٰ لِأَخِيهِ هَـٰرُونَ ٱخۡلُفۡنِى فِى قَوۡمِى وَأَصۡلِحۡ وَلَا تَتَّبِعۡ سَبِيلَ ٱلۡمُفۡسِدِينَ

और हमने मूसा से तौरैत देने के लिए तीस रातों का वायदा किया और हमने उसमें दस रोज़ बढ़ाकर पूरा कर दिया ग़रज़ उसके परवरदिगार का वायदा चालीस रात में पूरा हो गया और (चलते वक्त) मूसा ने अपने भाई हारून कहा कि तुम मेरी क़ौम में मेरे जानशीन रहो और उनकी इसलाह करना और फसाद करने वालों के तरीक़े पर न चलना

Verse 143

وَلَمَّا جَآءَ مُوسَىٰ لِمِيقَـٰتِنَا وَكَلَّمَهُ ۥ رَبُّهُ ۥ قَالَ رَبِّ أَرِنِىٓ أَنظُرۡ إِلَيۡكَ ۚ قَالَ لَن تَرَٮٰنِى وَلَـٰكِنِ ٱنظُرۡ إِلَى ٱلۡجَبَلِ فَإِنِ ٱسۡتَقَرَّ مَڪَانَهُ ۥ فَسَوۡفَ تَرَٮٰنِى ۚ فَلَمَّا تَجَلَّىٰ رَبُّهُ ۥ لِلۡجَبَلِ جَعَلَهُ ۥ دَڪًّا وَخَرَّ مُوسَىٰ صَعِقًا ۚ فَلَمَّآ أَفَاقَ قَالَ سُبۡحَـٰنَكَ تُبۡتُ إِلَيۡكَ وَأَنَا۟ أَوَّلُ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

और जब मूसा हमारा वायदा पूरा करते (कोहेतूर पर) आए और उनका परवरदिगार उनसे हम कलाम हुआ तो मूसा ने अर्ज़ किया कि ख़ुदाया तू मेझे अपनी एक झलक दिखला दे कि मैं तूझे देखँ ख़ुदा ने फरमाया तुम मुझे हरगिज़ नहीं देख सकते मगर हॉ उस पहाड़ की तरफ देखो (हम उस पर अपनी तजल्ली डालते हैं) पस अगर (पहाड़) अपनी जगह पर क़ायम रहे तो समझना कि अनक़रीब मुझे भी देख लोगे (वरना नहीं) फिर जब उनके परवरदिगार ने पहाड़ पर तजल्ली डाली तो उसको चकनाचूर कर दिया और मूसा बेहोश होकर गिर पड़े फिर जब होश में आए तो कहने लगे ख़ुदा वन्दा तू (देखने दिखाने से) पाक व पाकीज़ा है-मैने तेरी बारगाह में तौबा की और मै सब से पहले तेरी अदम रवायत का यक़ीन करता हूँ

Verse 144

قَالَ يَـٰمُوسَىٰٓ إِنِّى ٱصۡطَفَيۡتُكَ عَلَى ٱلنَّاسِ بِرِسَـٰلَـٰتِى وَبِكَلَـٰمِى فَخُذۡ مَآ ءَاتَيۡتُكَ وَكُن مِّنَ ٱلشَّـٰكِرِينَ

ख़ुदा ने फरमाया ऐ मूसा मैने तुमको तमाम लोगों पर अपनी पैग़म्बरी और हम कलामी (का दरजा देकर) बरगूज़ीदा किया है तब जो (किताब तौरैत) हमने तुमको अता की है उसे लो और शुक्रगुज़ार रहो

Verse 145

وَڪَتَبۡنَا لَهُ ۥ فِى ٱلۡأَلۡوَاحِ مِن ڪُلِّ شَىۡءٍ مَّوۡعِظَةً وَتَفۡصِيلاً لِّكُلِّ شَىۡءٍ فَخُذۡهَا بِقُوَّةٍ وَأۡمُرۡ قَوۡمَكَ يَأۡخُذُواْ بِأَحۡسَنِہَا ۚ سَأُوْرِيكُمۡ دَارَ ٱلۡفَـٰسِقِينَ

और हमने (तौरैत की) तख्तियों में मूसा के लिए हर तरह की नसीहत और हर चीज़ का तफसीलदार बयान लिख दिया था तो (ऐ मूसा) तुम उसे मज़बूती से तो (अमल करो) और अपनी क़ौम को हुक्म दे दो कि उसमें की अच्छी बातों पर अमल करें और बहुत जल्द तुम्हें बदकिरदारों का घर दिखा दूँगा (कि कैसे उजड़ते हैं)

Verse 146

سَأَصۡرِفُ عَنۡ ءَايَـٰتِىَ ٱلَّذِينَ يَتَكَبَّرُونَ فِى ٱلۡأَرۡضِ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّ وَإِن يَرَوۡاْ ڪُلَّ ءَايَةٍ لَّا يُؤۡمِنُواْ بِہَا وَإِن يَرَوۡاْ سَبِيلَ ٱلرُّشۡدِ لَا يَتَّخِذُوهُ سَبِيلاً وَإِن يَرَوۡاْ سَبِيلَ ٱلۡغَىِّ يَتَّخِذُوهُ سَبِيلاً ۚ ذَٲلِكَ بِأَنَّہُمۡ كَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا وَكَانُواْ عَنۡہَا غَـٰفِلِينَ

जो लोग (ख़ुदा की) ज़मीन पर नाहक़ अकड़ते फिरते हैं उनको अपनी आयतों से बहुत जल्द फेर दूंगा और मै क्या फेरूंगा ख़ुदा (उसका दिल ऐसा सख्त है कि) अगर दुनिया जहॉन के सारे मौजिज़े भी देखते तो भी ये उन पर ईमान न लाएगें और (अगर) सीधा रास्ता भी देख पाएं तो भी अपनी राह न जाएगें और अगर गुमराही की राह देख लेगें तो झटपट उसको अपना तरीक़ा बना लेगें ये कजरवी इस सबब से हुई कि उन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया और उनसे ग़फलत करते रहे

Verse 147

وَٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا وَلِقَآءِ ٱلۡأَخِرَةِ حَبِطَتۡ أَعۡمَـٰلُهُمۡ ۚ هَلۡ يُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

और जिन लोगों ने हमारी आयतों को और आख़िरत की हुज़ूरी को झूठलाया उनका सब किया कराया अकारत हो गया, उनको बस उन्हीं आमाल की जज़ा या सज़ा दी जाएगी जो वह करते थे

Verse 148

وَٱتَّخَذَ قَوۡمُ مُوسَىٰ مِنۢ بَعۡدِهِۦ مِنۡ حُلِيِّهِمۡ عِجۡلاً جَسَدًا لَّهُ ۥ خُوَارٌ ۚ أَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّهُ ۥ لَا يُكَلِّمُهُمۡ وَلَا يَہۡدِيہِمۡ سَبِيلاً‌ ۢ ٱتَّخَذُوهُ وَڪَانُواْ ظَـٰلِمِينَ

