Surah Al-Ankabut
Quran Surah
Surah 29: Al-Ankabut
العنكبوت
Verse count: 69
Opening Bismillah
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं।
Verse 1
الٓمٓ
अलिफ़ लाम मीम
Verse 2
أَحَسِبَ ٱلنَّاسُ أَن يُتۡرَكُوٓاْ أَن يَقُولُوٓاْ ءَامَنَّا وَهُمۡ لَا يُفۡتَنُونَ
क्या लोगों ने ये समझ लिया है कि (सिर्फ) इतना कह देने से कि हम ईमान लाए छोड़ दिए जाएँगे और उनका इम्तेहान न लिया जाएगा
Verse 3
وَلَقَدۡ فَتَنَّا ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ ۖ فَلَيَعۡلَمَنَّ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ صَدَقُواْ وَلَيَعۡلَمَنَّ ٱلۡكَـٰذِبِينَ
और हमने तो उन लोगों का भी इम्तिहान लिया जो उनसे पहले गुज़र गए ग़रज़ ख़ुदा उन लोगों को जो सच्चे (दिल से ईमान लाए) हैं यक़ीनन अलहाएदा देखेगा और झूठों को भी (अलहाएदा) ज़रुर देखेगा
Verse 4
أَمۡ حَسِبَ ٱلَّذِينَ يَعۡمَلُونَ ٱلسَّيِّـَٔاتِ أَن يَسۡبِقُونَا ۚ سَآءَ مَا يَحۡكُمُونَ
क्या जो लोग बुरे बुरे काम करते हैं उन्होंने ये समझ लिया है कि वह हमसे (बचकर) निकल जाएँगे (अगर ऐसा है तो) ये लोग क्या ही बुरे हुक्म लगाते हैं
Verse 5
مَن كَانَ يَرۡجُواْ لِقَآءَ ٱللَّهِ فَإِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ لَأَتٍ ۚ وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ
जो शख्स ख़ुदा से मिलने (क़यामत के आने) की उम्मीद रखता है तो (समझ रखे कि) ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) मीयाद ज़रुर आने वाली है और वह (सबकी) सुनता (और) जानता है
Verse 6
وَمَن جَـٰهَدَ فَإِنَّمَا يُجَـٰهِدُ لِنَفۡسِهِۦۤ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَغَنِىٌّ عَنِ ٱلۡعَـٰلَمِينَ
और जो शख्स (इबादत में) कोशिश करता है तो बस अपने ही वास्ते कोशिश करता है (क्योंकि) इसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा सारे जहाँन (की इबादत) से बेनियाज़ है
Verse 7
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنۡهُمۡ سَيِّـَٔاتِهِمۡ وَلَنَجۡزِيَنَّهُمۡ أَحۡسَنَ ٱلَّذِى كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए हम यक़ीनन उनके गुनाहों की तरफ से कफ्फारा क़रार देगें और ये (दुनिया में) जो आमाल करते थे हम उनके आमाल की उन्हें अच्छी से अच्छी जज़ा अता करेंगे
Verse 8
وَوَصَّيۡنَا ٱلۡإِنسَـٰنَ بِوَٲلِدَيۡهِ حُسۡنًا ۖ وَإِن جَـٰهَدَاكَ لِتُشۡرِكَ بِى مَا لَيۡسَ لَكَ بِهِۦ عِلۡمٌ فَلَا تُطِعۡهُمَآ ۚ إِلَىَّ مَرۡجِعُكُمۡ فَأُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ
और हमने इन्सान को अपने माँ बाप से अच्छा बरताव करने का हुक्म दिया है और (ये भी कि) अगर तुझे तेरे माँ बाप इस बात पर मजबूर करें कि ऐसी चीज़ को मेरा शरीक बना जिन (के शरीक होने) का मुझे इल्म तक नहीं तो उनका कहना न मानना तुम सबको (आख़िर एक दिन) मेरी तरफ लौट कर आना है मै जो कुछ तुम लोग (दुनिया में) करते थे बता दूँगा
Verse 9
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَنُدۡخِلَنَّهُمۡ فِى ٱلصَّـٰلِحِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए हम उन्हें (क़यामत के दिन) ज़रुर नेको कारों में दाख़िल करेंगे
Verse 10
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَقُولُ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ فَإِذَآ أُوذِىَ فِى ٱللَّهِ جَعَلَ فِتۡنَةَ ٱلنَّاسِ كَعَذَابِ ٱللَّهِ وَلَٮِٕن جَآءَ نَصۡرٌ مِّن رَّبِّكَ لَيَقُولُنَّ إِنَّا ڪُنَّا مَعَكُمۡ ۚ أَوَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِأَعۡلَمَ بِمَا فِى صُدُورِ ٱلۡعَـٰلَمِينَ
