Surah Al-Humazah
Quran Surah
Surah 104: Al-Humazah
الهمزة
Verse count: 9
Opening Bismillah
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं।
Verse 1
وَيۡلٌ لِّڪُلِّ هُمَزَةٍ لُّمَزَةٍ
हर ताना देने वाले चुग़लख़ोर की ख़राबी है
Verse 2
ٱلَّذِى جَمَعَ مَالاً وَعَدَّدَهُ ۥ
जो माल को जमा करता है और गिन गिन कर रखता है
Verse 3
يَحۡسَبُ أَنَّ مَالَهُ ۥۤ أَخۡلَدَهُ ۥ
वह समझता है कि उसका माल उसे हमेशा ज़िन्दा बाक़ी रखेगा
Verse 4
كَلَّا ۖ لَيُنۢبَذَنَّ فِى ٱلۡحُطَمَةِ
हरगिज़ नहीं वह तो ज़रूर हुतमा में डाला जाएगा
Verse 5
وَمَآ أَدۡرَٮٰكَ مَا ٱلۡحُطَمَةُ
और तुमको क्या मालूम हतमा क्या है
Verse 6
نَارُ ٱللَّهِ ٱلۡمُوقَدَةُ
वह ख़ुदा की भड़काई हुई आग है जो (तलवे से लगी तो) दिलों तक चढ़ जाएगी
Verse 7
ٱلَّتِى تَطَّلِعُ عَلَى ٱلۡأَفۡـِٔدَةِ
ये लोग आग के लम्बे सुतूनो
Verse 8
إِنَّہَا عَلَيۡہِم مُّؤۡصَدَةٌ
में डाल कर बन्द कर दिए
Verse 9
فِى عَمَدٍ مُّمَدَّدَةِۭ
जाएँगे