और मूसा की क़ौम ने (कोहेतूर पर) उनके जाने के बाद अपने जेवरों को (गलाकर) एक बछड़े की मूरत बनाई (यानि) एक जिस्म जिसमें गाए की सी आवाज़ थी (अफसोस) क्या उन लोगों ने इतना भी न देखा कि वह न तो उनसे बात ही कर सकता और न किसी तरह की हिदायत ही कर सकता है (खुलासा) उन लोगों ने उसे (अपनी माबूद बना लिया)

Verse 149

وَلَمَّا سُقِطَ فِىٓ أَيۡدِيهِمۡ وَرَأَوۡاْ أَنَّهُمۡ قَدۡ ضَلُّواْ قَالُواْ لَٮِٕن لَّمۡ يَرۡحَمۡنَا رَبُّنَا وَيَغۡفِرۡ لَنَا لَنَڪُونَنَّ مِنَ ٱلۡخَـٰسِرِينَ

और आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते थे और जब वह पछताए और उन्होने अपने को यक़ीनी गुमराह देख लिया तब कहने लगे कि अगर हमारा परदिगार हम पर रहम नहीं करेगा और हमारा कुसूर न माफ़ करेगा तो हम यक़ीनी घाटा उठाने वालों में हो जाएगें

Verse 150

وَلَمَّا رَجَعَ مُوسَىٰٓ إِلَىٰ قَوۡمِهِۦ غَضۡبَـٰنَ أَسِفًا قَالَ بِئۡسَمَا خَلَفۡتُمُونِى مِنۢ بَعۡدِىٓ‌ ۖ أَعَجِلۡتُمۡ أَمۡرَ رَبِّكُمۡ‌ ۖ وَأَلۡقَى ٱلۡأَلۡوَاحَ وَأَخَذَ بِرَأۡسِ أَخِيهِ يَجُرُّهُ ۥۤ إِلَيۡهِ ۚ قَالَ ٱبۡنَ أُمَّ إِنَّ ٱلۡقَوۡمَ ٱسۡتَضۡعَفُونِى وَكَادُواْ يَقۡتُلُونَنِى فَلَا تُشۡمِتۡ بِىَ ٱلۡأَعۡدَآءَ وَلَا تَجۡعَلۡنِى مَعَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ

और जब मूसा पलट कर अपनी क़ौम की तरफ आए तो (ये हालत देखकर) रंज व गुस्से में (अपनी क़ौम से) कहने लगे कि तुम लोगों ने मेरे बाद बहुत बुरी हरकत की-तुम लोग अपने परवरदिगार के हुक्म (मेरे आने में) किस कदर जल्दी कर बैठे और (तौरैत की) तख्तियों को फेंक दिया और अपने भाई (हारून) के सर (के बालों को पकड़ कर अपनी तर फ खींचने लगे) उस पर हारून ने कहा ऐ मेरे मांजाए (भाई) मै क्या करता क़ौम ने मुझे हक़ीर समझा और (मेरा कहना न माना) बल्कि क़रीब था कि मुझे मार डाले तो मुझ पर दुश्मनों को न हॅसवाइए और मुझे उन ज़ालिम लोगों के साथ न करार दीजिए

Verse 151

قَالَ رَبِّ ٱغۡفِرۡ لِى وَلِأَخِى وَأَدۡخِلۡنَا فِى رَحۡمَتِكَ‌ ۖ وَأَنتَ أَرۡحَمُ ٱلرَّٲحِمِينَ

तब) मूसा ने कहा ऐ मेरे परवरदिगार मुझे और मेरे भाई को बख्श दे और हमें अपनी रहमत में दाख़िल कर और तू सबसे बढ़के रहम करने वाला है

Verse 152

إِنَّ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ ٱلۡعِجۡلَ سَيَنَالُهُمۡ غَضَبٌ مِّن رَّبِّهِمۡ وَذِلَّةٌ فِى ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا ۚ وَكَذَٲلِكَ نَجۡزِى ٱلۡمُفۡتَرِينَ

बेशक जिन लोगों ने बछड़े को (अपना माबूद) बना लिया उन पर अनक़रीब ही उनके परवरदिगार की तरफ से अज़ाब नाज़िल होगा और दुनियावी ज़िन्दगी में ज़िल्लत (उसके अलावा) और हम बोहतान बॉधने वालों की ऐसी ही सज़ा करते हैं

Verse 153

وَٱلَّذِينَ عَمِلُواْ ٱلسَّيِّـَٔاتِ ثُمَّ تَابُواْ مِنۢ بَعۡدِهَا وَءَامَنُوٓاْ إِنَّ رَبَّكَ مِنۢ بَعۡدِهَا لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ

और जिन लोगों ने बुरे काम किए फिर उसके बाद तौबा कर ली और ईमान लाए तो बेशक तुम्हारा परवरदिगार तौबा के बाद ज़रूर बख्शने वाला मेहरबान है

Verse 154

وَلَمَّا سَكَتَ عَن مُّوسَى ٱلۡغَضَبُ أَخَذَ ٱلۡأَلۡوَاحَ‌ ۖ وَفِى نُسۡخَتِہَا هُدًى وَرَحۡمَةٌ لِّلَّذِينَ هُمۡ لِرَبِّہِمۡ يَرۡهَبُونَ

और जब मूसा का गुस्सा ठण्डा हुआ तो (तौरैत) की तख्तियों को (ज़मीन से) उठा लिया और तौरैत के नुस्खे में जो लोग अपने परवरदिगार से डरते है उनके लिए हिदायत और रहमत है

Verse 155

وَٱخۡتَارَ مُوسَىٰ قَوۡمَهُ ۥ سَبۡعِينَ رَجُلاً لِّمِيقَـٰتِنَا‌ ۖ فَلَمَّآ أَخَذَتۡہُمُ ٱلرَّجۡفَةُ قَالَ رَبِّ لَوۡ شِئۡتَ أَهۡلَكۡتَهُم مِّن قَبۡلُ وَإِيَّـٰىَ‌ ۖ أَتُہۡلِكُنَا بِمَا فَعَلَ ٱلسُّفَهَآءُ مِنَّآ‌ ۖ إِنۡ هِىَ إِلَّا فِتۡنَتُكَ تُضِلُّ بِہَا مَن تَشَآءُ وَتَہۡدِى مَن تَشَآءُ‌ ۖ أَنتَ وَلِيُّنَا فَٱغۡفِرۡ لَنَا وَٱرۡحَمۡنَا‌ ۖ وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلۡغَـٰفِرِينَ

और मूसा ने अपनी क़ौम से हमारा वायदा पूरा करने को (कोहतूर पर ले जाने के वास्ते) सत्तर आदमियों को चुना फिर जब उनको ज़लज़ले ने आ पकड़ा तो हज़रत मूसा ने अर्ज़ किया परवरदिगार अगर तू चाहता तो मुझको और उन सबको पहले ही हलाक़ कर डालता क्या हम में से चन्द बेवकूफों की करनी की सज़ा में हमको हलाक़ करता है ये तो सिर्फ तेरी आज़माइश थी तू जिसे चाहे उसे गुमराही में छोड़ दे और जिसको चाहे हिदायत दे तू ही हमारा मालिक है तू ही हमारे कुसूर को माफ कर और हम पर रहम कर और तू तो तमाम बख्शने वालों से कहीें बेहतर है

Verse 156

۞ وَٱڪۡتُبۡ لَنَا فِى هَـٰذِهِ ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةً وَفِى ٱلۡأَخِرَةِ إِنَّا هُدۡنَآ إِلَيۡكَ ۚ قَالَ عَذَابِىٓ أُصِيبُ بِهِۦ مَنۡ أَشَآءُ‌ ۖ وَرَحۡمَتِى وَسِعَتۡ كُلَّ شَىۡءٍ ۚ فَسَأَكۡتُبُہَا لِلَّذِينَ يَتَّقُونَ وَيُؤۡتُونَ ٱلزَّڪَوٰةَ وَٱلَّذِينَ هُم بِـَٔايَـٰتِنَا يُؤۡمِنُونَ

और तू ही इस दुनिया (फ़ानी) और आख़िरत में हमारे वास्ते भलाई के लिए लिख ले हम तेरी ही तरफ रूझू करते हैं ख़ुदा ने फरमाया जिसको मैं चाहता हूँ (मुस्तहक़ समझकर) अपना अज़ाब पहुँचा देता हूँ और मेरी रहमत हर चीज़ पर छाई हैं मै तो उसे बहुत जल्द ख़ास उन लोगों के लिए लिख दूँगा (जो बुरी बातों से) बचते रहेंगे और ज़कात दिया करेंगे और जो हमारी बातों पर ईमान रखा करेंगें

Verse 157

ٱلَّذِينَ يَتَّبِعُونَ ٱلرَّسُولَ ٱلنَّبِىَّ ٱلۡأُمِّىَّ ٱلَّذِى يَجِدُونَهُ ۥ مَكۡتُوبًا عِندَهُمۡ فِى ٱلتَّوۡرَٮٰةِ وَٱلۡإِنجِيلِ يَأۡمُرُهُم بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَيَنۡہَٮٰهُمۡ عَنِ ٱلۡمُنڪَرِ وَيُحِلُّ لَهُمُ ٱلطَّيِّبَـٰتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيۡهِمُ ٱلۡخَبَـٰٓٮِٕثَ وَيَضَعُ عَنۡهُمۡ إِصۡرَهُمۡ وَٱلۡأَغۡلَـٰلَ ٱلَّتِى كَانَتۡ عَلَيۡهِمۡ ۚ فَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِهِۦ وَعَزَّرُوهُ وَنَصَرُوهُ وَٱتَّبَعُواْ ٱلنُّورَ ٱلَّذِىٓ أُنزِلَ مَعَهُ ۥۤ‌ ۙ أُوْلَـٰٓٮِٕكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ

(यानि) जो लोग हमारे बनी उल उम्मी पैग़म्बर के क़दम बा क़दम चलते हैं जिस (की बशारत) को अपने हॉ तौरैत और इन्जील में लिखा हुआ पाते है (वह नबी) जो अच्छे काम का हुक्म देता है और बुरे काम से रोकता है और जो पाक व पाकीज़ा चीजे तो उन पर हलाल और नापाक गन्दी चीजे उन पर हराम कर देता है और (सख्त एहकाम का) बोझ जो उनकी गर्दन पर था और वह फन्दे जो उन पर (पड़े हुए) थे उनसे हटा देता है पस (याद रखो कि) जो लोग (नबी मोहम्मद) पर ईमान लाए और उसकी इज्ज़त की और उसकी मदद की और उस नूर (क़ुरान) की पैरवी की जो उसके साथ नाज़िल हुआ है तो यही लोग अपनी दिली मुरादे पाएंगें

Verse 158

قُلۡ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنِّى رَسُولُ ٱللَّهِ إِلَيۡڪُمۡ جَمِيعًا ٱلَّذِى لَهُ ۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَـٰوَٲتِ وَٱلۡأَرۡضِ‌ ۖ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ يُحۡىِۦ وَيُمِيتُ‌ ۖ فَـَٔامِنُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِ ٱلنَّبِىِّ ٱلۡأُمِّىِّ ٱلَّذِى يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَڪَلِمَـٰتِهِۦ وَٱتَّبِعُوهُ لَعَلَّڪُمۡ تَهۡتَدُونَ

(ऐ रसूल) तुम (उन लोगों से) कह दो कि लोगों में तुम सब लोगों के पास उस ख़ुदा का भेजा हुआ (पैग़म्बर) हूँ जिसके लिए ख़ास सारे आसमान व ज़मीन की बादशाहत (हुकूमत) है उसके सिवा और कोई माबूद नहीं वही ज़िन्दा करता है वही मार डालता है पस (लोगों) ख़ुदा और उसके रसूल नबी उल उम्मी पर ईमान लाओ जो (ख़ुद भी) ख़ुदा पर और उसकी बातों पर (दिल से) ईमान रखता है और उसी के क़दम बा क़दम चलो ताकि तुम हिदायत पाओ

Verse 159

وَمِن قَوۡمِ مُوسَىٰٓ أُمَّةٌ يَہۡدُونَ بِٱلۡحَقِّ وَبِهِۦ يَعۡدِلُونَ

और मूसा की क़ौम के कुछ लोग ऐसे भी है जो हक़ बात की हिदायत भी करते हैं और हक़ के (मामलात में) इन्साफ़ भी करते हैं

Verse 160

وَقَطَّعۡنَـٰهُمُ ٱثۡنَتَىۡ عَشۡرَةَ أَسۡبَاطًا أُمَمًا ۚ وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ إِذِ ٱسۡتَسۡقَٮٰهُ قَوۡمُهُ ۥۤ أَنِ ٱضۡرِب بِّعَصَاكَ ٱلۡحَجَرَ‌ ۖ فَٱنۢبَجَسَتۡ مِنۡهُ ٱثۡنَتَا عَشۡرَةَ عَيۡنًا‌ ۖ قَدۡ عَلِمَ ڪُلُّ أُنَاسٍ مَّشۡرَبَهُمۡ ۚ وَظَلَّلۡنَا عَلَيۡهِمُ ٱلۡغَمَـٰمَ وَأَنزَلۡنَا عَلَيۡهِمُ ٱلۡمَنَّ وَٱلسَّلۡوَىٰ‌ ۖ ڪُلُواْ مِن طَيِّبَـٰتِ مَا رَزَقۡنَـٰڪُمۡ ۚ وَمَا ظَلَمُونَا وَلَـٰكِن ڪَانُوٓاْ أَنفُسَہُمۡ يَظۡلِمُونَ