और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो (ज़बान से तो) कह देते हैं कि हम ख़ुदा पर ईमान लाए फिर जब उनको ख़ुदा के बारे में कुछ तकलीफ़ पहुँची तो वह लोगों की तकलीफ़ देही को अज़ाब के बराबर ठहराते हैं और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की मदद आ पहुँची और तुम्हें फतेह हुई तो यही लोग कहने लगते हैं कि हम भी तो तुम्हारे साथ ही साथ थे भला जो कुछ सारे जहाँन के दिलों में है क्या ख़ुदा बख़ूबी वाक़िफ नहीं (ज़रुर है)
Verse 11
وَلَيَعۡلَمَنَّ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَلَيَعۡلَمَنَّ ٱلۡمُنَـٰفِقِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया ख़ुदा उनको यक़ीनन जानता है और मुनाफेक़ीन को भी ज़रुर जानता है
Verse 12
وَقَالَ ٱلَّذِينَ ڪَفَرُواْ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّبِعُواْ سَبِيلَنَا وَلۡنَحۡمِلۡ خَطَـٰيَـٰكُمۡ وَمَا هُم بِحَـٰمِلِينَ مِنۡ خَطَـٰيَـٰهُم مِّن شَىۡءٍ ۖ إِنَّهُمۡ لَكَـٰذِبُونَ
और कुफ्फार ईमान वालों से कहने लगे कि हमारे तरीक़े पर चलो और (क़यामत में) तुम्हारे गुनाहों (के बोझ) को हम (अपने सर) ले लेंगे हालॉकि ये लोग ज़रा भी तो उनके गुनाह उठाने वाले नहीं ये लोग यक़ीनी झूठे हैं
Verse 13
وَلَيَحۡمِلُنَّ أَثۡقَالَهُمۡ وَأَثۡقَالاً مَّعَ أَثۡقَالِهِمۡ ۖ وَلَيُسۡـَٔلُنَّ يَوۡمَ ٱلۡقِيَـٰمَةِ عَمَّا ڪَانُواْ يَفۡتَرُونَ
और (हाँ) ये लोग अपने (गुनाह के) बोझे तो यक़ीनी उठाएँगें ही और अपने बोझो के साथ जिन्हें गुमराह किया उनके बोझे भी उठाएँगे और जो इफ़ितेरा परदाज़िया ये लोग करते रहे हैं क़यामत के दिन उन से ज़रुर उसकी बाज़पुर्स होगी
Verse 14
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦ فَلَبِثَ فِيهِمۡ أَلۡفَ سَنَةٍ إِلَّا خَمۡسِينَ عَامًا فَأَخَذَهُمُ ٱلطُّوفَانُ وَهُمۡ ظَـٰلِمُونَ
और हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा तो वह उनमें पचास कम हज़ार बरस रहे (और हिदायत किया किए और जब न माना) तो आख़िर तूफान ने उन्हें ले डाला और वह उस वक्त भी सरकश ही थे
Verse 15
فَأَنجَيۡنَـٰهُ وَأَصۡحَـٰبَ ٱلسَّفِينَةِ وَجَعَلۡنَـٰهَآ ءَايَةً لِّلۡعَـٰلَمِينَ
फिर हमने नूह और कश्ती में रहने वालों को बचा लिया और हमने इस वाक़िये को सारी ख़ुदाई के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी क़रार दी
Verse 16
وَإِبۡرَٲهِيمَ إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُ ۖ ذَٲلِڪُمۡ خَيۡرٌ لَّكُمۡ إِن ڪُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ
और इबराहीम को (याद करो) जब उन्होंने कहा कि (भाईयों) ख़ुदा की इबादत करो और उससे डरो अगर तुम समझते बूझते हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
Verse 17
إِنَّمَا تَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَوۡثَـٰنًا وَتَخۡلُقُونَ إِفۡكًا ۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ تَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ لَا يَمۡلِكُونَ لَكُمۡ رِزۡقًا فَٱبۡتَغُواْ عِندَ ٱللَّهِ ٱلرِّزۡقَ وَٱعۡبُدُوهُ وَٱشۡكُرُواْ لَهُ ۥۤ ۖ إِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ
(मगर) तुम लोग तो ख़ुदा को छोड़कर सिर्फ बुतों की परसतिश करते हैं और झूठी बातें (अपने दिल से) गढ़ते हो इसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा को छोड़कर जिन लोगों की तुम परसतिश करते हो वह तुम्हारी रोज़ी का एख्तेयार नही रखते-बस ख़ुदा ही से रोज़ी भी माँगों और उसकी इबादत भी करो उसका शुक्र करो (क्योंकि) तुम लोग (एक दिन) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
Verse 18
وَإِن تُكَذِّبُواْ فَقَدۡ ڪَذَّبَ أُمَمٌ مِّن قَبۡلِكُمۡ ۖ وَمَا عَلَى ٱلرَّسُولِ إِلَّا ٱلۡبَلَـٰغُ ٱلۡمُبِينُ
और (ऐ अहले मक्का) अगर तुमने (मेरे रसूल को) झुठलाया तो (कुछ परवाह नहीं) तुमसे पहले भी तो बहुतेरी उम्मते (अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं और रसूल के ज़िम्मे तो सिर्फ (एहक़ाम का) पहुँचा देना है