और हमने बनी ईसराइल के एक एक दादा की औलाद को जुदा जुदा बारह गिरोह बना दिए और जब मूसा की क़ौम ने उनसे पानी मॉगा तो हमने उनके पास वही भेजी कि तुम अपनी छड़ी पत्थर पर मारो (छड़ी मारना था) कि उस पत्थर से पानी के बारह चश्मे फूट निकले और ऐसे साफ साफ अलग अलग कि हर क़बीले ने अपना अपना घाट मालूम कर लिया और हमने बनी ईसराइल पर अब्र (बादल) का साया किया और उन पर मन व सलवा (सी नेअमत) नाज़िल की (लोगों) जो पाक (पाकीज़ा) चीज़े तुम्हें दी हैं उन्हें (शौक़ से खाओ पियो) और उन लोगों ने (नाफरमानी करके) कुछ हमारा नहीं बिगाड़ा बल्कि अपना आप ही बिगाड़ते हैं

Verse 161

وَإِذۡ قِيلَ لَهُمُ ٱسۡكُنُواْ هَـٰذِهِ ٱلۡقَرۡيَةَ وَڪُلُواْ مِنۡهَا حَيۡثُ شِئۡتُمۡ وَقُولُواْ حِطَّةٌ وَٱدۡخُلُواْ ٱلۡبَابَ سُجَّدًا نَّغۡفِرۡ لَكُمۡ خَطِيٓـَٔـٰتِڪُمۡ ۚ سَنَزِيدُ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

और जब उनसे कहा गया कि उस गाँव में जाकर रहो सहो और उसके मेवों से जहाँ तुम्हारा जी चाहे (शौक़ से) खाओ (पियो) और मुँह से हुतमा कहते और सजदा करते हुए दरवाजे में दाखिल हो तो हम तुम्हारी ख़ताए बख्श देगें और नेकी करने वालों को हम कुछ ज्यादा ही देगें

Verse 162

فَبَدَّلَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنۡہُمۡ قَوۡلاً غَيۡرَ ٱلَّذِى قِيلَ لَهُمۡ فَأَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمۡ رِجۡزًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ بِمَا ڪَانُواْ يَظۡلِمُونَ

तो ज़ालिमों ने जो बात उनसे कही गई थी उसे बदल कर कुछ और कहना शुरू किया तो हमने उनकी शरारतों की बदौलत उन पर आसमान से अज़ाब भेज दिया

Verse 163

وَسۡـَٔلۡهُمۡ عَنِ ٱلۡقَرۡيَةِ ٱلَّتِى ڪَانَتۡ حَاضِرَةَ ٱلۡبَحۡرِ إِذۡ يَعۡدُونَ فِى ٱلسَّبۡتِ إِذۡ تَأۡتِيهِمۡ حِيتَانُهُمۡ يَوۡمَ سَبۡتِهِمۡ شُرَّعًا وَيَوۡمَ لَا يَسۡبِتُونَ‌ ۙ لَا تَأۡتِيهِمۡ ۚ ڪَذَٲلِكَ نَبۡلُوهُم بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ

और (ऐ रसूल) उनसे ज़रा उस गाँव का हाल तो पूछो जो दरिया के किनारे वाक़ऐ था जब ये लोग उनके बुज़ुर्ग शुम्बे (सनीचर) के दिन ज्यादती करने लगे कि जब उनका शुम्बे (वाला इबादत का) दिन होता तब तो मछलियाँ सिमट कर उनके सामने पानी पर उभर के आ जाती और जब उनका शुम्बा (वाला इबादत का) दिन न होता तो मछलियॉ उनके पास ही न फटकतीं और चॅूकि ये लोग बदचलन थे उस दरजे से हम भी उनकी यूं ही आज़माइश किया करते थे

Verse 164

وَإِذۡ قَالَتۡ أُمَّةٌ مِّنۡہُمۡ لِمَ تَعِظُونَ قَوۡمًا‌ ۙ ٱللَّهُ مُهۡلِكُهُمۡ أَوۡ مُعَذِّبُہُمۡ عَذَابًا شَدِيدًا‌ ۖ قَالُواْ مَعۡذِرَةً إِلَىٰ رَبِّكُمۡ وَلَعَلَّهُمۡ يَتَّقُونَ

और जब उनमें से एक जमाअत ने (उन लोगों में से जो शुम्बे के दिन शिकार को मना करते थे) कहा कि जिन्हें ख़ुदा हलाक़ करना या सख्त अज़ाब में मुब्तिला करना चाहता है उन्हें (बेफायदे) क्यो नसीहत करते हो तो वह कहने लगे कि फक़त तुम्हारे परवरदिगार में (अपने को) इल्ज़ाम से बचाने के लिए यायद इसलिए कि ये लोग परहेज़गारी एख्तियार करें

Verse 165

فَلَمَّا نَسُواْ مَا ذُڪِّرُواْ بِهِۦۤ أَنجَيۡنَا ٱلَّذِينَ يَنۡہَوۡنَ عَنِ ٱلسُّوٓءِ وَأَخَذۡنَا ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ بِعَذَابِۭ بَـِٔيسِۭ بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ

फिर जब वह लोग जिस चीज़ की उन्हें नसीहत की गई थी उसे भूल गए तो हमने उनको तो तजावीज़ (नजात) दे दी जो बुरे काम से लोगों को रोकते थे और जो लोग ज़ालिम थे उनको उनकी बद चलनी की वजह से बड़े अज़ाब में गिरफ्तार किया

Verse 166

فَلَمَّا عَتَوۡاْ عَن مَّا نُہُواْ عَنۡهُ قُلۡنَا لَهُمۡ كُونُواْ قِرَدَةً خَـٰسِـِٔينَ

फिर जिस बात की उन्हें मुमानिअत (रोक) की गई थी जब उन लोगों ने उसमें सरकशी की तो हमने हुक्म दिया कि तुम ज़लील और ख़्वार (धुत्कारे) हुए बन्दर बन जाओ (और वह बन गए)

Verse 167

وَإِذۡ تَأَذَّنَ رَبُّكَ لَيَبۡعَثَنَّ عَلَيۡهِمۡ إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡقِيَـٰمَةِ مَن يَسُومُهُمۡ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ ۗ إِنَّ رَبَّكَ لَسَرِيعُ ٱلۡعِقَابِ‌ ۖ وَإِنَّهُ ۥ لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ

(ऐ रसूल वह वक्त याद दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने पुकार पुकार के (बनी ईसराइल से कह दिया था कि वह क़यामत तक उन पर ऐसे हाक़िम को मुसल्लत देखेगा जो उन्हें बुरी बुरी तकलीफें देता रहे क्योंकि) इसमें तो शक़ ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बहुत जल्द अज़ाब करने वाला है और इसमें भी शक़ नहीं कि वह बड़ा बख्शने वाला (मेहरबान) भी है

Verse 168

وَقَطَّعۡنَـٰهُمۡ فِى ٱلۡأَرۡضِ أُمَمًا‌ ۖ مِّنۡهُمُ ٱلصَّـٰلِحُونَ وَمِنۡہُمۡ دُونَ ذَٲلِكَ‌ ۖ وَبَلَوۡنَـٰهُم بِٱلۡحَسَنَـٰتِ وَٱلسَّيِّـَٔاتِ لَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ

और हमने उनको रूए ज़मीन में गिरोह गिरोह तितिर बितिर कर दिया उनमें के कुछ लोग तो नेक हैं और कुछ लोग और तरह के (बदकार) हैं और हमने उन्हें सुख और दुख (दोनो तरह) से आज़माया ताकि वह (शरारत से) बाज़ आए

Verse 169

فَخَلَفَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡ خَلۡفٌ وَرِثُواْ ٱلۡكِتَـٰبَ يَأۡخُذُونَ عَرَضَ هَـٰذَا ٱلۡأَدۡنَىٰ وَيَقُولُونَ سَيُغۡفَرُ لَنَا وَإِن يَأۡتِہِمۡ عَرَضٌ مِّثۡلُهُ ۥ يَأۡخُذُوهُ ۚ أَلَمۡ يُؤۡخَذۡ عَلَيۡہِم مِّيثَـٰقُ ٱلۡكِتَـٰبِ أَن لَّا يَقُولُواْ عَلَى ٱللَّهِ إِلَّا ٱلۡحَقَّ وَدَرَسُواْ مَا فِيهِ ۗ وَٱلدَّارُ ٱلۡأَخِرَةُ خَيۡرٌ لِّلَّذِينَ يَتَّقُونَ ۗ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ

फिर उनके बाद कुछ जानशीन हुए जो किताब (ख़ुदा तौरैत) के तो वारिस बने (मगर लोगों के कहने से एहकामे ख़ुदा को बदलकर (उसके ऐवज़) नापाक कमीनी दुनिया के सामान ले लेते हैं (और लुत्फ तो ये है) कहते हैं कि हम तो अनक़रीब बख्श दिए जाएंगें (और जो लोग उन पर तान करते हैं) अगर उनके पास भी वैसा ही (दूसरा सामान आ जाए तो उसे ये भी न छोड़े और) ले ही लें क्या उनसे किताब (ख़ुदा तौरैत) का एहदो पैमान नहीं लिया गया था कि ख़ुदा पर सच के सिवा (झूठ कभी) नहीं कहेगें और जो कुछ उस किताब में है उन्होनें (अच्छी तरह) पढ़ लिया है और आख़िर का घर तो उन्हीं लोगों के वास्ते ख़ास है जो परहेज़गार हैं तो क्या तुम (इतना भी नहीं समझते)

Verse 170

وَٱلَّذِينَ يُمَسِّكُونَ بِٱلۡكِتَـٰبِ وَأَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ إِنَّا لَا نُضِيعُ أَجۡرَ ٱلۡمُصۡلِحِينَ

और जो लोग किताब (ख़ुदा) को मज़बूती से पकड़े हुए हैं और पाबन्दी से नमाज़ अदा करते हैं (उन्हें उसका सवाब ज़रूर मिलेगा क्योंकि) हम हरगिज़ नेकोकारो का सवाब बरबाद नहीं करते

Verse 171

۞ وَإِذۡ نَتَقۡنَا ٱلۡجَبَلَ فَوۡقَهُمۡ كَأَنَّهُ ۥ ظُلَّةٌ وَظَنُّوٓاْ أَنَّهُ ۥ وَاقِعُۢ بِہِمۡ خُذُواْ مَآ ءَاتَيۡنَـٰكُم بِقُوَّةٍ وَٱذۡكُرُواْ مَا فِيهِ لَعَلَّكُمۡ تَتَّقُونَ

तो (ऐ रसूल यहूद को याद दिलाओ) जब हम ने उन (के सरों) पर पहाड़ को इस तरह लटका दिया कि गोया साएबान (छप्पर) था और वह लोग समझ चुके थे कि उन पर अब गिरा और हमने उनको हुक्म दिया कि जो कुछ हमने तुम्हें अता किया है उसे मज़बूती से पकड़ लो और जो कुछ उसमें लिखा है याद रखो ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ

Verse 172

وَإِذۡ أَخَذَ رَبُّكَ مِنۢ بَنِىٓ ءَادَمَ مِن ظُهُورِهِمۡ ذُرِّيَّتَہُمۡ وَأَشۡہَدَهُمۡ عَلَىٰٓ أَنفُسِہِمۡ أَلَسۡتُ بِرَبِّكُمۡ‌ ۖ قَالُواْ بَلَىٰ‌ ۛ شَهِدۡنَآ‌ ۛ أَن تَقُولُواْ يَوۡمَ ٱلۡقِيَـٰمَةِ إِنَّا ڪُنَّا عَنۡ هَـٰذَا غَـٰفِلِينَ

और उसे रसूल वह वक्त भी याद (दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने आदम की औलाद से बस्तियों से (बाहर निकाल कर) उनकी औलाद से खुद उनके मुक़ाबले में एक़रार कर लिया (पूछा) कि क्या मैं तुम्हारा परवरदिगार नहीं हूँ तो सब के सब बोले हाँ हम उसके गवाह हैं ये हमने इसलिए कहा कि ऐसा न हो कहीं तुम क़यामत के दिन बोल उठो कि हम तो उससे बिल्कुल बे ख़बर थे

Verse 173

أَوۡ تَقُولُوٓاْ إِنَّمَآ أَشۡرَكَ ءَابَآؤُنَا مِن قَبۡلُ وَڪُنَّا ذُرِّيَّةً مِّنۢ بَعۡدِهِمۡ‌ ۖ أَفَتُہۡلِكُنَا بِمَا فَعَلَ ٱلۡمُبۡطِلُونَ

या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो बाप दादाओं ही ने पहले शिर्क किया था और हम तो उनकी औलाद थे (कि) उनके बाद दुनिया में आए तो क्या हमें उन लोगों के ज़ुर्म की सज़ा में हलाक करेगा जो पहले ही बातिल कर चुके

Verse 174

وَكَذَٲلِكَ نُفَصِّلُ ٱلۡأَيَـٰتِ وَلَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ

और हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं और ताकि वह लोग (अपनी ग़लती से) बाज़ आएं

Verse 175

وَٱتۡلُ عَلَيۡهِمۡ نَبَأَ ٱلَّذِىٓ ءَاتَيۡنَـٰهُ ءَايَـٰتِنَا فَٱنسَلَخَ مِنۡهَا فَأَتۡبَعَهُ ٱلشَّيۡطَـٰنُ فَكَانَ مِنَ ٱلۡغَاوِينَ