Verse 19
أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ ڪَيۡفَ يُبۡدِئُ ٱللَّهُ ٱلۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ۥۤ ۚ إِنَّ ذَٲلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٌ
बस क्या उन लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा किस तरह मख़लूकात को पहले पहल पैदा करता है और फिर उसको दोबारा पैदा करेगा ये तो ख़ुदा के नज़दीक बहुत आसान बात है
Verse 20
قُلۡ سِيرُواْ فِى ٱلۡأَرۡضِ فَٱنظُرُواْ ڪَيۡفَ بَدَأَ ٱلۡخَلۡقَ ۚ ثُمَّ ٱللَّهُ يُنشِئُ ٱلنَّشۡأَةَ ٱلۡأَخِرَةَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ ڪُلِّ شَىۡءٍ قَدِيرٌ
(ऐ रसूल इन लोगों से) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चलफिर कर देखो तो कि ख़ुदा ने किस तरह पहले पहल मख़लूक को पैदा किया फिर (उसी तरह वही) ख़ुदा (क़यामत के दिन) आखिरी पैदाइश पैदा करेगा- बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
Verse 21
يُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ وَيَرۡحَمُ مَن يَشَآءُ ۖ وَإِلَيۡهِ تُقۡلَبُونَ
जिस पर चाहे अज़ाब करे और जिस पर चाहे रहम करे और तुम लोग (सब के सब) उसी की तरफ लौटाए जाओगे
Verse 22
وَمَآ أَنتُم بِمُعۡجِزِينَ فِى ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فِى ٱلسَّمَآءِ ۖ وَمَا لَڪُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِن وَلِىٍّ وَلَا نَصِيرٍ
और न तो तुम ज़मीन ही में ख़ुदा को ज़ेर कर सकते हो और न आसमान में और ख़ुदा के सिवा न तो तुम्हारा कोई सरपरस्त है और न मददगार
Verse 23
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ وَلِقَآٮِٕهِۦۤ أُوْلَـٰٓٮِٕكَ يَٮِٕسُواْ مِن رَّحۡمَتِى وَأُوْلَـٰٓٮِٕكَ لَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों और (क़यामत के दिन) उसके सामने हाज़िर होने से इन्कार किया मेरी रहमत से मायूस हो गए हैं और उन्हीं लोगों के वास्ते दर्दनाक अज़ाब है
Verse 24
فَمَا ڪَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦۤ إِلَّآ أَن قَالُواْ ٱقۡتُلُوهُ أَوۡ حَرِّقُوهُ فَأَنجَٮٰهُ ٱللَّهُ مِنَ ٱلنَّارِ ۚ إِنَّ فِى ذَٲلِكَ لَأَيَـٰتٍ لِّقَوۡمٍ يُؤۡمِنُونَ
ग़रज़ इबराहीम की क़ौम के पास (इन बातों का) इसके सिवा कोई जवाब न था कि बाहम कहने लगे इसको मार डालो या जला (कर ख़ाक) कर डालो (आख़िर वह कर गुज़रे) तो ख़ुदा ने उनको आग से बचा लिया इसमें शक नहीं कि दुनियादार लोगों के वास्ते इस वाकिये में (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
Verse 25
وَقَالَ إِنَّمَا ٱتَّخَذۡتُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَوۡثَـٰنًا مَّوَدَّةَ بَيۡنِكُمۡ فِى ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا ۖ ثُمَّ يَوۡمَ ٱلۡقِيَـٰمَةِ يَكۡفُرُ بَعۡضُڪُم بِبَعۡضٍ وَيَلۡعَنُ بَعۡضُڪُم بَعۡضًا وَمَأۡوَٮٰكُمُ ٱلنَّارُ وَمَا لَڪُم مِّن نَّـٰصِرِينَ
और इबराहीम ने (अपनी क़ौम से) कहा कि तुम लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर बुतो को सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी में बाहम मोहब्त करने की वजह से (ख़ुदा) बना रखा है फिर क़यामत के दिन तुम में से एक का एक इनकार करेगा और एक दूसरे पर लानत करेगा और (आख़िर) तुम लोगों का ठिकाना जहन्नुम है और (उस वक्त तुम्हारा कोई भी मददगार न होगा)
Verse 26
۞ فَـَٔامَنَ لَهُ ۥ لُوطٌ ۢ وَقَالَ إِنِّى مُهَاجِرٌ إِلَىٰ رَبِّىٓ ۖ إِنَّهُ ۥ هُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ
तब सिर्फ लूत इबराहीम पर ईमान लाए और इबराहीम ने कहा मै तो देस को छोड़कर अपने परवरदिगार की तरफ (जहाँ उसको मंज़ूर हो ) निकल जाऊँगा
Verse 27
وَوَهَبۡنَا لَهُ ۥۤ إِسۡحَـٰقَ وَيَعۡقُوبَ وَجَعَلۡنَا فِى ذُرِّيَّتِهِ ٱلنُّبُوَّةَ وَٱلۡكِتَـٰبَ وَءَاتَيۡنَـٰهُ أَجۡرَهُ ۥ فِى ٱلدُّنۡيَا ۖ وَإِنَّهُ ۥ فِى ٱلۡأَخِرَةِ لَمِنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ
इसमे शक नहीं कि वह ग़ालिब (और) हिकमत वाला है और हमने इबराहीम को इसहाक़ (सा बेटा) और याक़ूब (सा पोता) अता किया और उनकी नस्ल में पैग़म्बरी और किताब क़रार दी और हम न इबराहीम को दुनिया में भी अच्छा बदला अता किया और वह तो आख़ेरत में भी यक़ीनी नेको कारों से हैं
Verse 28
وَلُوطًا إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦۤ إِنَّڪُمۡ لَتَأۡتُونَ ٱلۡفَـٰحِشَةَ مَا سَبَقَڪُم بِہَا مِنۡ أَحَدٍ مِّنَ ٱلۡعَـٰلَمِينَ
(और ऐ रसूल) लूत को (याद करो) जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग अजब बेहयाई का काम करते हो कि तुमसे पहले सारी खुदायी के लोगों में से किसी ने नहीं किया
Verse 29
أَٮِٕنَّكُمۡ لَتَأۡتُونَ ٱلرِّجَالَ وَتَقۡطَعُونَ ٱلسَّبِيلَ وَتَأۡتُونَ فِى نَادِيكُمُ ٱلۡمُنڪَرَ ۖ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦۤ إِلَّآ أَن قَالُواْ ٱئۡتِنَا بِعَذَابِ ٱللَّهِ إِن ڪُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ
तुम लोग (औरतों को छोड़कर कज़ाए शहवत के लिए) मर्दों की तरफ गिरते हो और (मुसाफिरों की) रहजनी करते हो और तुम लोग अपनी महफिलों में बुरी बुरी हरकते करते हो तो (इन सब बातों का) लूत की क़ौम के पास इसके सिवा कोई जवाब न था कि वह लोग कहने लगे कि भला अगर तुम सच्चे हो तो हम पर ख़ुदा का अज़ाब तो ले आओ
Verse 30
قَالَ رَبِّ ٱنصُرۡنِى عَلَى ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡمُفۡسِدِينَ
तब लूत ने दुआ की कि परवरदिगार इन मुफ़सिद लोगों के मुक़ाबले में मेरी मदद कर
Verse 31
وَلَمَّا جَآءَتۡ رُسُلُنَآ إِبۡرَٲهِيمَ بِٱلۡبُشۡرَىٰ قَالُوٓاْ إِنَّا مُهۡلِكُوٓاْ أَهۡلِ هَـٰذِهِ ٱلۡقَرۡيَةِ ۖ إِنَّ أَهۡلَهَا ڪَانُواْ ظَـٰلِمِينَ
(उस वक्त अज़ाब की तैयारी हुई) और जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते इबराहीम के पास (बुढ़ापे में बेटे की) खुशखबरी लेकर आए तो (इबराहीम से) बोले हम लोग अनक़रीब इस गाँव के रहने वालों को हलाक करने वाले हैं (क्योंकि) इस बस्ती के रहने वाले यक़ीनी (बड़े) सरकश है
Verse 32
قَالَ إِنَّ فِيهَا لُوطًا ۚ قَالُواْ نَحۡنُ أَعۡلَمُ بِمَن فِيہَا ۖ لَنُنَجِّيَنَّهُ ۥ وَأَهۡلَهُ ۥۤ إِلَّا ٱمۡرَأَتَهُ ۥ ڪَانَتۡ مِنَ ٱلۡغَـٰبِرِينَ
(ये सुन कर) इबराहीम ने कहा कि इस बस्ती में तो लूत भी है वह फरिश्ते बोले जो लोग इस बस्ती में हैं हम लोग उनसे खूब वाक़िफ़ हैं हम तो उनको और उनके लड़के बालों को यक़ीनी बचा लेंगे मगर उनकी बीबी को वह (अलबता) पीछे रह जाने वालों में होगीं
Verse 33
وَلَمَّآ أَن جَآءَتۡ رُسُلُنَا لُوطًا سِىٓءَ بِہِمۡ وَضَاقَ بِهِمۡ ذَرۡعًا وَقَالُواْ لَا تَخَفۡ وَلَا تَحۡزَنۡ ۖ إِنَّا مُنَجُّوكَ وَأَهۡلَكَ إِلَّا ٱمۡرَأَتَكَ ڪَانَتۡ مِنَ ٱلۡغَـٰبِرِينَ
और जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते लूत के पास आए लूत उनके आने से ग़मग़ीन हुए और उन (की मेहमानी) से दिल तंग हुए (क्योंकि वह नौजवान खूबसूरत मर्दों की सरूत में आए थे) फरिश्तों ने कहा आप ख़ौफ न करें और कुढ़े नही हम आपको और आपके लड़के बालों को बचा लेगें मगर आपकी बीबी (क्योंकि वह पीछे रह जाने वालो से होगी)
Verse 34
إِنَّا مُنزِلُونَ عَلَىٰٓ أَهۡلِ هَـٰذِهِ ٱلۡقَرۡيَةِ رِجۡزًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ
हम यक़ीनन इसी बस्ती के रहने वालों पर चूँकि ये लोग बदकारियाँ करते रहे एक आसमानी अज़ाब नाज़िल करने वाले हैं
Verse 35
وَلَقَد تَّرَڪۡنَا مِنۡهَآ ءَايَةَۢ بَيِّنَةً لِّقَوۡمٍ يَعۡقِلُونَ