और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्श का हाल पढ़ कर सुना दो जिसे हमने अपनी आयतें अता की थी फिर वह उनसे निकल भागा तो शैतान ने उसका पीछा पकड़ा और आख़िरकार वह गुमराह हो गया

Verse 176

وَلَوۡ شِئۡنَا لَرَفَعۡنَـٰهُ بِہَا وَلَـٰكِنَّهُ ۥۤ أَخۡلَدَ إِلَى ٱلۡأَرۡضِ وَٱتَّبَعَ هَوَٮٰهُ ۚ فَمَثَلُهُ ۥ كَمَثَلِ ٱلۡڪَلۡبِ إِن تَحۡمِلۡ عَلَيۡهِ يَلۡهَثۡ أَوۡ تَتۡرُڪۡهُ يَلۡهَث ۚ ذَّٲلِكَ مَثَلُ ٱلۡقَوۡمِ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا ۚ فَٱقۡصُصِ ٱلۡقَصَصَ لَعَلَّهُمۡ يَتَفَكَّرُونَ

और अगर हम चाहें तो हम उसे उन्हें आयतों की बदौलत बुलन्द मरतबा कर देते मगर वह तो ख़ुद ही पस्ती (नीचे) की तरफ झुक पड़ा और अपनी नफसानी ख्वाहिश का ताबेदार बन बैठा तो उसकी मसल है कि अगर उसको धुत्कार दो तो भी ज़बान निकाले रहे और उसको छोड़ दो तो भी ज़बान निकले रहे ये मसल उन लोगों की है जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो (ऐ रसूल) ये क़िस्से उन लोगों से बयान कर दो ताकि ये लोग खुद भी ग़ौर करें

Verse 177

سَآءَ مَثَلاً ٱلۡقَوۡمُ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا وَأَنفُسَہُمۡ كَانُواْ يَظۡلِمُونَ

जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया है उनकी भी क्या बुरी मसल है और अपनी ही जानों पर सितम ढाते रहे

Verse 178

مَن يَہۡدِ ٱللَّهُ فَهُوَ ٱلۡمُهۡتَدِى‌ ۖ وَمَن يُضۡلِلۡ فَأُوْلَـٰٓٮِٕكَ هُمُ ٱلۡخَـٰسِرُونَ

राह पर बस वही शख़्श है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे और जिनको गुमराही में छोड़ दे तो वही लोग घाटे में हैं

Verse 179

وَلَقَدۡ ذَرَأۡنَا لِجَهَنَّمَ ڪَثِيرًا مِّنَ ٱلۡجِنِّ وَٱلۡإِنسِ‌ ۖ لَهُمۡ قُلُوبٌ لَّا يَفۡقَهُونَ بِہَا وَلَهُمۡ أَعۡيُنٌ لَّا يُبۡصِرُونَ بِہَا وَلَهُمۡ ءَاذَانٌ لَّا يَسۡمَعُونَ بِہَآ ۚ أُوْلَـٰٓٮِٕكَ كَٱلۡأَنۡعَـٰمِ بَلۡ هُمۡ أَضَلُّ ۚ أُوْلَـٰٓٮِٕكَ هُمُ ٱلۡغَـٰفِلُونَ

और गोया हमने (ख़ुदा) बहुतेरे जिन्नात और आदमियों को जहन्नुम के वास्ते पैदा किया और उनके दिल तो हैं (मगर कसदन) उन से देखते ही नहीं और उनके कान भी है (मगर) उनसे सुनने का काम ही नहीं लेते (खुलासा) ये लोग गोया जानवर हैं बल्कि उनसे भी कहीं गए गुज़रे हुए यही लोग (अमूर हक़) से बिल्कुल बेख़बर हैं

Verse 180

وَلِلَّهِ ٱلۡأَسۡمَآءُ ٱلۡحُسۡنَىٰ فَٱدۡعُوهُ بِہَا‌ ۖ وَذَرُواْ ٱلَّذِينَ يُلۡحِدُونَ فِىٓ أَسۡمَـٰٓٮِٕهِۦ ۚ سَيُجۡزَوۡنَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

और अच्छे (अच्छे) नाम ख़ुदा ही के ख़ास हैं तो उसे उन्हीं नामों में पुकारो और जो लोग उसके नामों में कुफ्र करते हैं उन्हें (उनके हाल पर) छोड़ दो और वह बहुत जल्द अपने करतूत की सज़ाएं पाएंगें

Verse 181

وَمِمَّنۡ خَلَقۡنَآ أُمَّةٌ يَہۡدُونَ بِٱلۡحَقِّ وَبِهِۦ يَعۡدِلُونَ

और हमारी मख़लूक़ात से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दीने हक़ की हिदायत करते हैं और हक़ से इन्साफ़ भी करते हैं

Verse 182

وَٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَـٰتِنَا سَنَسۡتَدۡرِجُهُم مِّنۡ حَيۡثُ لَا يَعۡلَمُونَ

और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया हम उन्हें बहुत जल्द इस तरह आहिस्ता आहिस्ता (जहन्नुम में) ले जाएंगें कि उन्हें ख़बर भी न होगी

Verse 183

وَأُمۡلِى لَهُمۡ ۚ إِنَّ كَيۡدِى مَتِينٌ

और मैं उन्हें (दुनिया में) ढील दूंगा बेशक मेरी तद्बीर (पुख्ता और) मज़बूत है

Verse 184

أَوَلَمۡ يَتَفَكَّرُواْ ۗ مَا بِصَاحِبِہِم مِّن جِنَّةٍ ۚ إِنۡ هُوَ إِلَّا نَذِيرٌ مُّبِينٌ

क्या उन लोगों ने इतना भी ख्याल न किया कि आख़िर उनके रफीक़ (मोहम्मद ) को कुछ जुनून तो नहीं वह तो बस खुल्लम खुल्ला (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाले हैं

Verse 185

أَوَلَمۡ يَنظُرُواْ فِى مَلَكُوتِ ٱلسَّمَـٰوَٲتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا خَلَقَ ٱللَّهُ مِن شَىۡءٍ وَأَنۡ عَسَىٰٓ أَن يَكُونَ قَدِ ٱقۡتَرَبَ أَجَلُهُمۡ‌ ۖ فَبِأَىِّ حَدِيثِۭ بَعۡدَهُ ۥ يُؤۡمِنُونَ

क्या उन लोगों ने आसमान व ज़मीन की हुकूमत और ख़ुदा की पैदा की हुई चीज़ों में ग़ौर नहीं किया और न इस बात में कि यायद उनकी मौत क़रीब आ गई हो फिर इतना समझाने के बाद (भला) किस बात पर ईमान लाएंगें