और हमने यक़ीनी उस (उलटी हुई बस्ती) में से समझदार लोगों के वास्ते (इबरत की) एक वाज़ेए व रौशन निशानी बाक़ी रखी है
Verse 36
وَإِلَىٰ مَدۡيَنَ أَخَاهُمۡ شُعَيۡبًا فَقَالَ يَـٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ وَٱرۡجُواْ ٱلۡيَوۡمَ ٱلۡأَخِرَ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِى ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ
और (हमने) मदियन के रहने वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बनाकर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो और रोज़े आखेरत की उम्मीद रखो और रुए ज़मीन में फ़साद न फैलाते फिरो
Verse 37
فَڪَذَّبُوهُ فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلرَّجۡفَةُ فَأَصۡبَحُواْ فِى دَارِهِمۡ جَـٰثِمِينَ
तो उन लोगों ने शुऐब को झुठलाया पस ज़लज़ले (भूचाल) ने उन्हें ले डाला- तो वह लोग अपने घरों में औंधे ज़ानू के बल पड़े रह गए
Verse 38
وَعَادًا وَثَمُودَاْ وَقَد تَّبَيَّنَ لَڪُم مِّن مَّسَـٰڪِنِهِمۡ ۖ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَـٰنُ أَعۡمَـٰلَهُمۡ فَصَدَّهُمۡ عَنِ ٱلسَّبِيلِ وَكَانُواْ مُسۡتَبۡصِرِينَ
और क़ौम आद और समूद को (भी हलाक कर डाला) और (ऐ अहले मक्का) तुम को तो उनके (उजड़े हुए) घर भी (रास्ता आते जाते) मालूम हो चुके और शैतान ने उनकी नज़र में उनके कामों को अच्छा कर दिखाया था और उन्हें (सीधी) राह (चलने) से रोक दिया था हालॉकि वह बड़े होशियार थे
Verse 39
وَقَـٰرُونَ وَفِرۡعَوۡنَ وَهَـٰمَـٰنَ ۖ وَلَقَدۡ جَآءَهُم مُّوسَىٰ بِٱلۡبَيِّنَـٰتِ فَٱسۡتَڪۡبَرُواْ فِى ٱلۡأَرۡضِ وَمَا كَانُواْ سَـٰبِقِينَ
और (हम ही ने) क़ारुन व फिरऔन व हामान को भी (हलाक कर डाला) हालॉकि उन लोगों के पास मूसा वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर आए फिर भी ये लोग रुए ज़मीन में सरकशी करते फिरे और हमसे (निकल कर) कहीं आगे न बढ़ सके
Verse 40
فَكُلاًّ أَخَذۡنَا بِذَنۢبِهِۦ ۖ فَمِنۡهُم مَّنۡ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِ حَاصِبًا وَمِنۡهُم مَّنۡ أَخَذَتۡهُ ٱلصَّيۡحَةُ وَمِنۡهُم مَّنۡ خَسَفۡنَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ وَمِنۡهُم مَّنۡ أَغۡرَقۡنَا ۚ وَمَا ڪَانَ ٱللَّهُ لِيَظۡلِمَهُمۡ وَلَـٰكِن ڪَانُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ يَظۡلِمُونَ
तो हमने सबको उनके गुनाह की सज़ा में ले डाला चुनांन्चे उनमे से बाज़ तो वह थे जिन पर हमने पत्थर वाली ऑंधी भेजी और बाज़ उनमें से वह थे जिन को एक सख्त चिंघाड़ ने ले डाला और बाज़ उनमें से वह थे जिनको हमने ज़मीन मे धॅसा दिया और बाज़ उनमें से वह थे जिन्हें हमने डुबो मारा और ये बात नहीं कि ख़ुदा ने उन पर ज़ुल्म किया हो बल्कि (सच युं है कि) ये लोग ख़ुद (ख़ुदा की नाफ़रमानी करके) आप अपने ऊपर ज़ुल्म करते रहे
Verse 41
مَثَلُ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَوۡلِيَآءَ كَمَثَلِ ٱلۡعَنڪَبُوتِ ٱتَّخَذَتۡ بَيۡتًا ۖ وَإِنَّ أَوۡهَنَ ٱلۡبُيُوتِ لَبَيۡتُ ٱلۡعَنڪَبُوتِ ۖ لَوۡ ڪَانُواْ يَعۡلَمُونَ
जिन लोगों ने ख़ुदा के सिवा दूसरे कारसाज़ बना रखे हैं उनकी मसल उस मकड़ी की सी है जिसने (अपने ख्याल नाक़िस में) एक घर बनाया और उसमें तो शक ही नहीं कि तमाम घरों से बोदा घर मकड़ी का होता है मगर ये लोग (इतना भी) जानते हो
Verse 42
إِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا يَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ مِن شَىۡءٍ ۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَڪِيمُ
ख़ुदा को छोड़कर ये लोग जिस चीज़ को पुकारते हैं उससे ख़ुदा यक़ीनी वाक़िफ है और वह तो (सब पर) ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
Verse 43
وَتِلۡكَ ٱلۡأَمۡثَـٰلُ نَضۡرِبُهَا لِلنَّاسِ ۖ وَمَا يَعۡقِلُهَآ إِلَّا ٱلۡعَـٰلِمُونَ
और हम ये मिसाले लोगों के (समझाने) के वास्ते बयान करते हैं और उन को तो बस उलमा ही समझते हैं
Verse 44
خَلَقَ ٱللَّهُ ٱلسَّمَـٰوَٲتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّ ۚ إِنَّ فِى ذَٲلِكَ لَأَيَةً لِّلۡمُؤۡمِنِينَ
ख़ुदा ने सारे आसमान और ज़मीन को बिल्कुल ठीक पैदा किया इसमें शक नहीं कि उसमें ईमानदारों के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) यक़ीनी बड़ी निशानी है
Verse 45
ٱتۡلُ مَآ أُوحِىَ إِلَيۡكَ مِنَ ٱلۡكِتَـٰبِ وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ ۖ إِنَّ ٱلصَّلَوٰةَ تَنۡهَىٰ عَنِ ٱلۡفَحۡشَآءِ وَٱلۡمُنكَرِ ۗ وَلَذِكۡرُ ٱللَّهِ أَڪۡبَرُ ۗ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ مَا تَصۡنَعُونَ
(ऐ रसूल) जो किताब तुम्हारे पास नाज़िल की गयी है उसकी तिलावत करो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो बेशक नमाज़ बेहयाई और बुरे कामों से बाज़ रखती है और ख़ुदा की याद यक़ीनी बड़ा मरतबा रखती है और तुम लोग जो कुछ करते हो ख़ुदा उससे वाक़िफ है
Verse 46
۞ وَلَا تُجَـٰدِلُوٓاْ أَهۡلَ ٱلۡڪِتَـٰبِ إِلَّا بِٱلَّتِى هِىَ أَحۡسَنُ إِلَّا ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنۡهُمۡ ۖ وَقُولُوٓاْ ءَامَنَّا بِٱلَّذِىٓ أُنزِلَ إِلَيۡنَا وَأُنزِلَ إِلَيۡڪُمۡ وَإِلَـٰهُنَا وَإِلَـٰهُكُمۡ وَٲحِدٌ وَنَحۡنُ لَهُ ۥ مُسۡلِمُونَ
और (ऐ ईमानदारों) अहले किताब से मनाज़िरा न किया करो मगर उमदा और शाएस्ता अलफाज़ व उनवान से लेकिन उनमें से जिन लोगों ने तुम पर ज़ुल्म किया (उनके साथ रिआयत न करो) और साफ साफ कह दो कि जो किताब हम पर नाज़िल हुई और जो किताब तुम पर नाज़िल हुई है हम तो सब पर ईमान ला चुके और हमारा माबूद और तुम्हारा माबूद एक ही है और हम उसी के फरमाबरदार है
Verse 47
وَكَذَٲلِكَ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ ٱلۡڪِتَـٰبَ ۚ فَٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَـٰهُمُ ٱلۡڪِتَـٰبَ يُؤۡمِنُونَ بِهِۦ ۖ وَمِنۡ هَـٰٓؤُلَآءِ مَن يُؤۡمِنُ بِهِۦ ۚ وَمَا يَجۡحَدُ بِـَٔايَـٰتِنَآ إِلَّا ٱلۡڪَـٰفِرُونَ
और (ऐ रसूल जिस तरह अगले पैग़म्बरों पर किताबें उतारी) उसी तरह हमने तुम्हारे पास किताब नाज़िल की तो जिन लोगों को हमने (पहले) किताब अता की है वह उस पर भी ईमान रखते हैं और (अरबो) में से बाज़ वह हैं जो उस पर ईमान रखते हैं और हमारी आयतों के तो बस पक्के कट्टर काफिर ही मुनकिर है
Verse 48
وَمَا كُنتَ تَتۡلُواْ مِن قَبۡلِهِۦ مِن كِتَـٰبٍ وَلَا تَخُطُّهُ ۥ بِيَمِينِكَ ۖ إِذًا لَّٱرۡتَابَ ٱلۡمُبۡطِلُونَ
और (ऐ रसूल) क़ुरान से पहले न तो तुम कोई किताब ही पढ़ते थे और न अपने हाथ से तुम लिखा करते थे ऐसा होता तो ये झूठे ज़रुर (तुम्हारी नबुवत में) शक करते
Verse 49
بَلۡ هُوَ ءَايَـٰتُۢ بَيِّنَـٰتٌ فِى صُدُورِ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ ۚ وَمَا يَجۡحَدُ بِـَٔايَـٰتِنَآ إِلَّا ٱلظَّـٰلِمُونَ
मगर जिन लोगों को (ख़ुदा की तरफ से) इल्म अता हुआ है उनके दिल में ये (क़ुरान) वाजेए व रौशन आयतें हैं और सरकशी के सिवा हमारी आयतो से कोई इन्कार नहीं करता
Verse 50
وَقَالُواْ لَوۡلَآ أُنزِلَ عَلَيۡهِ ءَايَـٰتٌ مِّن رَّبِّهِۦ ۖ قُلۡ إِنَّمَا ٱلۡأَيَـٰتُ عِندَ ٱللَّهِ وَإِنَّمَآ أَنَا۟ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
और (कुफ्फ़ार अरब) कहते हैं कि इस (रसूल) पर उसके परवरदिगार की तरफ से मौजिज़े क्यों नही नाज़िल होते (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि मौजिज़े तो बस ख़ुदा ही के पास हैं और मै तो सिर्फ साफ साफ (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाला हूँ
Verse 51
أَوَلَمۡ يَكۡفِهِمۡ أَنَّآ أَنزَلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡڪِتَـٰبَ يُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡ ۚ إِنَّ فِى ذَٲلِكَ لَرَحۡمَةً وَذِڪۡرَىٰ لِقَوۡمٍ يُؤۡمِنُونَ