Verse 186

مَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَلَا هَادِىَ لَهُ ۥ ۚ وَيَذَرُهُمۡ فِى طُغۡيَـٰنِہِمۡ يَعۡمَهُونَ

जिसे ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे फिर उसका कोई राहबर नहीं और उन्हीं की सरकशी (व शरारत) में छोड़ देगा कि सरगरदॉ रहें

Verse 187

يَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرۡسَٮٰهَا‌ ۖ قُلۡ إِنَّمَا عِلۡمُهَا عِندَ رَبِّى‌ ۖ لَا يُجَلِّيہَا لِوَقۡتِہَآ إِلَّا هُوَ ۚ ثَقُلَتۡ فِى ٱلسَّمَـٰوَٲتِ وَٱلۡأَرۡضِ ۚ لَا تَأۡتِيكُمۡ إِلَّا بَغۡتَةً ۗ يَسۡـَٔلُونَكَ كَأَنَّكَ حَفِىٌّ عَنۡہَا‌ ۖ قُلۡ إِنَّمَا عِلۡمُهَا عِندَ ٱللَّهِ وَلَـٰكِنَّ أَڪۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ

(ऐ रसूल) तुमसे लोग क़यामत के बारे में पूछा करते हैं कि कहीं उसका कोई वक्त भी तय है तुम कह दो कि उसका इल्म बस फक़त पररवदिगार ही को है वही उसके वक्त मुअय्यन पर उसको ज़ाहिर कर देगा। वह सारे आसमान व ज़मीन में एक कठिन वक्त होगा वह तुम्हारे पास पस अचानक आ जाएगी तुमसे लोग इस तरह पूछते हैं गोया तुम उनसे बखूबी वाक़िफ हो तुम (साफ) कह दो कि उसका इल्म बस ख़ुदा ही को है मगर बहुतेरे लोग नहीं जानते

Verse 188

قُل لَّآ أَمۡلِكُ لِنَفۡسِى نَفۡعًا وَلَا ضَرًّا إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُ ۚ وَلَوۡ كُنتُ أَعۡلَمُ ٱلۡغَيۡبَ لَٱسۡتَڪۡثَرۡتُ مِنَ ٱلۡخَيۡرِ وَمَا مَسَّنِىَ ٱلسُّوٓءُ ۚ إِنۡ أَنَا۟ إِلَّا نَذِيرٌ وَبَشِيرٌ لِّقَوۡمٍ يُؤۡمِنُونَ

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै ख़ुद अपना आप तो एख़तियार रखता ही नहीं न नफे क़ा न ज़रर का मगर बस वही ख़ुदा जो चाहे और अगर (बग़ैर ख़ुदा के बताए) गैब को जानता होता तो यक़ीनन मै अपना बहुत सा फ़ायदा कर लेता और मुझे कभी कोई तकलीफ़ भी न पहुँचती मै तो सिर्फ ईमानदारों को (अज़ाब से डराने वाला) और वेहशत की खुशख़बरी देने वाला हँ

Verse 189

۞ هُوَ ٱلَّذِى خَلَقَكُم مِّن نَّفۡسٍ وَٲحِدَةٍ وَجَعَلَ مِنۡہَا زَوۡجَهَا لِيَسۡكُنَ إِلَيۡہَا‌ ۖ فَلَمَّا تَغَشَّٮٰهَا حَمَلَتۡ حَمۡلاً خَفِيفًا فَمَرَّتۡ بِهِۦ‌ ۖ فَلَمَّآ أَثۡقَلَت دَّعَوَا ٱللَّهَ رَبَّهُمَا لَٮِٕنۡ ءَاتَيۡتَنَا صَـٰلِحًا لَّنَكُونَنَّ مِنَ ٱلشَّـٰكِرِينَ

वह ख़ुदा ही तो है जिसने तुमको एक शख़्श (आदम) से पैदा किया और उसकी बची हुई मिट्टी से उसका जोड़ा भी बना डाला ताकि उसके साथ रहे सहे फिर जब इन्सान अपनी बीबी से हम बिस्तरी करता है तो बीबी एक हलके से हमल से हमला हो जाती है फिर उसे लिए चलती फिरती है फिर जब वह (ज्यादा दिन होने से बोझल हो जाती है तो दोनो (मिया बीबी) अपने परवरदिगार ख़ुदा से दुआ करने लगे कि अगर तो हमें नेक फरज़न्द अता फरमा तो हम ज़रूर तेरे शुक्रगुज़ार होगें

Verse 190

فَلَمَّآ ءَاتَٮٰهُمَا صَـٰلِحًا جَعَلَا لَهُ ۥ شُرَكَآءَ فِيمَآ ءَاتَٮٰهُمَا ۚ فَتَعَـٰلَى ٱللَّهُ عَمَّا يُشۡرِكُونَ

फिर जब ख़ुदा ने उनको नेक (फरज़न्द) अता फ़रमा दिया तो जो (औलाद) ख़ुदा ने उन्हें अता किया था लगे उसमें ख़ुदा का शरीक बनाने तो ख़ुदा (की शान) शिर्क से बहुत ऊँची है

Verse 191

أَيُشۡرِكُونَ مَا لَا يَخۡلُقُ شَيْئًا وَهُمۡ يُخۡلَقُونَ

क्या वह लोग ख़ुदा का शरीक ऐसों को बनाते हैं जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते बल्कि वह ख़ुद (ख़ुदा के) पैदा किए हुए हैं

Verse 192

وَلَا يَسۡتَطِيعُونَ لَهُمۡ نَصۡرًا وَلَآ أَنفُسَہُمۡ يَنصُرُونَ

और न उनकी मदद की कुदरत रखते हैं और न आप अपनी मदद कर सकते हैं

Verse 193

وَإِن تَدۡعُوهُمۡ إِلَى ٱلۡهُدَىٰ لَا يَتَّبِعُوڪُمۡ ۚ سَوَآءٌ عَلَيۡكُمۡ أَدَعَوۡتُمُوهُمۡ أَمۡ أَنتُمۡ صَـٰمِتُونَ

और अगर तुम उन्हें हिदायत की तरफ बुलाओंगे भी तो ये तुम्हारी पैरवी नहीं करने के तुम्हारे वास्ते बराबर है ख्वाह (चाहे) तुम उनको बुलाओ या तुम चुपचाप बैठे रहो

Verse 194

إِنَّ ٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ عِبَادٌ أَمۡثَالُڪُمۡ‌ ۖ فَٱدۡعُوهُمۡ فَلۡيَسۡتَجِيبُواْ لَڪُمۡ إِن كُنتُمۡ صَـٰدِقِينَ

बेशक वह लोग जिनकी तुम ख़ुदा को छोड़कर हाजत करते हो वह (भी) तुम्हारी तरह (ख़ुदा के) बन्दे हैं भला तुम उन्हें पुकार के देखो तो अगर तुम सच्चे हो तो वह तुम्हारी कुछ सुन लें

Verse 195

أَلَهُمۡ أَرۡجُلٌ يَمۡشُونَ بِہَآ‌ ۖ أَمۡ لَهُمۡ أَيۡدٍ يَبۡطِشُونَ بِہَآ‌ ۖ أَمۡ لَهُمۡ أَعۡيُنٌ يُبۡصِرُونَ بِہَآ‌ ۖ أَمۡ لَهُمۡ ءَاذَانٌ يَسۡمَعُونَ بِہَا ۗ قُلِ ٱدۡعُواْ شُرَكَآءَكُمۡ ثُمَّ كِيدُونِ فَلَا تُنظِرُونِ

क्या उनके ऐसे पॉव भी हैं जिनसे चल सकें या उनके ऐसे हाथ भी हैं जिनसे (किसी चीज़ को) पकड़ सके या उनकी ऐसी ऑखे भी है जिनसे देख सकें या उनके ऐसे कान हैं जिनसे सुन सकें (ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि तुम अपने बनाए हुए शरीको को बुलाओ फिर सब मिलकर मुझ पर दॉव चले फिर (मुझे) मोहलत न दो

Verse 196

إِنَّ وَلِـِّۧىَ ٱللَّهُ ٱلَّذِى نَزَّلَ ٱلۡكِتَـٰبَ‌ ۖ وَهُوَ يَتَوَلَّى ٱلصَّـٰلِحِينَ

(फिर देखो मेरा क्या बना सकते हो) बेशक मेरा मालिक व मुमताज़ तो बस ख़ुदा है जिस ने किताब क़ुरान को नाज़िल फरमाया और वही (अपने) नेक बन्दों का हाली (मददगार) है

Verse 197

وَٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسۡتَطِيعُونَ نَصۡرَڪُمۡ وَلَآ أَنفُسَہُمۡ يَنصُرُونَ

और वह लोग (बुत) जिन्हें तुम ख़ुदा के सिवा (अपनी मदद को) पुकारते हो न तो वह तुम्हारी मदद की कुदरत रखते हैं और न ही अपनी मदद कर सकते हैं

Verse 198

وَإِن تَدۡعُوهُمۡ إِلَى ٱلۡهُدَىٰ لَا يَسۡمَعُواْ‌ ۖ وَتَرَٮٰهُمۡ يَنظُرُونَ إِلَيۡكَ وَهُمۡ لَا يُبۡصِرُونَ

और अगर उन्हें हिदायत की तरफ बुलाएगा भी तो ये सुन ही नहीं सकते और तू तो समझता है कि वह तुझे (ऑखें खोले) देख रहे हैं हालॉकि वह देखते नहीं

Verse 199

خُذِ ٱلۡعَفۡوَ وَأۡمُرۡ بِٱلۡعُرۡفِ وَأَعۡرِضۡ عَنِ ٱلۡجَـٰهِلِينَ

(ऐ रसूल) तुम दरगुज़र करना एख्तियार करो और अच्छे काम का हुक्म दो और जाहिलों की तरफ से मुह फेर लो

Verse 200

وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ ٱلشَّيۡطَـٰنِ نَزۡغٌ فَٱسۡتَعِذۡ بِٱللَّهِ ۚ إِنَّهُ ۥ سَمِيعٌ عَلِيمٌ

अगर शैतान की तरफ से तुम्हारी (उम्मत के) दिल में किसी तरह का (वसवसा (शक) पैदा हो तो ख़ुदा से पनाह मॉगों (क्योंकि) उसमें तो शक़ ही नहीं कि वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है

Verse 201

إِنَّ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ إِذَا مَسَّہُمۡ طَـٰٓٮِٕفٌ مِّنَ ٱلشَّيۡطَـٰنِ تَذَڪَّرُواْ فَإِذَا هُم مُّبۡصِرُونَ

बेशक लोग परहेज़गार हैं जब भी उन्हें शैतान का ख्याल छू भी गया तो चौक पड़ते हैं फिर फौरन उनकी ऑखें खुल जाती हैं

Verse 202

وَإِخۡوَٲنُهُمۡ يَمُدُّونَہُمۡ فِى ٱلۡغَىِّ ثُمَّ لَا يُقۡصِرُونَ

उन काफिरों के भाई बन्द शैतान उनको (धर पकड़) गुमराही के तरफ घसीटे जाते हैं फिर किसी तरह की कोताही (भी) नहीं करते

Verse 203

وَإِذَا لَمۡ تَأۡتِهِم بِـَٔايَةٍ قَالُواْ لَوۡلَا ٱجۡتَبَيۡتَهَا ۚ قُلۡ إِنَّمَآ أَتَّبِعُ مَا يُوحَىٰٓ إِلَىَّ مِن رَّبِّى ۚ هَـٰذَا بَصَآٮِٕرُ مِن رَّبِّڪُمۡ وَهُدًى وَرَحۡمَةٌ لِّقَوۡمٍ يُؤۡمِنُونَ

और जब तुम उनके पास कोई (ख़ास) मौजिज़ा नहीं लाते तो कहते हैं कि तुमने उसे क्यों नहीं बना लिया (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै तो बस इसी वही का पाबन्द हूँ जो मेरे परवरदिगार की तरफ से मेरे पास आती है ये (क़ुरान) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (हक़ीकत) की दलीलें हैं

Verse 204

وَإِذَا قُرِئَ ٱلۡقُرۡءَانُ فَٱسۡتَمِعُواْ لَهُ ۥ وَأَنصِتُواْ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ

और ईमानदार लोगों के वास्ते हिदायत और रहमत हैं (लोगों) जब क़ुरान पढ़ा जाए तो कान लगाकर सुनो और चुपचाप रहो ताकि (इसी बहाने) तुम पर रहम किया जाए

Verse 205

وَٱذۡكُر رَّبَّكَ فِى نَفۡسِكَ تَضَرُّعًا وَخِيفَةً وَدُونَ ٱلۡجَهۡرِ مِنَ ٱلۡقَوۡلِ بِٱلۡغُدُوِّ وَٱلۡأَصَالِ وَلَا تَكُن مِّنَ ٱلۡغَـٰفِلِينَ

और अपने परवरदिगार को अपने जी ही में गिड़गिड़ा के और डर के और बहुत चीख़ के नहीं (धीमी) आवाज़ से सुबह व शाम याद किया करो और (उसकी याद से) ग़ाफिल बिल्कुल न हो जाओ

Verse 206

إِنَّ ٱلَّذِينَ عِندَ رَبِّكَ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ عَنۡ عِبَادَتِهِۦ وَيُسَبِّحُونَهُ ۥ وَلَهُ ۥ يَسۡجُدُونَ ۩

बेशक जो लोग (फरिशते बग़ैरह) तुम्हारे परवरदिगार के पास मुक़र्रिब हैं और वह उसकी इबादत से सर कशी नही करते और उनकी तसबीह करते हैं और उसका सजदा करते हैं (206) सजदा