क्या उनके लिए ये काफी नहीं कि हमने तुम पर क़ुरान नाज़िल किया जो उनके सामने पढ़ा जाता है इसमें शक नहीं कि ईमानदार लोगों के लिए इसमें (ख़ुदा की बड़ी) मेहरबानी और (अच्छी ख़ासी) नसीहत है
Verse 52
قُلۡ كَفَىٰ بِٱللَّهِ بَيۡنِى وَبَيۡنَڪُمۡ شَہِيدًا ۖ يَعۡلَمُ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٲتِ وَٱلۡأَرۡضِ ۗ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱلۡبَـٰطِلِ وَڪَفَرُواْ بِٱللَّهِ أُوْلَـٰٓٮِٕكَ هُمُ ٱلۡخَـٰسِرُونَ
तुम कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है जो सारे आसमान व ज़मीन की चीज़ों को जानता है-और जिन लोगों ने बातिल को माना और ख़ुदा से इन्कार किया वही लोग बड़े घाटे में रहेंगे
Verse 53
وَيَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلۡعَذَابِ ۚ وَلَوۡلَآ أَجَلٌ مُّسَمًّى لَّجَآءَهُمُ ٱلۡعَذَابُ وَلَيَأۡتِيَنَّہُم بَغۡتَةً وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ
और (ऐ रसूल) तुमसे लोग अज़ाब के नाज़िल होने की जल्दी करते हैं और अगर (अज़ाब का) वक्त मुअय्यन न होता तो यक़ीनन उनके पास अब तक अज़ाब आ जाता और (आख़िर एक दिन) उन पर अचानक ज़रुर आ पड़ेगा और उनको ख़बर भी न होगी
Verse 54
يَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلۡعَذَابِ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةُۢ بِٱلۡكَـٰفِرِينَ
ये लोग तुमसे अज़ाब की जल्दी करते हैं और ये यक़ीनी बात है कि दोज़ख़ काफिरों को (इस तरह) घेर कर रहेगी (कि रुक न सकेंगे)
Verse 55
يَوۡمَ يَغۡشَٮٰهُمُ ٱلۡعَذَابُ مِن فَوۡقِهِمۡ وَمِن تَحۡتِ أَرۡجُلِهِمۡ وَيَقُولُ ذُوقُواْ مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ
जिस दिन अज़ाब उनके सर के ऊपर से और उनके पॉव के नीचे से उनको ढॉके होगा और ख़ुदा (उनसे) फरमाएगा कि जो जो कारस्तानियॉ तुम (दुनिया में) करते थे अब उनका मज़ा चखो
Verse 56
يَـٰعِبَادِىَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّ أَرۡضِى وَٲسِعَةٌ فَإِيَّـٰىَ فَٱعۡبُدُونِ
ऐ मेरे ईमानदार बन्दों मेरी ज़मीन तो यक़ीनन कुशादा है तो तुम मेरी ही इबादत करो
Verse 57
كُلُّ نَفۡسٍ ذَآٮِٕقَةُ ٱلۡمَوۡتِ ۖ ثُمَّ إِلَيۡنَا تُرۡجَعُونَ
हर शख्स (एक न एक दिन) मौत का मज़ा चखने वाला है फिर तुम सब आख़िर हमारी ही तरफ लौटए जाओंगे
Verse 58
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَنُبَوِّئَنَّهُم مِّنَ ٱلۡجَنَّةِ غُرَفًا تَجۡرِى مِن تَحۡتِہَا ٱلۡأَنۡهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيہَا ۚ نِعۡمَ أَجۡرُ ٱلۡعَـٰمِلِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको हम बेहश्त के झरोखों में जगह देगें जिनके नीचे नहरें जारी हैं जिनमें वह हमेशा रहेंगे (अच्छे चलन वालो की भी क्या ख़ूब ख़री मज़दूरी है)
Verse 59
ٱلَّذِينَ صَبَرُواْ وَعَلَىٰ رَبِّہِمۡ يَتَوَكَّلُونَ
जिन्होंने (दुनिया में मुसिबतों पर) सब्र किया और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं
Verse 60
وَڪَأَيِّن مِّن دَآبَّةٍ لَّا تَحۡمِلُ رِزۡقَهَا ٱللَّهُ يَرۡزُقُهَا وَإِيَّاكُمۡ ۚ وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ
और ज़मीन पर चलने वालों में बहुतेरे ऐसे हैं जो अपनी रोज़ी अपने ऊपर लादे नहीं फिरते ख़ुदा ही उनको भी रोज़ी देता है और तुम को भी और वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
Verse 61
وَلَٮِٕن سَأَلۡتَهُم مَّنۡ خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٲتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَسَخَّرَ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَ لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ يُؤۡفَكُونَ
(ऐ रसूल) अगर तुम उनसे पूछो कि (भला) किसने सारे आसमान व ज़मीन को पैदा किया और चाँद और सूरज को काम में लगाया तो वह ज़रुर यही कहेंगे कि अल्लाह ने फिर वह कहाँ बहके चले जाते हैं
Verse 62
ٱللَّهُ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦ وَيَقۡدِرُ لَهُ ۥۤ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَىۡءٍ عَلِيمٌ
ख़ुदा ही अपने बन्दों में से जिसकी रोज़ी चाहता है कुशादा कर देता है और जिसके लिए चाहता है तंग कर देता है इसमें शक नहीं कि ख़ुदा ही हर चीज़ से वाक़िफ है
Verse 63
وَلَٮِٕن سَأَلۡتَهُم مَّن نَّزَّلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءً فَأَحۡيَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ مِنۢ بَعۡدِ مَوۡتِهَا لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُ ۚ قُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ۚ بَلۡ أَڪۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡقِلُونَ
और (ऐ रसूल) अगर तुम उससे पूछो कि किसने आसमान से पानी बरसाया फिर उसके ज़रिये से ज़मीन को इसके मरने (परती होने) के बाद ज़िन्दा (आबाद) किया तो वह ज़रुर यही कहेंगे कि अल्लाह ने (ऐ रसूल) तुम कह दो अल्हम दो लिल्लाह-मगर उनमे से बहुतेरे (इतना भी) नहीं समझते
Verse 64
وَمَا هَـٰذِهِ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَآ إِلَّا لَهۡوٌ وَلَعِبٌ ۚ وَإِنَّ ٱلدَّارَ ٱلۡأَخِرَةَ لَهِىَ ٱلۡحَيَوَانُ ۚ لَوۡ ڪَانُواْ يَعۡلَمُونَ
और ये दुनिया की ज़िन्दगी तो खेल तमाशे के सिवा कुछ नहीं और मगर ये लोग समझें बूझें तो इसमे शक नहीं कि अबदी ज़िन्दगी (की जगह) तो बस आख़ेरत का घर है (बाक़ी लग़ो)
Verse 65
فَإِذَا رَڪِبُواْ فِى ٱلۡفُلۡكِ دَعَوُاْ ٱللَّهَ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَ فَلَمَّا نَجَّٮٰهُمۡ إِلَى ٱلۡبَرِّ إِذَا هُمۡ يُشۡرِكُونَ
फिर जब ये लोग कश्ती में सवार होते हैं तो निहायत ख़ुलूस से उसकी इबादत करने वाले बन कर ख़ुदा से दुआ करते हैं फिर जब उन्हें ख़ुश्की में (पहुँचा कर) नजात देता है तो फौरन शिर्क करने लगते हैं
Verse 66
لِيَكۡفُرُواْ بِمَآ ءَاتَيۡنَـٰهُمۡ وَلِيَتَمَتَّعُواْ ۖ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ
ताकि जो (नेअमतें) हमने उन्हें अता की हैं उनका इन्कार कर बैठें और ताकि (दुनिया में) ख़ूब चैन कर लें तो अनक़रीब ही (इसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा
Verse 67
أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا جَعَلۡنَا حَرَمًا ءَامِنًا وَيُتَخَطَّفُ ٱلنَّاسُ مِنۡ حَوۡلِهِمۡ ۚ أَفَبِٱلۡبَـٰطِلِ يُؤۡمِنُونَ وَبِنِعۡمَةِ ٱللَّهِ يَكۡفُرُونَ
क्या उन लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि हमने हरम (मक्का) को अमन व इत्मेनान की जगह बनाया हालॉकि उनके गिर्द व नवाह से लोग उचक ले जाते हैं तो क्या ये लोग झूठे माबूदों पर ईमान लाते हैं और ख़ुदा की नेअमत की नाशुक्री करते हैं
Verse 68
وَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ ڪَذِبًا أَوۡ كَذَّبَ بِٱلۡحَقِّ لَمَّا جَآءَهُ ۥۤ ۚ أَلَيۡسَ فِى جَهَنَّمَ مَثۡوًى لِّلۡڪَـٰفِرِينَ
और जो शख्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या जब उसके पास कोई सच्ची बात आए तो झुठला दे इससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा क्या (इन) काफिरों का ठिकाना जहन्नुम में नहीं है (ज़रुर है)
Verse 69
وَٱلَّذِينَ جَـٰهَدُواْ فِينَا لَنَہۡدِيَنَّہُمۡ سُبُلَنَا ۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَمَعَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ
और जिन लोगों ने हमारी राह में जिहाद किया उन्हें हम ज़रुर अपनी राह की हिदायत करेंगे और इसमें शक नही कि ख़ुदा नेकोकारों का साथी है